पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले सियासत पूरी तरह गर्मा गई है। आज बुधवार को तृणमूल कांग्रेस (TMC) का एक बड़ा प्रतिनिधिमंडल दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से मुलाकात करने जा रहा है। डेरेक ओ ब्रायन, साकेत गोखले, मेनका गुरुस्वामी और सागरिका घोष की यह टीम चुनाव आयोग से सीधे तीखे सवाल पूछेगी। मामला वोटर लिस्ट से लाखों लोगों के नाम हटाए जाने का है।

वोटर लिस्ट (SIR) पर क्या है पूरा विवाद?
TMC का आरोप है कि राज्य में मतदाता सूची के पुनरीक्षण (SIR) के नाम पर बड़ी धांधली हो रही है। पार्टी का दावा है कि पश्चिम बंगाल में लगभग 91 लाख वोटरों के नाम लिस्ट से काट दिए गए हैं। सागरिका घोष ने तो यहाँ तक कह दिया कि आयोग 'डराने' वाला काम कर रहा है और 27 लाख लोगों के नाम गलत तरीके से हटाए गए हैं, जिनमें से सिर्फ दो लोग ही कानूनी लड़ाई लड़कर अपना नाम वापस जुड़वा पाए।

आयोग पर पक्षपात का गंभीर आरोप
डेरेक ओ ब्रायन ने चुनाव आयोग को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि हम सिर्फ अपनी पार्टी के लिए नहीं, बल्कि उन लाखों लोगों के लिए लड़ रहे हैं जिनका वोट देने का हक छीना जा रहा है। TMC नेताओं का सीधा आरोप है कि चुनाव आयोग के निर्देश पर तैनात पुलिस और अधिकारी बीजेपी (BJP) के करीब हैं और उनके इशारों पर काम कर रहे हैं।

क्यों डरी हुई है TMC?
अक्टूबर 2025 के डेटा के मुताबिक, बंगाल में कुल 7.66 करोड़ वोटर थे। अब जिस तरह से लगभग 11.85% वोटरों के नाम काटे गए हैं, उसे TMC एक 'गंभीर अपराध' बता रही है। चुनाव से ठीक पहले इतने बड़े पैमाने पर वोटरों का कम होना हार-जीत के समीकरण को पूरी तरह बदल सकता है।

Written by: Anushka sagar