Monsoon Session: संसद के आगामी सत्र से पहले सरकार द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक उस समय विवादों में घिर गई। TMC के बागी सांसदों को भी बैठक में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया। इस फैसले का विपक्षी दलों ने कड़ा विरोध किया और इसे लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ बताया। विरोध के तौर पर कई विपक्षी नेताओं ने बैठक से प्रतीकात्मक वॉकआउट किया। हालांकि, बाद में प्रेस कॉन्फ्रेंस करने के बाद सभी नेता दोबारा बैठक में शामिल हो गए।
TMC ने उठाया बागी सांसदों को बुलाने का मुद्दा
बैठक के दौरान तृणमूल कांग्रेस ने सबसे पहले इस मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाया। पार्टी का कहना था कि जिन सांसदों ने पार्टी छोड़ दी है या जो आधिकारिक रूप से पार्टी का प्रतिनिधित्व नहीं करते, उन्हें सर्वदलीय बैठक में आमंत्रित करना उचित नहीं है। TMC नेताओं ने सवाल उठाया कि आधिकारिक सांसदों की बजाय पहले बागी सांसदों की सूची क्यों दिखाई गई और उन्हें बैठक का हिस्सा क्यों बनाया गया।
सांसद धर्मेंद्र यादव ने की मीडिया से बातचीत
समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव ने बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में कहा कि TMC ने इस मामले पर गंभीर आपत्ति दर्ज कराई। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार का यह कदम लोकतांत्रिक मूल्यों और संसदीय परंपराओं के अनुरूप नहीं है। उनके मुताबिक, सर्वदलीय बैठक में केवल मान्यता प्राप्त दलों के अधिकृत प्रतिनिधियों को ही बुलाया जाना चाहिए।
महुआ मोइत्रा ने सरकार पर साधा निशाना
तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने भी सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि जिन सांसदों ने पार्टी का साथ छोड़ दिया है, उन्हें सर्वदलीय बैठक में आमंत्रित करने का कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने इसे एक "गलत परंपरा" करार देते हुए कहा कि इससे संसदीय व्यवस्था और राजनीतिक दलों की वैधानिक पहचान पर सवाल खड़े होते हैं।
महुआ मोइत्रा ने कहा कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि किस आधार पर बागी सांसदों को बैठक में बुलाया गया, जबकि संबंधित राजनीतिक दल ने उन्हें अपना अधिकृत प्रतिनिधि नहीं माना है।
विपक्ष का प्रतीकात्मक वॉकआउट
विवाद बढ़ने के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रमोद तिवारी, समाजवादी पार्टी के धर्मेंद्र यादव, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) की सुप्रिया सुले और TMC की महुआ मोइत्रा सहित कई विपक्षी नेताओं ने बैठक से बाहर निकलकर विरोध दर्ज कराया। विपक्षी नेताओं ने इसे प्रतीकात्मक वॉकआउट बताया और कहा कि उनका उद्देश्य सरकार को लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के पालन का संदेश देना है।
विपक्ष का कहना था कि इस तरह के फैसले भविष्य में संसदीय परंपराओं को प्रभावित कर सकते हैं और सरकार को राजनीतिक दलों की आधिकारिक मान्यता का सम्मान करना चाहिए।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद फिर बैठक में लौटे नेता
बैठक से बाहर आने के बाद विपक्षी नेताओं ने संयुक्त रूप से प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान उन्होंने सरकार पर राजनीतिक पक्षपात का आरोप लगाया और TMC के बागी सांसदों को आमंत्रित किए जाने के फैसले की आलोचना की। नेताओं ने कहा कि उनकी आपत्ति केवल प्रक्रिया और संसदीय मर्यादा को लेकर है, न कि बैठक के एजेंडे को लेकर।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद सभी विपक्षी दलों के प्रतिनिधि दोबारा सर्वदलीय बैठक में शामिल हो गए। विपक्ष ने स्पष्ट किया कि संसद के सुचारु संचालन और जनहित के मुद्दों पर चर्चा में भाग लेना उनकी जिम्मेदारी है, लेकिन लोकतांत्रिक परंपराओं से जुड़े मामलों पर वे अपनी आवाज उठाते रहेंगे।
संसद सत्र से पहले बढ़ी राजनीतिक गर्माहट
संसद सत्र शुरू होने से पहले हुई इस घटना ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार संसदीय प्रक्रियाओं में निष्पक्षता नहीं बरत रही, जबकि सरकार की ओर से इस मुद्दे पर आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है। आने वाले संसद सत्र में इस विवाद के गूंजने की पूरी संभावना है, क्योंकि विपक्ष इसे लोकतांत्रिक मर्यादाओं और संसदीय परंपराओं से जुड़ा अहम मुद्दा मान रहा है।
Written By: Geeta Sharma