अंधेरों को कोसने से बेहतर है, अपने हिस्से का एक दीपक जलाना सीखो। बिहार के कटिहार की 13 वर्षीय मासूम लक्ष्मी ने इस कहावत को अपनी जिंदगी में सच साबित कर दिखाया है। शारीरिक चुनौतियों और तमाम मुश्किलों के बावजूद लक्ष्मी ने अपने हौसले को कभी कमजोर नहीं पड़ने दिया। उसने साबित कर दिया कि अगर इंसान के अंदर कुछ कर दिखाने का जज्बा हो, तो बड़ी से बड़ी परेशानी भी उसकी मंजिल का रास्ता नहीं रोक सकती।
दोनों हाथों से दिव्यांग लक्ष्मी के लिए जिंदगी की राह आसान नहीं थी, लेकिन उसने अपनी कमजोरी को अपनी पहचान नहीं बनने दिया। पढ़ाई के प्रति उसके जुनून ने उसे एक अलग पहचान दिलाई है। लक्ष्मी अपने पैरों की उंगलियों में पेन पकड़कर लिखती है और अपनी मेहनत के दम पर शिक्षा की राह पर लगातार आगे बढ़ रही है।
पढ़ाई के जुनून ने बनाया मिसाल
स्कूल में लक्ष्मी दूसरे बच्चों की तरह ही अपनी पढ़ाई करती है। वह पैरों की मदद से किताबें संभालती है और बेहद आसानी व तेजी से लिखती है। उसकी लिखने की क्षमता और आत्मविश्वास देखकर शिक्षक और अन्य छात्र भी हैरान रह जाते हैं। लक्ष्मी ने यह दिखा दिया है कि शारीरिक कमी कभी भी किसी व्यक्ति के सपनों के बीच बाधा नहीं बन सकती। उसकी मेहनत और लगन उन सभी लोगों के लिए प्रेरणा है, जो जीवन में किसी न किसी चुनौती का सामना कर रहे हैं।
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लक्ष्मी की मदद के लिए प्रशासन आगे आया
लक्ष्मी की प्रेरणादायक कहानी सामने आने के बाद स्थानीय प्रशासन भी सक्रिय हो गया। स्वास्थ्य विभाग की एक विशेष टीम ने उसके स्कूल पहुंचकर लक्ष्मी से मुलाकात की और उसकी जरूरतों का जायजा लिया। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि जांच के दौरान पता चला कि लक्ष्मी के पास पहले से ही यूडीआईडी (यूनिक डिसएबिलिटी आईडी) कार्ड मौजूद है। इस कार्ड की मदद से अब उसे सरकारी योजनाओं और सुविधाओं का लाभ दिलाने की प्रक्रिया आसान हो जाएगी।
सरकारी योजनाओं से जोड़ा जाएगा
अधिकारियों के अनुसार, लक्ष्मी को जरूरी उपकरण और अन्य सहायता उपलब्ध कराने के लिए समाज कल्याण विभाग के साथ समन्वय किया जा रहा है। प्रशासन की कोशिश है कि लक्ष्मी को उसकी जरूरत के अनुसार सभी सुविधाएं मिल सकें, ताकि वह बिना किसी रुकावट के अपनी पढ़ाई जारी रख सके। यूडीआईडी कार्ड केंद्र सरकार की एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसके जरिए देशभर के दिव्यांगजनों का रिकॉर्ड तैयार किया जाता है और उन्हें सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ पहुंचाने में मदद मिलती है। लक्ष्मी की कहानी यह संदेश देती है कि जिंदगी में हालात चाहे कितने भी कठिन क्यों न हों, मजबूत इरादे और मेहनत के दम पर हर चुनौती को पार किया जा सकता है। उसने अपने हौसलों से साबित कर दिया कि असली ताकत शरीर में नहीं, बल्कि इंसान के आत्मविश्वास में होती है।
Written by Rozi Sinha