अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नोबेल शांति पुरस्कार न मिलने पर अपनी नाराज़गी जताई। उन्होंने कहा कि अगर उन्हें यह पुरस्कार नहीं मिलता, तो “किसी को भी नहीं मिलना चाहिए।” यह बयान मियामी, फ्लोरिडा में आयोजित एक सम्मेलन के दौरान आया और सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया।
ट्रंप का संबोधन
ट्रंप ने अपने संबोधन में यह दावा किया कि उन्होंने दुनिया में शांति स्थापित करने के कई प्रयास किए हैं। उन्होंने कहा कि कई संघर्षों को उन्होंने टाला और चाहते थे कि उनका नाम इतिहास में शांति निर्माता नेता के रूप में दर्ज हो। विशेषज्ञों ने इस बयान को आत्म‑प्रशंसा और विवादास्पद करार दिया।
ट्रंप ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ को कहा स्ट्रेट ऑफ ट्रंप
बयान देते समय ट्रंप ने गलती से “स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़” को “Strait of Trump” कह दिया। उन्होंने इसे तुरंत मजाक में सुधार लिया। यह जलमार्ग वैश्विक तेल बाजार और मध्य पूर्व की सुरक्षा के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। ट्रंप की इस slip-up पर सोशल मीडिया पर भी मज़ेदार प्रतिक्रियाएँ आईं।
ईरान तनाव के बीच ट्रंप का बयान
ट्रंप का बयान ऐसे समय आया है जब मध्य पूर्व में ईरान और अन्य देशों के साथ तनाव बढ़ा हुआ है। उन्होंने हाल ही में ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर संभावित हमलों को टालने का निर्णय लिया। क्षेत्रीय संघर्ष और जवाबी हमले जारी हैं, जिससे स्थिति अभी भी संवेदनशील बनी हुई है।
ट्रंप के बयान को बताया विवादास्पद
विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रंप का बयान थोड़ा आत्म‑प्रशंसात्मक और विवादास्पद है। नोबेल शांति पुरस्कार का निर्णय नोर्वेजियन नोबेल समिति करती है और इसे कोई वापस नहीं ले सकता। इस विवाद से पता चलता है कि वैश्विक राजनीति और प्रतिष्ठा पर ऐसे पुरस्कारों का कितना असर होता है।
Written by: Anushka sagar