बिहार की राजनीति में बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव लगातार चर्चा का केंद्र बना हुआ है। इस बीच जनसुराज पार्टी और उसके संस्थापक प्रशांत किशोर को चुनाव प्रचार के बीच एक बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। पिछले विधानसभा चुनाव में जनसुराज के टिकट पर चुनाव लड़ चुके गणितज्ञ प्रोफेसर केसी सिन्हा और दीघा से उम्मीदवार रहे बिट्टू सिंह ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) का दामन थाम लिया है। दोनों नेताओं के बीजेपी में शामिल होने से बांकीपुर उपचुनाव के राजनीतिक समीकरणों पर असर पड़ने की चर्चा तेज हो गई है।
प्रोफेसर केसी सिन्हा का बीजेपी में जाना क्यों अहम?
प्रोफेसर केसी सिन्हा बिहार में गणित शिक्षा का एक जाना-पहचाना नाम हैं। उनकी गणित की किताबें और अभ्यास पुस्तिकाएं वर्षों से राज्य के छात्रों के बीच लोकप्रिय रही हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों के बीच भी उनकी अलग पहचान है। शिक्षा जगत में लंबे समय तक सक्रिय रहने के साथ-साथ वे कई विश्वविद्यालयों में कुलपति (वीसी) की जिम्मेदारी भी निभा चुके हैं।
पिछले विधानसभा चुनाव में प्रशांत किशोर ने उन्हें कुम्हरार विधानसभा सीट से जनसुराज का उम्मीदवार बनाया था। ऐसे में उनका बीजेपी में शामिल होना केवल राजनीतिक बदलाव नहीं, बल्कि जनसुराज के लिए एक प्रतिष्ठित चेहरे का साथ छूटना भी माना जा रहा है।
बिट्टू सिंह की घर वापसी
दीघा विधानसभा क्षेत्र से जनसुराज के उम्मीदवार रहे बिट्टू सिंह का बीजेपी में शामिल होना राजनीतिक जानकारों के लिए अप्रत्याशित नहीं माना जा रहा। वह पहले बीजेपी से जुड़े हुए थे, लेकिन विधानसभा चुनाव से पहले टिकट नहीं मिलने पर उन्होंने पार्टी छोड़ दी थी और जनसुराज के टिकट पर चुनाव लड़ा था।
हाल ही में उन्होंने जनसुराज की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दिया और अब बीजेपी में वापसी कर ली है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि व्यवसायी वर्ग और स्थानीय संगठन में उनकी पकड़ बीजेपी के लिए चुनावी दृष्टि से लाभदायक हो सकती है।
बांकीपुर उपचुनाव क्यों हो रहा है?
बांकीपुर विधानसभा सीट बीजेपी के वरिष्ठ नेता नितिन नवीन के राज्यसभा सांसद चुने जाने के बाद खाली हुई थी। संवैधानिक प्रक्रिया के तहत इस सीट पर उपचुनाव कराया जा रहा है।
इस चुनाव की सबसे बड़ी खासियत यह है कि जनसुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर स्वयं बांकीपुर से चुनाव मैदान में हैं। उनके सामने बीजेपी ने नीरज कुमार सिन्हा को उम्मीदवार बनाया है, जबकि राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) ने रेखा कुमारी गुप्ता को मैदान में उतारा है। ऐसे में यह मुकाबला त्रिकोणीय और बेहद दिलचस्प माना जा रहा है।
जातीय समीकरण भी बने हुए हैं अहम
बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र को पटना शहर की सबसे महत्वपूर्ण सीटों में गिना जाता है। यहां कायस्थ, भूमिहार, वैश्य, ब्राह्मण, यादव, कुर्मी, मुस्लिम, दलित और अन्य पिछड़ा वर्ग के मतदाता अच्छी संख्या में हैं। शहरी सीट होने के कारण शिक्षित और मध्यमवर्गीय मतदाताओं का प्रभाव भी यहां काफी अधिक है।
बीजेपी परंपरागत रूप से इस सीट पर मजबूत स्थिति में रही है, लेकिन प्रशांत किशोर की उम्मीदवारी ने चुनाव को रोचक बना दिया है। ऐसे में प्रत्येक समुदाय का वोट और स्थानीय नेतृत्व का प्रभाव चुनाव परिणाम को प्रभावित कर सकता है।
चुनावी मुकाबले पर क्या पड़ेगा असर?
प्रोफेसर केसी सिन्हा और बिट्टू सिंह का बीजेपी में शामिल होना जनसुराज के लिए निश्चित रूप से राजनीतिक चुनौती माना जा रहा है। दोनों नेताओं की अपनी अलग पहचान और समर्थक वर्ग है, जिससे बीजेपी को चुनावी लाभ मिलने की संभावना जताई जा रही है। वहीं, प्रशांत किशोर के लिए यह उपचुनाव उनकी राजनीतिक विश्वसनीयता की महत्वपूर्ण परीक्षा माना जा रहा है।
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि चुनाव प्रचार के अंतिम चरण में यह राजनीतिक घटनाक्रम मतदाताओं को कितना प्रभावित करता है और बांकीपुर की जनता किस उम्मीदवार पर अपना भरोसा जताती है।
Written By: Geeta Sharma