Anti Paper Leak Bill 2026 देश में प्रतियोगी और सरकारी परीक्षाओं में होने वाली गड़बड़ियों पर लगाम लगाने के लिए पेपर लीक रोधी कानून में बड़ा बदलाव किया गया है। लोक परीक्षा संशोधन विधेयक, 2026 को राष्ट्रपति की मंजूरी मिल गई है। इसके साथ ही अब पेपर लीक और परीक्षा में धांधली करने वालों के खिलाफ कार्रवाई का कानूनी ढांचा पहले से ज्यादा सख्त हो गया है।

नए संशोधन के तहत पेपर लीक मामलों में तेजी से सुनवाई की व्यवस्था की जाएगी। सरकार का उद्देश्य है कि ऐसे मामलों में लंबी कानूनी प्रक्रिया के बजाय जल्द फैसला हो और दोषियों को कड़ी सजा मिले।

तीन महीने के अंदर पूरा होगा ट्रायल

नए प्रावधानों के अनुसार पेपर लीक से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए राज्यों में फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाए जाएंगे। इन अदालतों में रोजाना सुनवाई की जाएगी और कोशिश होगी कि मुकदमे की प्रक्रिया 90 दिनों यानी करीब तीन महीने के भीतर पूरी कर ली जाए। इस कदम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पेपर लीक जैसे मामलों में दोषियों को जल्द सजा मिले और परीक्षा प्रणाली पर लोगों का भरोसा बना रहे।

सजा और जुर्माने में बड़ा इजाफा

पहले लागू कानून में पेपर लीक के दोषियों के लिए 3 से 5 साल तक की सजा का प्रावधान था। संशोधन के बाद सजा की अवधि बढ़ाकर 5 से 10 साल तक कर दी गई है।

यह भी पढ़ें: Punjab Paper Leak Protest: छात्रों का बड़ा आंदोलन, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग!

इसके अलावा आर्थिक दंड को भी कई गुना बढ़ाया गया है। पहले पेपर लीक के मामलों में अधिकतम 10 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जाता था, जिसे अब बढ़ाकर 10 करोड़ रुपये तक कर दिया गया है। सरकार का मानना है कि भारी जुर्माने से पेपर लीक के संगठित नेटवर्क पर प्रभावी रोक लगाई जा सकेगी।

जांच के लिए बनेगी विशेष टास्क फोर्स

संशोधित कानून में जांच प्रक्रिया को भी मजबूत किया गया है। पहले पेपर लीक से जुड़े मामलों की जांच केंद्रीय जांच एजेंसियों के माध्यम से की जाती थी, लेकिन अब ऐसे मामलों के लिए विशेष टास्क फोर्स (STF) गठित की जाएगी।

इस एसटीएफ का काम पेपर लीक के पीछे सक्रिय पूरे नेटवर्क की पहचान करना और इसमें शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई करना होगा।

दो महीने में पूरी करनी होगी जांच

नए कानून में जांच की समय सीमा भी तय की गई है। पहले पेपर लीक मामलों की जांच पूरी करने के लिए कोई निश्चित समय सीमा नहीं थी। अब संशोधन के बाद जांच एजेंसियों को दो महीने के भीतर जांच पूरी करने का लक्ष्य दिया गया है। इससे मामलों में देरी कम होगी और दोषियों तक जल्दी पहुंचने में मदद मिलेगी।

परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाने की कोशिश

केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने कहा है कि यह संशोधन परीक्षा प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, विश्वसनीय और निष्पक्ष बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। सरकार का कहना है कि पेपर लीक केवल छात्रों के भविष्य को प्रभावित नहीं करता, बल्कि पूरी परीक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करता है।

नए कानून के जरिए सरकार पेपर लीक करने वाले माफियाओं, संगठित गिरोहों और परीक्षा प्रक्रिया में शामिल भ्रष्ट तत्वों पर सख्त कार्रवाई करना चाहती है। माना जा रहा है कि कड़े दंड, तेज जांच और त्वरित न्याय व्यवस्था से देश में होने वाली परीक्षाओं की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होगी।

Written By: Geeta Sharma