तमिलनाडु के करूर हादसे को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने डीएमके की याचिका खारिज कर दी है। डीएमके ने मांग की थी कि तमिलगा वेत्री कड़गम (टीवीके) के नेता और मुख्यमंत्री विजय को हादसे के पीड़ित परिवारों से मिलने से रोका जाए। हालांकि, अदालत ने कहा कि वह किसी मुख्यमंत्री की गतिविधियों को तय नहीं कर सकती।
अदालत को राजनीतिक विवाद का मंच नहीं बनाएं- सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान डीएमके के वकील से कहा कि अदालत को राजनीतिक विवाद का मंच नहीं बनाया जाना चाहिए। जजों ने कहा कि अगर सत्ताधारी दल के नेता किसी मुद्दे पर बयान दे रहे हैं, तो विपक्ष भी उसका जवाब बयान के जरिए दे सकता है। राजनीतिक लड़ाई कोर्ट के बाहर ही लड़ी जानी चाहिए।
डीएमके ने किया विरोध
मुख्यमंत्री विजय करूर हादसे में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों से मुलाकात करने वाले हैं। इस दौरान वह पीड़ित परिवारों को 10-10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता और सरकारी नौकरी देने की बात कर रहे हैं। डीएमके ने इसका विरोध करते हुए आरोप लगाया था कि इससे हादसे की जांच प्रभावित हो सकती है।
क्या है करूर हादसा
पिछले साल सितंबर में तमिलगा वेत्री कड़गम की करूर में आयोजित एक रैली के दौरान भगदड़ मच गई थी। इस घटना में 41 लोगों की मौत हो गई थी। हादसे की जांच पहले मद्रास हाई कोर्ट के निर्देश पर विशेष जांच दल को सौंपी गई थी, बाद में सुप्रीम कोर्ट ने जांच राज्य पुलिस से लेकर सीबीआई को सौंप दी। जांच की निगरानी के लिए अदालत की ओर से एक समिति भी बनाई गई है। वहीं, अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद मुख्यमंत्री विजय के पीड़ित परिवारों से मिलने का रास्ता साफ हो गया है।
Written By Toshi Shah