Patna AISA Protest March: दिल्ली में संसद भवन मार्च के बाद अब बिहार की राजधानी पटना में भी छात्रों का विरोध प्रदर्शन तेज हो गया। बुधवार, 22 जुलाई को ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) के बैनर तले बड़ी संख्या में छात्रों ने राजभवन (लोकभवन) मार्च निकाला। प्रदर्शनकारी नीट पेपर लीक मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे थे। छात्रों का कहना है कि परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठे हैं और सरकार को इसकी जिम्मेदारी तय करनी चाहिए।

गांधी मैदान के पास पुलिस से झड़प, आंसू गैस और वॉटर कैनन का इस्तेमाल

राजभवन की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को गांधी मैदान स्थित होटल मौर्या के पास पुलिस ने रोकने का प्रयास किया। इस दौरान छात्रों और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक हुई, जो बाद में झड़प में बदल गई। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने पहले बैरिकेडिंग की और फिर आंसू गैस के गोले छोड़े। इसके साथ ही प्रदर्शनकारियों को पीछे हटाने के लिए वॉटर कैनन का भी इस्तेमाल किया गया। हालांकि, पुलिस की कार्रवाई के बावजूद कई छात्र सड़क पर डटे रहे और नारेबाजी जारी रखी। प्रदर्शन स्थल पर कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

दिल्ली के आंदोलन के समर्थन में उतरे छात्र

आइसा ने स्पष्ट किया कि पटना का यह प्रदर्शन दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन के समर्थन में आयोजित किया गया। संगठन का आरोप है कि नीट पेपर लीक प्रकरण ने लाखों छात्रों के भविष्य को प्रभावित किया है और अब जवाबदेही तय किए बिना मामला शांत नहीं होगा। प्रदर्शनकारियों ने शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की भी मांग उठाई।

मीडिया कर्मियों के साथ धक्का-मुक्की

प्रदर्शन के दौरान कुछ छात्रों का गुस्सा मीडिया पर भी देखने को मिला। कई समाचार चैनलों के पत्रकारों के साथ कथित तौर पर धक्का-मुक्की और बदसलूकी की गई। एबीपी न्यूज़ के संवाददाता आर्यन आनंद के सिर में चोट लगने की सूचना है, जबकि एबीपी डिजिटल के रिपोर्टर परमानंद को भी हल्की चोटें आईं। अन्य मीडिया संस्थानों के पत्रकारों के साथ भी ऐसी घटनाएं सामने आईं।

आंदोलन का संदेश और आगे की चुनौती

पटना में हुआ यह प्रदर्शन इस बात का संकेत है कि नीट पेपर लीक को लेकर छात्रों का आक्रोश अभी कम नहीं हुआ है। प्रदर्शनकारी केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार की मांग पर अड़े हुए हैं। वहीं प्रशासन के सामने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ छात्रों की नाराजगी को शांत करने की चुनौती भी बनी हुई है। आने वाले दिनों में यदि संवाद और समाधान की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है।

 

Written By: Geeta Sharma