Tarun Tejpal News: 2013 के चर्चित यौन उत्पीड़न मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा बेंच ने पूर्व तहलका संपादक तरुण तेजपाल को बड़ा झटका दिया है। अदालत ने ट्रायल कोर्ट के बरी करने के फैसले को पलटते हुए गोवा सरकार की अपील स्वीकार की और तेजपाल को दोषी ठहराया। न्यायमूर्ति नीला गोखले और न्यायमूर्ति अमित जमसंडेकर की खंडपीठ ने यह फैसला सुनाया। फैसला सुनाए जाने के दौरान तरुण तेजपाल अदालत में मौजूद रहे। हालांकि, अदालत ने अभी सजा तय नहीं की है और इस मुद्दे पर अलग से सुनवाई होगी।
बॉम्बे हाई कोर्ट ने फैसला सुनाया
बॉम्बे हाई कोर्ट ने चर्चित तेजपाल मामले में अपना फैसला सुनाया। फैसले के समय तेजपाल अदालत में मौजूद रहे,क्योंकि सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट की बेंच ने उन्हें निर्णय सुनाए जाने के दिन अदालत में उपस्थित रहने का निर्देश दिया था। हालांकि, फैसले की विस्तृत प्रति अभी उपलब्ध नहीं हो सकी है, जिससे अदालत के तर्क और आदेश की पूरी जानकारी सामने आना बाकी है। इस मामले में राज्य की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और गोवा के एडवोकेट जनरल देविदास पंगम ने पक्ष रखा। लंबे समय से चर्चा में रहे इस मामले के फैसले पर सभी की नजरें टिकी थीं।
Bombay High Court at Goa convicts Tehelka magazine Founder Tarun Tejpal in the 2013 sexual assault case pic.twitter.com/CSliQfbLa1
— ANI (@ANI) August 6, 2026
लिफ्ट में महिला के साथ हुआ था यौन उत्पीड़न
यह मामला उस कथित यौन उत्पीड़न प्रकरण से जुड़ा है। जिसमें तहलका पत्रिका की एक जूनियर महिला सहकर्मी ने आरोप लगाया था कि गोवा में आयोजित पत्रिका के एक कार्यक्रम के दौरान होटल की लिफ्ट में तरुण तेजपाल ने उसके साथ यौन उत्पीड़न किया।
निष्पक्ष सुनवाई के बजाय पीड़िता के आचरण उठाए गए सवाल: ट्रायल कोर्ट
इस मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने हाई कोर्ट में दलील दी कि सेशंस कोर्ट ने रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्यों का समुचित मूल्यांकन करने के बजाय पीड़िता के घटना के बाद के व्यवहार, उसकी प्रतिक्रियाओं और व्यक्तिगत पृष्ठभूमि पर अधिक ध्यान केंद्रित किया। राज्य की ओर से यह भी कहा गया कि ट्रायल कोर्ट ने आरोपी के खिलाफ मुकदमे की निष्पक्ष सुनवाई करने के बजाय पीड़िता के आचरण को ही कठघरे में खड़ा कर दिया।
ट्रायल कोर्ट पर कई महत्वपूर्ण साक्ष्यों की अनदेखी करने का आरोप!
सुनवाई के दौरान यह तर्क भी रखा गया कि ट्रायल कोर्ट ने कई महत्वपूर्ण साक्ष्यों की अनदेखी की। इनमें सबसे अहम वह ई-मेल बताया गया, जिसे तरुण तेजपाल ने पीड़िता को भेजा था। अभियोजन के अनुसार, यह ई-मेल उस समय भेजा गया था जब पीड़िता ने कंपनी के तत्कालीन मैनेजिंग एडिटर से यौन उत्पीड़न की शिकायत की थी। राज्य का कहना था कि इस ई-मेल सहित अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्यों का समुचित मूल्यांकन नहीं किया गया, जिससे मामले की सुनवाई और फैसले पर असर पड़ा।
2021 में सबूतों के आधार पर बरी किया गया था
गौरतलब है कि मई 2021 में मापुसा की सत्र अदालत ने सबूतों के अभाव में तरुण तेजपाल को सभी आरोपों से बरी कर दिया था। जिसके बाद गोवा सरकार ने इसके खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट में अपील दायर की थी। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने दलील दी कि ट्रायल कोर्ट ने उपलब्ध साक्ष्यों का सही मूल्यांकन करने के बजाय पीड़िता के व्यवहार पर अधिक ध्यान दिया था। साथ ही महत्वपूर्ण सबूतों,जिनमें तेजपाल का माफी मांगने वाला ई-मेल भी शामिल था, इनकी अनदेखी की। हालांकि हाईकोर्ट ने राज्य की अपील स्वीकार करते हुए बरी करने का फैसला रद्द कर दिया और तेजपाल को दोषी ठहराया।
क्या है पूरा मामला
मिली जानकारी के अनुसार यह पूरा मामला नवंबर 2023 का है। जब गोवा में आयोजित THINK फेस्टिवल के दौरान तहलका की एक जूनियर महिला सहकर्मी ने तरुण तेजपाल पर दुष्कर्म का आरोप लगाया था। इसके बाद इस मामले संज्ञान लेते हुए गोवा पुलिस ने FIR दर्ज की थी, और इसके बाद तेजपाल को गिरफ्तार किया गया था।
Written By: Geeta Sharma