बल्लारी। कर्नाटक के मंत्री एमबी पाटिल ने शनिवार को कहा कि सरकार और कांग्रेस नेतृत्व के बीच किसी भी तरह का मतभेद परिवार में होने वाले छोटे-मोटे मतभेदों जैसा है और इसे मिलकर सुलझा लिया जाएगा।
हाईकमान मतभेद को सुलझा लेगा
पाटिल ने कहा कि न तो सरकार में और न ही कांग्रेस पार्टी में कोई बड़ा भ्रम या संकट है। उन्होंने कहा, “जिस तरह परिवार में छोटे-मोटे मतभेद होते हैं, उसी तरह पार्टी में भी उनका होना स्वाभाविक है। मुख्यमंत्री, पूर्व मुख्यमंत्री और हाईकमान मिलकर सब कुछ सुलझा लेंगे।”
बल्लारी में पत्रकारों से बातचीत के दौरान पाटिल ने मंत्रिमंडल में पदों को लेकर बढ़ते दबाव पर भी बात की। उन्होंने कहा कि पहले मंत्रिमंडल में अधिक लोगों को शामिल करने की गुंजाइश होती थी, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में सीमित पदों के बीच क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व, जातीय संतुलन और विधायकों की आकांक्षाओं को ध्यान में रखना पड़ता है।
उन्होंने कहा कि सभी विधायकों में मंत्री बनने की क्षमता है और हर विधायक का मंत्री बनने की इच्छा रखना स्वाभाविक है। उन्होंने कहा, “हर कोई मंत्री बनना चाहता है और इसमें कुछ भी गलत नहीं है। इससे स्वाभाविक रूप से कुछ दबाव बनता है। मंत्रिमंडल का गठन क्षेत्रीय और जातीय संतुलन समेत कई कारकों को ध्यान में रखकर करना पड़ता है।”
पाटिल ने भरोसा जताया कि मुख्यमंत्री, पूर्व मुख्यमंत्री और पार्टी के वरिष्ठ नेता मिलकर इस मुद्दे का समाधान निकालेंगे। उन्होंने कहा, “AICC अध्यक्ष भी हममें से ही एक हैं। वह सब कुछ संभाल लेंगे।”
मंत्रिमंडल में महिलाओं को मिलेगा मौका
एमबी पाटिल ने कहा कि मंत्रिमंडल में महिलाओं को निश्चित रूप से अवसर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि संदूर की विधायक अन्नपूर्णा तुकाराम को मंत्री बनाया जाएगा या नहीं, इसका अंतिम फैसला कांग्रेस हाईकमान करेगा।
उन्होंने कहा, “उनमें मंत्री बनने की क्षमता है। हमें देखना होगा कि मंत्रिमंडल में संतुलन कैसे बनाए रखा जाता है। सांसद ई. तुकाराम ने बहुत अच्छा काम किया है। उनकी पत्नी अन्नपूर्णा को मंत्री पद देना गलत नहीं है। लेकिन अंतिम फैसला हाईकमान का होगा।”
ई. तुकाराम बोले—पार्टी के फैसले का सम्मान करूंगा
इस बीच बल्लारी से कांग्रेस सांसद ई. तुकाराम ने कहा कि वह पार्टी हाईकमान के फैसले का सम्मान करते हैं और खुद को कांग्रेस का अनुशासित सिपाही मानते हैं।
उन्होंने कहा, “मैं कांग्रेस पार्टी का अनुशासित सिपाही हूं। कांग्रेस मेरे खून में है। पार्टी हाईकमान जो निर्देश देगा, मैं उसी के अनुसार काम करूंगा।”
तुकाराम ने कहा कि उन्होंने 2018 में भी पार्टी नेतृत्व के निर्देशों का पालन किया था। उन्होंने बताया कि पार्टी नेताओं ने उस समय उनसे कहा था कि वे उनके राजनीतिक भविष्य को आकार देंगे और उन्होंने पार्टी के फैसलों का सम्मान किया।
उन्होंने कहा कि उन्हें सोनिया गांधी के बाद कांग्रेस के टिकट पर बल्लारी से जीत हासिल करने पर गर्व है। हाईकमान के निर्देश पर उन्होंने लोकसभा चुनाव लड़ा और सांसद बने। लोकसभा उपचुनाव के दौरान पार्टी के सर्वेक्षण में स्थिति अनुकूल होने के बाद उनकी पत्नी अन्नपूर्णा को चुनाव मैदान में उतारा गया और उन्होंने जीत हासिल की।
अन्नपूर्णा के मंत्री बनने की उम्मीद कायम
अपनी पत्नी के मंत्री पद से अंतिम समय में चूकने की चर्चाओं पर ई. तुकाराम ने कहा कि अवसर पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।
उन्होंने कहा, “यह चर्चा है कि मेरी पत्नी अन्नपूर्णा अंतिम समय में मंत्री पद पाने से चूक गईं। लेकिन अवसर खत्म नहीं हुआ है। मुझे विश्वास है कि भविष्य में उन्हें मौका मिलेगा। मैं मंत्री पद के लिए अंत तक प्रयास करता रहूंगा। मुझे विश्वास है कि उन्हें अवसर मिलेगा।”
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तुकाराम ने यह भी विश्वास जताया कि कांग्रेस 2028 के विधानसभा चुनाव और 2029 के लोकसभा चुनाव में क्रमशः राज्य और केंद्र में सत्ता में आएगी। उन्होंने कहा, “कांग्रेस निश्चित रूप से जीत हासिल करेगी।”
Written By: Pradeep Singh