हाल ही में पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत में आर्थिक चुनौतियों को लेकर राजनीतिक बयानबाज़ी तेज हो गई है। इस मुद्दे पर केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से देशवासियों के लिए कुछ सुझाव और अपील सामने आए हैं। वहीं विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सरकार की नीतियों और नेतृत्व पर तीखा हमला बोला है।
पश्चिम एशिया जंग का असर दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा
केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) के वार्षिक सम्मेलन में कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियां अत्यंत अनिश्चित हैं। उन्होंने पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के जल्द समाप्त होने की संभावना को कम बताते हुए कहा कि इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। वैष्णव ने नागरिकों से अपील की कि वे अपने दैनिक जीवन और व्यवसायिक गतिविधियों में ऐसे कदम उठाएं जिससे विदेशी मुद्रा की बचत हो सके और देश के आर्थिक संसाधनों पर दबाव कम हो।
प्रधानमंत्री की ओर से दिया गया सुझाव
इसपर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से भी कुछ सुझावों का उल्लेख किया गया। जिनमें पेट्रोल-डीजल का समझदारी से उपयोग,मेट्रो और कार पूलिंग को बढ़ावा देना, इलेक्ट्रिक वाहनों का उपयोग,रेलवे को पार्सल भेजने के लिए प्राथमिकता देना और जहां संभव हो वहां वर्क फ्रॉम होम अपनाना शामिल है। सरकार का कहना है कि इन कदमों से ऊर्जा खपत और विदेशी मुद्रा पर निर्भरता कम की जा सकती है।
राहुल गांधी सरकार पर कसा तंज
हालांकि,विपक्षी दल कांग्रेस के नेता राहुल गांधी ने इन अपीलों की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि जनता से लगातार त्याग और सीमित उपभोग की अपील करना सरकार की नाकामी को दर्शाता है। राहुल गांधी के अनुसार,बार-बार लोगों पर जिम्मेदारी डालने से यह स्पष्ट होता है कि सरकार अपनी आर्थिक चुनौतियों का प्रभावी समाधान देने में असमर्थ है। उन्होंने यह भी कहा कि देश को इस स्थिति में पहुंचाना चिंता का विषय है,जहां नागरिकों को यह बताया जा रहा है कि उन्हें क्या खरीदना चाहिए और क्या नहीं।
विपक्ष बता रही शासन की विफलता
इस पूरे घटनाक्रम ने आर्थिक नीति,वैश्विक संकट के प्रभाव और राजनीतिक जवाबदेही को लेकर एक नई बहस को जन्म दिया है। सरकार इसे वैश्विक परिस्थितियों से उपजी आवश्यकता बता रही है,जबकि विपक्ष इसे शासन की विफलता के रूप में देख रहा है।
Written By: Geeta Sharma