पश्चिम एशिया में लगातार बढ़ रहे तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े हालात को देखते हुए केंद्र सरकार पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गई है। इसी कड़ी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वरिष्ठ मंत्रियों और शीर्ष अधिकारियों के साथ एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक में देश की ऊर्जा सुरक्षा, उर्वरकों की उपलब्धता, भारतीय नाविकों की सुरक्षा, निर्यात पर संभावित प्रभाव और आर्थिक स्थिति जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।

प्रधानमंत्री ने बैठक में दिया अहम संदेश 

प्रधानमंत्री ने बैठक में स्पष्ट संदेश दिया कि वैश्विक परिस्थितियां चाहे जैसी भी हों, सरकार आम नागरिकों और किसानों के हितों की रक्षा के लिए हर आवश्यक कदम उठाएगी। उन्होंने सभी संबंधित मंत्रालयों को लगातार स्थिति पर नजर रखने और जरूरत पड़ने पर तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए।

भारतीय नाविकों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता

बैठक के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने दुनिया के विभिन्न हिस्सों में कार्यरत भारतीय नाविकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताया। उन्होंने कहा कि चाहे कोई भारतीय नाविक भारतीय जहाज पर तैनात हो या किसी विदेशी पोत पर,सरकार हर नागरिक की सुरक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। यदि किसी भी प्रकार की आपात स्थिति उत्पन्न होती है तो सरकार हर संभव सहायता उपलब्ध कराएगी और संबंधित एजेंसियां लगातार हालात की निगरानी करेंगी।

पेट्रोलियम मंत्रालय को ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने के निर्देश

होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति का एक प्रमुख मार्ग है। ऐसे में किसी भी तरह का व्यवधान भारत की ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित कर सकता है। इसे ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री ने पेट्रोलियम मंत्रालय की तैयारियों की समीक्षा की और ऊर्जा आपूर्ति को मजबूत बनाए रखने के निर्देश दिए।

उन्होंने देश में पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) के उपयोग को और बढ़ावा देने पर भी जोर दिया, ताकि ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाई जा सके और संभावित वैश्विक संकट का असर कम किया जा सके। साथ ही वैकल्पिक आपूर्ति व्यवस्था और रणनीतिक भंडार की स्थिति की भी समीक्षा की गई।

किसानों के लिए खाद की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर

बैठक में कृषि क्षेत्र की तैयारियों पर भी विशेष ध्यान दिया गया। प्रधानमंत्री ने जानकारी ली कि आगामी रबी सीजन के लिए पर्याप्त मात्रा में उर्वरकों का भंडार उपलब्ध है। इसके अलावा वर्ष 2027 की खरीफ फसल के लिए भी खाद का रिजर्व तैयार करने की प्रक्रिया जारी है।

उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसानों को किसी भी परिस्थिति में उर्वरकों की कमी का सामना न करना पड़े और समय पर पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। सरकार का लक्ष्य कृषि उत्पादन पर किसी भी वैश्विक संकट का नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ने देना है।

निर्यात और अर्थव्यवस्था पर भी सरकार की पैनी नजर

बैठक में होर्मुज संकट के भारत के निर्यात कारोबार और अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव का भी विस्तृत आकलन किया गया। अधिकारियों ने विभिन्न क्षेत्रों में संभावित चुनौतियों की जानकारी दी, जिस पर प्रधानमंत्री ने समय रहते आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए। निर्यातकों को राहत देने के संभावित उपायों पर भी विचार-विमर्श किया गया, ताकि वैश्विक व्यापार में किसी प्रकार की बाधा आने पर भारतीय उद्योगों और कारोबारियों को न्यूनतम नुकसान हो।

हालात पर लगातार नजर, हर चुनौती से निपटने की तैयारी

सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह पश्चिम एशिया की बदलती परिस्थितियों पर लगातार नजर बनाए हुए है। ऊर्जा, कृषि, व्यापार और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा से जुड़े हर पहलू की नियमित समीक्षा की जा रही है। केंद्र का कहना है कि किसी भी संभावित चुनौती से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए सभी संबंधित मंत्रालयों और एजेंसियों को पूरी तरह सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि देश के आर्थिक और रणनीतिक हित सुरक्षित रह सकें।

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Written By: Geeta Sharma