पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर नई हलचल देखने को मिली है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) से अलग होकर नया राजनीतिक गुट बनाने वाले विपक्ष के नेता और बागी विधायक ऋतब्रत बनर्जी ने अपने संगठन के जिला स्तर के नेतृत्व की घोषणा कर दी है। बीते दिन शनिवार, 11 जुलाई 2026 को उन्होंने कई महत्वपूर्ण जिलों के अध्यक्षों के नाम सार्वजनिक किए, जिससे राज्य की सियासत में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

बीरभूम जिले की नियुक्ति ने खींचा ध्यान

सबसे ज्यादा ध्यान बीरभूम जिले की नियुक्ति ने खींचा है, जहां पूर्व टीएमसी नेता अनुब्रत मंडल को जिला अध्यक्ष बनाया गया है। अनुब्रत मंडल लंबे समय तक टीएमसी के प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते रहे हैं और उन्हें पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बेहद करीबी नेताओं में शामिल माना जाता था। बीरभूम जिले में उनका मजबूत राजनीतिक प्रभाव रहा है। अब उन्होंने औपचारिक रूप से ऋतब्रत बनर्जी के नए गुट का दामन थाम लिया है, जिसे टीएमसी के लिए एक और राजनीतिक झटका माना जा रहा है।

ऋतब्रत बनर्जी ने मीडिया से बातचीत में कही ये बात

ऋतब्रत बनर्जी ने मीडिया से बातचीत में बताया कि संगठन को मजबूत बनाने के उद्देश्य से विभिन्न जिलों में नेतृत्व की जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं, उन्होंने कहा कि आने वाले समय में अन्य जिलों में भी संगठनात्मक विस्तार किया जाएगा ताकि पार्टी की गतिविधियों को जमीनी स्तर तक पहुंचाया जा सके।

जारी की गई सूची

जारी सूची के अनुसार मालदा जिले की जिम्मेदारी प्रसून बनर्जी को सौंपी गई है। वहीं दक्षिण कोलकाता जिला अध्यक्ष के रूप में देबाशीष कुमार को नियुक्त किया गया है। उत्तर प्रदेश (यूपी) इकाई का नेतृत्व संदीपन साहा को दिया गया है, जबकि बीरभूम जिले की कमान अनुब्रत मंडल को मिली है। पिछले कुछ समय से अनुब्रत मंडल के राजनीतिक रुख को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही थीं, जिन पर अब विराम लग गया है।

वरिष्ठ नेता अरूप रॉय को बनाया गया अध्यक्ष

इससे पहले भी ऋतब्रत बनर्जी अपने नए राजनीतिक संगठन के लिए नेतृत्व संरचना तैयार करने की घोषणा कर चुके थे, उन्होंने एएटीसी (AATC) समिति के गठन की जानकारी देते हुए वरिष्ठ नेता अरूप रॉय को अध्यक्ष बनाया था। अब जिला अध्यक्षों की नियुक्ति के साथ संगठन को और अधिक मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाया गया है।

ऋतब्रत ने 30 सदस्यीय राष्ट्रीय कार्यसमिति के गठन का किया ऐलान

इसी क्रम में ऋतब्रत बनर्जी ने 30 सदस्यीय राष्ट्रीय कार्यसमिति के गठन का भी ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि उनकी नई राजनीतिक व्यवस्था में ममता बनर्जी को मार्गदर्शक की भूमिका में देखा जाएगा। कार्यसमिति में फिरहाद हकीम, अरूप बिस्वास, रथिन घोष, सबीना यास्मीन, जावेद खान, संदीपन साहा सहित कई अन्य नेताओं को जगह दी गई है। उनके अनुसार यह टीम संगठन के विस्तार और भविष्य की रणनीति तय करने में अहम भूमिका निभाएगी।

टीएमसी को लगे कई बड़े राजनीतिक झटके

 बता दें कि टीएमसी को हाल के दिनों में कई बड़े राजनीतिक झटके लगे हैं। इससे पहले पार्टी के तीन राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रॉय, सुष्मिता देव और प्रकाश चिक बारिकने टीएमसी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) का दामन थाम लिया था। बीजेपी ने तीनों नेताओं को औपचारिक रूप से पार्टी में शामिल करने के तुरंत बाद आगामी राज्यसभा उपचुनाव के लिए अपना उम्मीदवार भी घोषित कर दिया।

रिक्त सीटों के लिए 24 जुलाई को होंगे मतदान

गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में राज्यसभा की रिक्त सीटों के लिए 24 जुलाई को मतदान होना प्रस्तावित है। मतदान के बाद उसी दिन मतगणना भी कराई जाएगी। ऐसे में टीएमसी से नेताओं का लगातार बाहर जाना और नए राजनीतिक समीकरण बनना आगामी चुनावी मुकाबले को और दिलचस्प बना सकता है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में पश्चिम बंगाल की राजनीति में और भी बड़े घटनाक्रम देखने को मिल सकते हैं।

 

Written By Toshi Shah