मुंबई। शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने प्रधानमंत्री पर अपने गुट से अलग होकर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हुए सांसदों से मुलाकात करने को लेकर सवाल उठाए।
शिवसेना में विभाजन, राजनीतिक और कानूनी लड़ाई
ठाकरे की यह टिप्पणी शिवसेना में 2022 में हुए विभाजन को लेकर चल रही लंबी राजनीतिक और कानूनी लड़ाई के बीच आई है। पार्टी के विभाजन, विधायकों-सांसदों की अयोग्यता और नेतृत्व से जुड़े विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में ठाकरे ने कहा, “हमारा मामला चार साल से सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। अब ऐसा लगता है कि सुनवाई अंतिम चरण में पहुंच रही है और लगातार चल रही है... PM मोदी के पास जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे Gen Z प्रदर्शनकारियों से मिलने का समय नहीं है, लेकिन वह गद्दारों से मिले।”
ठाकरे ने शिंदे गुट में शामिल हुए नेताओं को कथित तौर पर दिए गए आश्वासन पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि इन नेताओं को संदेश दिया जा रहा है-“डरो मत, मैं तुम्हारे साथ हूं।”
उन्होंने सवाल किया कि यह संदेश अमित शाह, देवेंद्र फडणवीस, प्रशासन या उन सभी लोगों के लिए था जो पार्टी में भविष्य में दल-बदल करना चाहते हैं?
उद्धव ठाकरे ने कहा न्यायपालिका पर भरोसा
जब उनसे पूछा गया कि क्या प्रधानमंत्री की यह मुलाकात सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामले को प्रभावित कर सकती है, ठाकरे ने कहा कि उन्हें न्यायपालिका और भारत के मुख्य न्यायाधीश पर भरोसा है, लेकिन मुलाकात की मंशा को लेकर संदेह है।
उन्होंने कहा, “इसका असर नहीं पड़ना चाहिए। हमें न्यायपालिका और CJI पर इतना विश्वास है। लेकिन हमें संदेह है कि क्या यह सुप्रीम कोर्ट पर दबाव बनाने की कोशिश है-यह दिखाकर कि प्रधानमंत्री उनके साथ हैं जिन्हें हम गद्दार मानते हैं।”
ठाकरे के मुताबिक, प्रधानमंत्री की ओर से दल-बदल करने वाले नेताओं का सार्वजनिक समर्थन राजनीतिक रूप से गलत संदेश देता है। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे राजनीतिक दलों में दल-बदल को प्रोत्साहन मिल सकता है और भविष्य में भी अवसरवादी राजनीतिक विभाजन को बढ़ावा मिल सकता है।
शिवसेना के “असली” गुट को लेकर विवाद
2022 में शिवसेना दो गुटों में विभाजित हो गई थी। एक गुट का नेतृत्व उद्धव ठाकरे और दूसरे का एकनाथ शिंदे ने किया।
विभाजन के बाद शिंदे गुट ने भारत निर्वाचन आयोग के समक्ष खुद को असली शिवसेना बताते हुए पार्टी के नाम और उसके पारंपरिक धनुष-बाण चुनाव चिह्न पर दावा किया।
इस विवाद से जुड़े कानूनी मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में चल रही है। गुरुवार को भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने राजनीतिक दलों के भीतर लोकतांत्रिक व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए।
पीठ ने कहा कि शिवसेना के संविधान में समय के साथ महत्वपूर्ण बदलाव हुए और पार्टी अपने मूल लोकतांत्रिक ढांचे से हटकर “लगभग एक व्यक्ति पर केंद्रित संरचना” में बदल गई थी। मामले में दलीलें 11 अगस्त को भी जारी रहेंगी।
PM मोदी ने NDA सांसदों के साथ किया नाश्ता
शुक्रवार सुबह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली स्थित अपने आधिकारिक आवास पर हाल ही में NDA के साथ जुड़े सांसदों के साथ नाश्ता किया।
इस बैठक में शिवसेना (UBT) के वे पूर्व सांसद भी शामिल हुए, जो हाल में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हुए हैं। इसके अलावा कुछ ऐसे बागी सांसद भी बैठक में मौजूद थे, जो नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में चले गए हैं।
उद्धव ठाकरे ने इसी मुलाकात को लेकर प्रधानमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि एक ओर दिल्ली में Gen Z प्रदर्शनकारी अपनी समस्याएं उठा रहे हैं, वहीं प्रधानमंत्री ने उनके बजाय दल-बदल करने वाले सांसदों से मुलाकात की।
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ठाकरे ने प्रधानमंत्री की इस राजनीतिक पहुंच को शिवसेना के “असली” गुट को लेकर चल रहे विवाद और आगामी सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण बताया।
Written By: Pradeep Singh