CJP Latest News: भारत के खिलाफ एक बार फिर पाकिस्तान का साजिश बेनकाब हुई है। सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर युवाओं को CJP के नाम पर जोड़ने की मुहिम चला रहे हैं। एजेंसियों का दावा है कि इस अभियान का उद्देश्य युवाओं को पहले आकर्षक ऑफर देकर जोड़ना और बाद में उन्हें भ्रामक नैरेटिव तथा भारत विरोधी गतिविधियों की ओर प्रभावित करना है।

50 हजार रुपये प्रति माह का लालच देकर युवाओं को जोड़ने की कोशिश

सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तान से संचालित एक संदिग्ध डोमेन के जरिए युवाओं को CJP से जुड़ने का निमंत्रण दिया जा रहा है। इस प्लेटफॉर्म पर हर महीने 50 हजार रुपये तक कमाई का दावा किया जा रहा है, ताकि बेरोजगार और सोशल मीडिया पर सक्रिय युवाओं को आकर्षित किया जा सके। एजेंसियों का मानना है कि आर्थिक लालच इस अभियान का प्रमुख हथियार बनाया गया है।

यह भी पढ़ें: अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट के नए सचिव बने जगदीश आफले, 2 सितंबर को होगी औपचारिक नियुक्ति

खुफिया एजेंसियों ने ऐसे डोमेन और उससे जुड़े डिजिटल नेटवर्क की पहचान की है, जिनके पाकिस्तान से संचालित होने की आशंका जताई जा रही है। इन प्लेटफॉर्म्स की गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।

सोशल मीडिया पर चलाया जा रहा विशेष अभियान

जांच में सामने आया है कि सोशल मीडिया पोस्ट और विज्ञापनों में 'Voice of the lazy & unemployed' और 'Join the movement' जैसे नारों का इस्तेमाल किया जा रहा है। इन पोस्ट्स में QR कोड भी दिया गया है, जिसके माध्यम से लोगों से सदस्यता लेने की अपील की जा रही है।

सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि ऐसे अभियान युवाओं में असंतोष और भ्रम पैदा करने के उद्देश्य से तैयार किए जाते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, QR कोड और सोशल मीडिया लिंक के जरिए लोगों की व्यक्तिगत जानकारी जुटाने या उन्हें बंद ऑनलाइन समूहों में जोड़ने का भी प्रयास किया जा सकता है।

पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले

यह पहला अवसर नहीं है जब CJP से जुड़े कथित ऑनलाइन नेटवर्क जांच एजेंसियों के रडार पर आए हों। इससे पहले हिंसा से जुड़े मामलों के दौरान सोशल मीडिया पर फर्जी नैरेटिव और भ्रामक सामग्री प्रसारित किए जाने के आरोप सामने आए थे। उस समय दिल्ली पुलिस की साइबर यूनिट ने कार्रवाई करते हुए 480 सोशल मीडिया पोस्ट ब्लॉक किए थे, जिनके बारे में अधिकारियों का दावा था कि वे पाकिस्तान से संचालित नेटवर्क से जुड़े थे।

एजेंसियों ने बढ़ाई निगरानी

खुफिया और साइबर सुरक्षा एजेंसियां अब इस पूरे नेटवर्क की गहन जांच में जुटी हैं। संदिग्ध डोमेन, सोशल मीडिया अकाउंट्स और डिजिटल लेनदेन की कड़ियों की पड़ताल की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि यदि किसी विदेशी नेटवर्क की संलिप्तता के ठोस प्रमाण मिलते हैं, तो उसके खिलाफ कानूनी और तकनीकी स्तर पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

सतर्क रहने की अपील

सुरक्षा विशेषज्ञों ने युवाओं से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर मिलने वाले आकर्षक नौकरी के प्रस्तावों, आसान कमाई के दावों और अज्ञात QR कोड या लिंक पर बिना सत्यापन के भरोसा न करें। किसी भी संदिग्ध ऑनलाइन अभियान, वेबसाइट या सोशल मीडिया पोस्ट की जानकारी संबंधित साइबर अपराध पोर्टल या स्थानीय पुलिस को देना राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण हो सकता है।

 Written By: Geeta Sharma