Bihar Politics: बिहार की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत होती दिखाई दे रही है। पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपने बेटे निशांत कुमार जल्द ही विधान परिषद के जरिए राजनीति में औपचारिक एंट्री कर सकते हैं। सूत्रों के अनुसार, जून में खाली हो रही बिहार विधान परिषद की सीटों पर उन्हें उम्मीदवार बनाया जा सकता है। हाल ही में हुए बिहार कैबिनेट विस्तार में निशांत कुमार को मंत्री पद की जिम्मेदारी दी गई है, लेकिन वे फिलहाल विधानसभा या विधान परिषद किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं। ऐसे में संवैधानिक प्रावधानों के तहत उन्हें 6 महीने के भीतर किसी सदन का सदस्य बनना आवश्यक है। इसी कारण आगामी MLC चुनाव केलिए बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

निशांत कुमार और दीपक प्रकाश नाम चर्चे में

निशांत कुमार के साथ-साथ राष्ट्रीय लोक मोर्चा के नेता उपेन्द्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश की भी विधान परिषद के जरिए राजनीति में औपचारिक एंट्री की चर्चा तेज है। दीपक प्रकाश को भी हालिया मंत्रिमंडल विस्तार में शामिल किया गया है, लेकिन वे भी अभी किसी सदन के सदस्य नहीं हैं। राजनीतिक सूत्रों का मानना है कि दोनों नेताओं को MLC चुनाव लड़वाने की तैयारी लगभग तय मानी जा रही है। हालांकि अभी तक JDU या NDA की ओर से किसी नाम की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।

मई के अंत तक हो सकते है विधान परिषद चुनाव

जानकारी के अनुसार जून महीने में बिहार विधान परिषद की कुल 10 सीटें खाली हो रही हैं। इनमें से नौ सदस्यों का कार्यकाल 28 जून को समाप्त होगा, जबकि एक सीट पहले से खाली है। यह सीट उस समय रिक्त हुई थी जब नीतीश कुमार राज्यसभा पहुंचे थे। ऐसे में चुनाव आयोग मई के अंत तक विधान परिषद चुनाव की घोषणा कर सकता है।

निशांत की राजनीति में एंट्री JDU की रणनीति का हिस्सा

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि निशांत कुमार की राजनीति में एंट्री जदयू के भविष्य की रणनीति का हिस्सा हो सकती है। लंबे समय से यह चर्चा होती रही है कि नीतीश कुमार के बाद पार्टी का नेतृत्व कौन संभालेगा। मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद पार्टी नेताओं ने निशांत कुमार को उपमुख्यमंत्री बनाने का प्रस्ताव भी दिया था, लेकिन उन्होंने उसे स्वीकार नहीं किया। हालांकि बाद में पार्टी के आग्रह पर उन्होंने मंत्री पद की जिम्मेदारी संभाल ली।

जदयू को मजबूत करने के लिए नई पीढ़ी को मौका

बताया जा रहा है कि भाजपा नेता Samrat Choudhary के नेतृत्व में बनी नई राजनीतिक परिस्थितियों में जदयू अपने संगठन को मजबूत बनाए रखने के लिए नई पीढ़ी को आगे लाने की रणनीति पर काम कर रही है। ऐसे में निशांत कुमार की सक्रिय भूमिका आने वाले समय में बिहार की राजनीति को नया दिशा दे सकती है।

Written By: Geeta Sharma