पश्चिम बंगाल की राजनीति इन दिनों चर्चा में बनी हुई है। लेकिन इस बार ममता बनर्जी के बयानों के वजह से नहीं,बल्कि उनकी पार्टी में चल रही अदुंरूनी कलह के वजह से। दरअसल, विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद टीएमसी के अंदर आपसी फूट की अटकलें काफी तेज से फैल रही है। जानकारी के अनुसार 2 जून, मंगलवार को टीएमसी के करीब 60 विधायक विधानसभा पहुंचे हैं।

अलग शक्ति केंद्र बनाने की कोशिश

सूत्रों के अनुसार,तृणमूल के करीब 60 विधायक पार्टी के भीतर एक अलग शक्ति केंद्र बनाने में जुटे हुए हैं। इस पूरे घटनाक्रम के केंद्र में टीएमसी से निष्कासित विधायक ऋतब्रत बंद्योपाध्याय बताए जा रहे हैं।

तृणमूल कांग्रेस में आपसी मतभेद हुआ उजागर

पश्चिम बंगाल की राजनीति में टीएमसी लंबे समय से अपनी संगठनात्मक मजबूती के लिए जानी जाती रही है। हालांकि हाल के घटनाक्रमों ने पार्टी के भीतर आपसी मतभेदों को उजागर कर दिया है।

कैसे शुरू हुआ विवाद

विवाद की शुरुआत तब हुई जब तृणमूल कांग्रेस के विधायक ऋतब्रत बंद्योपाध्याय और संदीपन साहा ने विपक्ष के नेता के समर्थन से जुड़े एक प्रस्ताव पर कुछ विधायकों के हस्ताक्षर जाली होने का आरोप लगाया। इस शिकायत को गंभीरता से लेते हुए विधानसभा सचिवालय ने मामला दर्ज कराया और इसकी जांच राज्य की सीआईडी को सौंप दी गई। जांच के दौरान यह मुद्दा केवल प्रशासनिक या कानूनी दायरे तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पार्टी के अंदरूनी शक्ति-संतुलन और नेतृत्व के प्रति निष्ठा पर भी सवाल उठाने लगा।

ममता ने ऋतब्रत और संदीपन की भूमिका पर उठाए थे सवाल

स्थिति तब और गंभीर हो गई जब पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी ने दोनों विधायकों की भूमिका पर सार्वजनिक रूप से सवाल उठाए। इसके कुछ ही समय बाद तृणमूल कांग्रेस ने ऋतब्रत बंद्योपाध्याय और संदीपन साहा को पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में निष्कासित कर दिया। इस घटनाक्रम ने स्पष्ट कर दिया कि चुनाव के बाद पार्टी के भीतर गुटबाजी और असंतोष तेजी से बढ़ रहा है।

पार्टी के भीतर एक अलग गुट बनाने की तैयारी

सूत्रों के अनुसार कोलकाता में हुई बैठक में टीएमसी के कई विधायक शामिल हुए थे। अब यह अटकलें लगाई जा रही हैं कि बैठक में मौजूद कुछ विधायक पार्टी के भीतर एक अलग गुट बनाने का विचार कर रहे हैं। और यह समूह स्वयं को 'वास्तविक तृणमूल' के रूप में स्थापित करने की रणनीति तैयार कर रहा है। आशंका जताई जा रही है कि विधानसभा अध्यक्ष को एक औपचारिक प्रस्ताव सौंप सकता है।

संभावित गुट का नेतृत्व ऋतब्रत बनर्जी के हाथों में होगा

सूत्रों के अनुसार,इस संभावित गुट का नेतृत्व या सार्वजनिक चेहरा ऋतब्रत बनर्जी को बनाया जा सकता है। हालांकि,इन दावों की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। यदि ऐसी कोई पहल आगे बढ़ती है, तो इसका असर न केवल तृणमूल कांग्रेस के संगठनात्मक ढांचे पर पड़ेगा, बल्कि राज्य की राजनीतिक समीकरणों पर भी प्रभाव देखने को मिल सकता है। फिलहाल सभी की निगाहें पार्टी नेतृत्व और संबंधित विधायकों की आगामी गतिविधियों पर टिकी हुई हैं।

 

Written By: Geeta Sharma