संसद के मानसून सत्र में सोमवार 3 अगस्त का दिन काफी अहम माना जा रहा है। सत्र समाप्त होने में अब केवल 9 दिन शेष हैं, ऐसे में केंद्र सरकार विधेयकों को पारित कराने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। सरकार आज लोकसभा में 4 प्रमुख विधेयकों को पेश करने और उन पर चर्चा आगे बढ़ाने की तैयारी में है। हालांकि, विपक्ष ने पहले ही इन विधेयकों और अन्य राजनीतिक मुद्दों को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है,जिससे सदन में एक बार फिर हंगामे के आसार बन गए हैं।
इन प्रमुख विधेयकों पर रहेगी नजर
सरकार जिन महत्वपूर्ण विधेयकों को सदन में आगे बढ़ाने की तैयारी कर रही है,उनमें सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने से संबंधित विधेयक प्रमुख है। इस प्रस्ताव के तहत सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाकर 37 किए जाने का प्रावधान किया गया है,ताकि लंबित मामलों के शीघ्र निपटारे में मदद मिल सके।
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इसके अलावा भारतीय सांख्यिकी संस्थान (इंडियन स्टेटिस्टिकल इंस्टीट्यूट) के लिए व्यापक वैधानिक ढांचा उपलब्ध कराने वाला विधेयक भी सूची में शामिल है। सरकार सूक्ष्म,लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) विकास अधिनियम में संशोधन से जुड़े विधेयक को भी सदन में पेश करेगी,जिसका उद्देश्य इस क्षेत्र को और अधिक सक्षम एवं प्रतिस्पर्धी बनाना बताया जा रहा है।
FCRA संशोधन विधेयक पर बढ़ा विवाद
सबसे अधिक चर्चा विदेशी अंशदान विनियमन कानून (FCRA) संशोधन विधेयक को लेकर हो रही है। विपक्षी दलों का आरोप है कि प्रस्तावित संशोधन के माध्यम से सरकार उन संस्थाओं की संपत्तियों पर नियंत्रण स्थापित करने का अधिकार हासिल कर सकती है,जिनका एफसीआरए पंजीकरण नवीनीकृत नहीं होता।
तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा नेता डेरेक ओ’ब्रायन सहित कई विपक्षी नेताओं ने मांग की है कि इस विधेयक को जल्दबाजी में पारित करने के बजाय विस्तृत जांच और विचार-विमर्श के लिए संसदीय समिति के पास भेजा जाए। विपक्ष का कहना है कि ऐसे संवेदनशील कानून पर व्यापक चर्चा आवश्यक है।
विपक्ष के विरोध के बीच पहले ही पारित हो चुके हैं दो अहम विधेयक
पिछले सप्ताह भी संसद में विपक्ष के लगातार विरोध और हंगामे के बीच सरकार दो महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराने में सफल रही थी। इनमें वंदे मातरम को राष्ट्रगान के समान कानूनी संरक्षण प्रदान करने वाला विधेयक शामिल है। इसके अलावा जन्म और मृत्यु के विलंबित पंजीकरण से संबंधित नियमों को और अधिक सख्त बनाने वाला विधेयक भी संसद से पारित किया गया। इन विधेयकों के पारित होने के बाद विपक्ष ने सरकार पर पर्याप्त चर्चा के बिना कानून बनाने का आरोप लगाया था।
सरकार और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप
विपक्ष का आरोप है कि सरकार संसद में पर्याप्त बहस और चर्चा से बचते हुए जल्दबाजी में विधेयकों को पारित करा रही है। वहीं संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि बार-बार होने वाले व्यवधानों और हंगामे के कारण ही चर्चा के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पा रहा है।
उन्होंने विपक्ष से सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से चलाने में सहयोग करने की अपील करते हुए कहा कि यदि विपक्ष लगातार विरोध करता रहेगा तो विधेयकों पर सार्थक बहस संभव नहीं हो पाएगी। रिजिजू ने कहा कि सरकार चर्चा के लिए तैयार है,लेकिन सदन में व्यवधान लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित करता है।
राम मंदिर दान विवाद और छात्र कार्रवाई पर विपक्ष का हमला
विधायी कार्यों के अलावा राजनीतिक मुद्दों पर भी संसद में टकराव की स्थिति बनी हुई है। कांग्रेस सहित कई विपक्षी दल राम मंदिर में मिले दान के कथित गबन के आरोपों को लेकर सरकार को घेर रहे हैं। इसके साथ ही विपक्ष 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान दिल्ली में छात्रों के खिलाफ हुई पुलिस कार्रवाई को भी बड़ा मुद्दा बना रहा है। विपक्ष की मांग है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह संसद में इस पूरे मामले पर विस्तृत बयान दें और छात्रों के खिलाफ हुई कार्रवाई पर सरकार अपना पक्ष स्पष्ट करे।
आज भी हंगामे के बीच कार्यवाही की संभावना
सरकार की प्राथमिकता लंबित विधेयकों को समय रहते पारित कराना है, जबकि विपक्ष विभिन्न राजनीतिक और जनहित के मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति पर कायम है। ऐसे में सोमवार को लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में तीखी बहस, विरोध और संभावित हंगामे के बीच महत्वपूर्ण विधायी कार्य होने की संभावना है। आने वाले दिनों में मानसून सत्र का शेष समय भी सरकार और विपक्ष के बीच इसी तरह के राजनीतिक टकराव का गवाह बन सकता है।
Written By: Geeta Sharma