Kailash Mansarovar Yatra: नेपाल में आई भीषण बाढ़ ने कैलाश मानसरोवर जाने वाले यात्रियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। भोटेकोशी नदी में अचानक आई बाढ़ से रसुवा जिले में भारी नुकसान हुआ है और नेपाल-तिब्बत के बीच अहम रसुवागढ़ी-केरुंग बॉर्डर कॉरिडोर बुरी तरह प्रभावित हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक, 133 भारतीयों समेत करीब 400 कैलाश मानसरोवर यात्री प्रभावित बताए जा रहे हैं।

भोटेकोशी नदी में अचानक बढ़ा पानी, कट गया रास्ता

उत्तरी नेपाल के रसुवा जिले में बुधवार को अचानक आई फ्लैश फ्लड ने कई इलाकों में भारी तबाही मचाई। बाढ़ की वजह से सड़क और पुलों को नुकसान पहुंचा है, जिससे सीमा तक पहुंचने वाला संपर्क प्रभावित हुआ।हालात को देखते हुए नेपाली सेना ने राहत और बचाव अभियान शुरू किया है। हेलीकॉप्टरों की मदद से प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों को निकालने की कोशिश की जा रही है। ऐसे में कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर निकले श्रद्धालुओं की सुरक्षित वापसी भी प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती बन गई है।

400 यात्री क्यों हुए प्रभावित?

नेपाल के रास्ते कैलाश मानसरोवर जाने वाले यात्रियों के लिए रसुवागढ़ी-केरुंग कॉरिडोर एक महत्वपूर्ण मार्ग है। इसी रास्ते से नेपाल से चीन के तिब्बत क्षेत्र में प्रवेश किया जाता है।बाढ़ के कारण इस कॉरिडोर पर आवाजाही बाधित होने से उन यात्रियों की यात्रा रुक गई, जो इसी रूट से आगे बढ़ने वाले थे। रिपोर्ट के अनुसार करीब 400 यात्रियों के संपर्क में नहीं होने की जानकारी सामने आई है, जिनमें 133 भारतीय नागरिक भी शामिल हैं।

26 अगस्त को 390 यात्रियों को जाना था आगे

रिपोर्ट के मुताबिक, 26 अगस्त को करीब 390 तीर्थयात्रियों के नेपाल-तिब्बत सीमा पार करने का कार्यक्रम था। इनमें नेपाली नागरिकों के अलावा अलग-अलग देशों से आए यात्री भी शामिल थे।ये यात्री विभिन्न ट्रैवल एजेंसियों के जरिए कैलाश मानसरोवर यात्रा पर निकले थे। अचानक आई बाढ़ ने इन यात्रियों की आगे की यात्रा को प्रभावित कर दिया।

कैलाश मानसरोवर जाने के कितने रास्ते हैं?

कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए भारत से मुख्य रूप से तीन विकल्पों की चर्चा होती है। भारत सरकार द्वारा संचालित आधिकारिक यात्राओं के लिए उत्तराखंड के लिपुलेख और सिक्किम के नाथू ला मार्ग प्रमुख हैं।इसके अलावा नेपाल के रास्ते भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु कैलाश मानसरोवर पहुंचते हैं। इस रूट पर आमतौर पर निजी ट्रैवल ऑपरेटर यात्रियों की यात्रा व्यवस्था संभालते हैं।

सबसे ज्यादा असर रसुवागढ़ी-केरुंग रूट पर

मौजूदा बाढ़ का सबसे सीधा असर रसुवागढ़ी-केरुंग रूट पर पड़ा है। इस मार्ग में नेपाल की तरफ काठमांडू से स्याफ्रुबेसी, टिमुरे और रसुवागढ़ी होते हुए यात्री चीन के केरुंग/ग्यिरोंग क्षेत्र में प्रवेश करते हैं।इसके बाद यात्रा सागा, मानसरोवर और दारचेन होते हुए कैलाश पर्वत तक पहुंचती है।बाढ़ के कारण स्याफ्रुबेसी, टिमुरे और सीमा के आसपास के इलाकों में सड़क और पुलों को नुकसान पहुंचने की खबर है। ऐसे में इस मार्ग से आगे बढ़ना फिलहाल यात्रियों के लिए मुश्किल हो सकता है।

दूसरा रास्ता हिल्सा-यारी से जाता है

नेपाल से कैलाश मानसरोवर जाने वाला दूसरा प्रमुख मार्ग हिल्सा-यारी है। इस रूट पर यात्री काठमांडू से नेपालगंज और फिर सिमिकोट पहुंचते हैं। इसके बाद हवाई या हेलीकॉप्टर सेवा से हिल्सा पहुंचकर नेपाल-तिब्बत सीमा पार की जाती है।इसके बाद चीन के तिब्बत क्षेत्र में प्रवेश कर पुरांग यानी तक्लाकोट, मानसरोवर और दारचेन के रास्ते कैलाश की यात्रा पूरी की जाती है।इसलिए मौजूदा बाढ़ का असर हर कैलाश यात्रा पर एक जैसा नहीं होगा। खासतौर पर रसुवागढ़ी-केरुंग मार्ग से जाने वाले यात्रियों पर इसका सीधा प्रभाव पड़ने की संभावना है।

अभी यात्रियों के लिए सबसे बड़ी चिंता क्या है?

फिलहाल प्राथमिकता यात्रियों की सुरक्षा और उन्हें प्रभावित इलाके से सुरक्षित निकालने की है। सीमा मार्ग और संपर्क सड़कों को हुए नुकसान का आकलन होने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि रसुवागढ़ी-केरुंग रूट से यात्रा कब सामान्य रूप से शुरू हो सकेगी।इसका मतलब यह नहीं है कि कैलाश मानसरोवर जाने वाले हर यात्री की यात्रा प्रभावित होगी। असर मुख्य रूप से उस मार्ग और उन यात्रियों पर निर्भर करेगा, जो बाढ़ प्रभावित कॉरिडोर से गुजरने वाले थे।