केरल का सबसे लोकप्रिय और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध पर्व ओणम हर साल मलयालम कैलेंडर के चिंगम महीने में मनाया जाता है। यह केवल नई फसल की खुशी का उत्सव नहीं, बल्कि सामाजिक एकता, समृद्धि और राजा महाबली की स्मृति से जुड़ा महत्वपूर्ण पर्व भी है। ओणम का उत्सव कई दिनों तक चलता है और इस दौरान केरल की पारंपरिक कला, खान-पान और लोक संस्कृति का शानदार रंग देखने को मिलता है।
ओणम 2026 में तिरुवोनम कब है?
ओणम की शुरुआत अथम नक्षत्र से होती है और दसवें दिन तिरुवोनम मनाया जाता है। 2026 में तिरुवोनम 26 अगस्त बुधवार को मनाया जाएंगा।
ओणम से जुड़े प्रमुख दिन इस प्रकार हैं:
- अथम: 16 अगस्त 2026, रविवार
- उथरादम यानी पहला ओणम:25 अगस्त 2026, मंगलवार
- तिरुवोनम: 26 अगस्त 2026, बुधवार
- तीसरा ओणम:27 अगस्त 2026
- चौथा ओणम:28 अगस्त 2026
केरल में इन दिनों के आसपास ओणम से जुड़ी छुट्टियों और सार्वजनिक आयोजनों का माहौल रहता है।
महाबली और भगवान विष्णु से जुड़ी है ओणम की कथा
ओणम की सबसे प्रसिद्ध धार्मिक कथा राजा महाबली और भगवान विष्णु के वामन अवतार से संबंधित है। मान्यता है कि महाबली बेहद न्यायप्रिय, उदार और प्रजाहितैषी राजा थे। उनके शासन में राज्य खुशहाल था और प्रजा उन्हें बहुत सम्मान देती थी। महाबली के बढ़ते प्रभाव को देखकर देवताओं के आग्रह पर भगवान विष्णु ने वामन अवतार लिया और राजा से केवल तीन पग भूमि दान में मांगी। महाबली ने उनकी मांग स्वीकार कर ली। इसके बाद वामन ने विराट रूप धारण किया और दो कदमों में धरती तथा आकाश को नाप लिया। तीसरे कदम के लिए स्थान न बचने पर महाबली ने अपना सिर प्रस्तुत कर दिया। पौराणिक मान्यता के अनुसार, भगवान विष्णु ने उन्हें पाताल लोक भेज दिया, लेकिन उनकी भक्ति, त्याग और प्रजा के प्रति प्रेम से प्रसन्न होकर हर वर्ष अपनी प्रजा से मिलने का अवसर दिया। यही वजह है कि ओणम के दौरान माना जाता है कि राजा महाबली अपनी प्रजा का हाल जानने के लिए धरती पर लौटते हैं।
तिरुवोनम और वामन अवतार का महत्व
ओणम का मुख्य दिन तिरुवोनम धार्मिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु के वामन स्वरूप की पूजा की जाती है। कुछ परंपराओं में ओनाथप्पन की स्थापना भी की जाती है, जिसे महाबली और वामन से जुड़ा प्रतीक माना जाता है। हालांकि ओणम की धार्मिक मान्यताओं के साथ-साथ इसका सामाजिक पक्ष भी बेहद मजबूत है। यह पर्व लोगों को साथ आने, खुशियां बांटने और भेदभाव से ऊपर उठकर उत्सव मनाने का संदेश देता है।
दस दिनों तक चलती हैं खास परंपराएं
ओणम के दस दिनों में केरल के घरों और सार्वजनिक स्थलों पर कई तरह के आयोजन होते हैं।
पुक्कलम
ओणम के आगमन के साथ घरों के आंगन में फूलों से आकर्षक डिजाइन बनाए जाते हैं, जिन्हें पुक्कलम कहा जाता है। शुरुआती दिनों में इसका आकार छोटा होता है और हर दिन इसमें नए फूल जोड़कर इसे और भव्य बनाया जाता है।
ओणम सध्या
ओणम के उत्सव का सबसे स्वादिष्ट हिस्सा ओणम सध्याहै। केले के पत्ते पर परोसे जाने वाले इस पारंपरिक शाकाहारी भोज में चावल के साथ सांभर, अवियल, थोरन, विभिन्न प्रकार की सब्जियां, अचार, पापड़ और पायसम जैसे अनेक व्यंजन शामिल होते हैं। परिवार और रिश्तेदार साथ बैठकर इस भोजन का आनंद लेते हैं।
वल्लम कली
केरल की प्रसिद्ध स्नेक बोट रेस, जिसे वल्लम कली कहा जाता है, ओणम उत्सव की पहचान बन चुकी है। लंबी पारंपरिक नौकाओं में सवार दल तालमेल के साथ नाव चलाते हैं और नदी में रोमांचक प्रतियोगिता देखने को मिलती है।
पुलिकली
त्रिशूर की पुलिकली भी ओणम का खास आकर्षण है। इसमें कलाकार अपने शरीर को बाघ के रंग-रूप में सजाकर पारंपरिक अंदाज में नृत्य और प्रदर्शन करते हैं। इसकी जीवंत प्रस्तुति उत्सव के माहौल को और रंगीन बना देती है।