नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने गुरुवार को कहा कि LGBTQIA+ समुदाय भी समाज का अभिन्न हिस्सा है और उनके साथ सम्मानजनक व्यवहार करते हुए उनके लिए उपयुक्त कानूनी व्यवस्था बनाई जानी चाहिए। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि समलैंगिक विवाह (Same-Sex Marriage) पर कानून बनाने से पहले समाज को इसके लिए तैयार करना जरूरी है।

मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मोहन भागवत ने कहा कि भारतीय परंपरा में विवाह केवल दो व्यक्तियों के साथ रहने की व्यवस्था नहीं, बल्कि परिवार बनाने वाली एक सामाजिक संस्था है, जो समाज की मूल इकाई मानी जाती है।

उन्होंने कहा, "LGBTQ या जो भी हैं, वे हमारे समाज का ही हिस्सा हैं। भारतीय समाज में उन्हें स्वीकार करने और उनके लिए व्यवस्था बनाने की परंपरा रही है।"

विवाह व्यवस्था में बदलाव से पहले समाज को तैयार करना जरूरी

समलैंगिक विवाह पर संघ का दृष्टिकोण स्पष्ट करते हुए भागवत ने कहा कि विवाह संस्था का उद्देश्य परिवार का निर्माण और आने वाली पीढ़ियों का संस्कार करना है। यदि बिना पर्याप्त तैयारी के मौजूदा विवाह व्यवस्था में बदलाव किया गया तो इससे सामाजिक टकराव और अन्य दुष्प्रभाव पैदा हो सकते हैं।

उन्होंने कहा, "कानून समाज को नहीं चलाता, बल्कि समाज कानून को दिशा देता है। इसलिए पहले समाज को शिक्षित और तैयार करना होगा। अभी वह स्थिति नहीं आई है कि विवाह व्यवस्था में बदलाव किया जाए।"

समलैंगिकों के लिए अलग कानूनी ढांचा बनाने का सुझाव

मोहन भागवत ने कहा कि विवाह की मौजूदा व्यवस्था में बदलाव करने के बजाय समलैंगिक साथियों के साथ रहने के लिए अलग कानूनी व्यवस्था बनाई जा सकती है।

उन्होंने कहा, "समलैंगिक विवाह कहने के बजाय यह सोचना चाहिए कि ऐसे साथी सम्मानपूर्वक कैसे साथ रह सकें। इसके लिए अलग कानून बनाया जा सकता है और समाज भी उसे स्वीकार करेगा।"

महिलाएं राष्ट्र निर्माण में पुरुषों की बराबर भागीदार

महिलाओं की भूमिका पर बोलते हुए भागवत ने कहा कि महिलाएं समाज और राष्ट्र निर्माण में पुरुषों की बराबर और पूरक भागीदार हैं। उन्हें भी पुरुषों की तरह समान अवसर, प्रशिक्षण और नेतृत्व की जिम्मेदारियां मिलनी चाहिए।

उन्होंने कहा, "महिलाओं को हर वह प्रशिक्षण मिलना चाहिए जो पुरुषों को मिलता है। वे हर क्षेत्र में सक्षम हैं और उन्हें समान अवसर मिलने चाहिए।"

RSS और राष्ट्र सेविका समिति पर भी दी सफाई

RSS में महिलाओं की भागीदारी को लेकर पूछे गए सवाल पर भागवत ने कहा कि यह धारणा अधूरी जानकारी पर आधारित है। उन्होंने बताया कि संघ की स्थापना के समय सामाजिक परिस्थितियां अलग थीं, इसलिए महिलाओं के लिए राष्ट्र सेविका समिति का गठन किया गया था।

उन्होंने कहा कि राष्ट्र सेविका समिति एक स्वायत्त (Autonomous) संगठन है, जो RSS के समान उद्देश्य के लिए काम करता है। दोनों संगठन एक-दूसरे के कार्यों में हस्तक्षेप नहीं करते, बल्कि सहयोग करते हैं।

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भागवत ने यह भी बताया कि RSS की सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्था अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा में सार्वजनिक जीवन में सक्रिय महिलाओं को भी आमंत्रित किया जाता है और वे निर्णय प्रक्रिया में भाग लेती हैं।

Written By: Pradeep Singh