PM Modi in Somnath Temple: पीएम मोदी ने गुजरात के प्रसिद्ध सोमनाथ मंदिर में आयोजित 'सोमनाथ अमृत महोत्सव'में
भाग लेकर देशवासियों को सांस्कृतिक गौरव और राष्ट्रीय आत्मविश्वास का संदेश दिया। इस अवसर पर उन्होंने मंदिर में पूजा-अर्चना,कुंभाभिषेक और ध्वजारोहण किया। मंदिर परिसर में भव्य एयर शो का आयोजन भी हुआ,जिसने कार्यक्रम को और विशेष बना दिया। जनसभा को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि यह आयोजन केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं,बल्कि भारत की हजारों वर्षों पुरानी सभ्यता और संस्कृति के पुनर्जागरण का प्रतीक है।

प्रधानमंत्री ने 'विशेष महा पूजा'में लिया हिस्सा

भारतीय वायु सेना की 'सूर्य किरण' एक्रोबेटिक्स टीम ने 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक, सोमनाथ मंदिर में आयोजित 'सोमनाथ अमृत महोत्सव' के दौरान हवाई करतब दिखाए। इस दौरान पीएम मौजूद रहें। इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने सोमनाथ मंदिर में एक 'विशेष महा पूजा' में हिस्सा लिया।


सोमनाथ अमृत महोत्सव समारोहों में PM का सम्मान

जनसभा के दौरान प्रधानमंत्री का सम्मान किया गया। सोमनाथ अमृत महोत्सव समारोहों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'विशेष महापूजा' में भाग लिया। जिसके बाद'कुंभाभिषेक' और 'ध्वजारोहण' समारोह संपन्न हुए।

'पीएम मोदी ने किया भगवान शिव की महिमा का वर्णन'

पीएम मोदी ने भगवान शिव की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि महादेव समय से परे हैं और सृष्टि उन्हीं से उत्पन्न होकर उन्हीं में विलीन हो जाती है। उन्होंने कहा कि सोमनाथ का यह अमृत महोत्सव भगवान सदाशिव की कृपा और भारतीय संस्कृति की अमर शक्ति का उत्सव है। प्रधानमंत्री ने स्वयं को दादा सोमनाथ का भक्त बताते हुए कहा कि वे कई बार यहां आ चुके हैं,लेकिन इस बार का अनुभव अत्यंत विशेष रहा।

'सोमनाथ मंदिर का निर्माण सांस्कृतिक विरासत को स्थापित'

उन्होंने कहा कि ठीक 75 वर्ष पहले, 1951 में, सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण हुआ था। यह केवल मंदिर निर्माण नहीं था,बल्कि स्वतंत्र भारत की आत्मा के पुनर्जागरण का प्रतीक था। प्रधानमंत्री ने भारत के लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल को याद करते हुए कहा कि उन्होंने 500 से अधिक रियासतों को एकजुट कर आधुनिक भारत की नींव रखी और सोमनाथ के पुनर्निर्माण के माध्यम से दुनिया को यह संदेश दिया कि भारत अपनी सांस्कृतिक विरासत को स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

'क्रमण के बाद भी आस्था और शक्ति समाप्त नहीं हुई'

पीएम मोदी ने कहा कि सोमनाथ मंदिर पर इतिहास में कई बार आक्रमण हुए,लेकिन इसकी आस्था और शक्ति कभी समाप्त नहीं हुई। उन्होंने कहा कि आज का अमृत महोत्सव केवल अतीत को याद करने का अवसर नहीं,बल्कि आने वाले हजार वर्षों के लिए प्रेरणा का पर्व है।

पोखरण परमाणु परीक्षण का किया उल्लेख

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने 11 मई 1998 के पोखरण परमाणु परीक्षण का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इसी दिन भारत ने दुनिया को अपनी वैज्ञानिक क्षमता और राजनीतिक इच्छाशक्ति का परिचय दिया था। पोखरण-II का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि विश्व के दबाव के बावजूद भारत पीछे नहीं हटा

और तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में देश ने ‘राष्ट्र प्रथम’ की नीति को सर्वोपरि रखा। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की यही शक्ति, आत्मविश्वास और सांस्कृतिक चेतना आज नए भारत की पहचान बन चुकी है।

 Written By: Geeta Sharma