जमाअत-ए-इस्लामी हिंद के उपाध्यक्ष प्रो. सलीम इंजीनियर ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का स्वागत किया। उन्होंने इसे परीक्षा प्रणाली में बढ़ती अनियमितताओं और NEET पेपर लीक विवाद के बाद जवाबदेही की दिशा में उठाया गया कदम बताया है। आगे कहा कि देश की शिक्षा व्यवस्था से जुड़े गंभीर सवालों के बीच यह फैसला काफी पहले लिया जाना चाहिए था।
'पारदर्शिता और जवाबदेही बनाए रखना बेहद जरूरी'
मीडिया को जारी बयान में प्रो. सलीम इंजीनियर ने कहा कि परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता को लेकर लगातार सामने आ रहे विवादों ने छात्रों, अभिभावकों और आम नागरिकों के बीच चिंता पैदा की है। उन्होंने कहा कि शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही बनाए रखना बेहद जरूरी है, क्योंकि लाखों युवाओं का भविष्य इससे जुड़ा हुआ है।
उन्होंने कहा कि देर से लिया गया यह निर्णय भी देशभर के छात्रों द्वारा उठाई गई सार्वजनिक चिंताओं की गंभीरता को स्वीकार करता है और शिक्षा संस्थानों में भरोसा बहाल करने की दिशा में एक शुरुआत हो सकता है।
छात्रों और युवाओं के संघर्ष की सराहना
प्रो. सलीम इंजीनियर ने NEET विवाद के खिलाफ आवाज उठाने वाले छात्रों, छात्र संगठनों और देशभर के युवाओं की भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा कि ‘जेन Z’ और युवा भारतीयों ने शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों के माध्यम से लोकतांत्रिक तरीके से अपनी चिंताओं को सामने रखा।
'छात्रों का प्रदर्शन प्रशंसनीय है'
उन्होंने कहा कि छात्रों ने जिस धैर्य, दृढ़ संकल्प और लोकतांत्रिक भावना का प्रदर्शन किया है, वह प्रशंसनीय है। उनके अनुसार, युवाओं के लगातार आंदोलन ने यह संदेश दिया है कि देश की नई पीढ़ी शिक्षा प्रणाली की अखंडता और अपने भविष्य की सुरक्षा को लेकर गंभीर है। उन्होंने कहा कि छात्रों की आवाज केवल एक परीक्षा विवाद तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधारों की मांग को भी सामने लाती है।
'केवल इस्तीफे से नहीं होगा समाधान, बड़े सुधारों की जरूरत'
जमाअत-ए-इस्लामी हिंद के उपाध्यक्ष ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल किसी एक व्यक्ति के इस्तीफे से शिक्षा क्षेत्र की गहरी समस्याओं का समाधान संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि परीक्षा व्यवस्था, संस्थागत पारदर्शिता और प्रशासनिक जवाबदेही में व्यापक बदलाव की आवश्यकता है।
उन्होंने सरकार से मांग की कि सार्वजनिक परीक्षाओं की विश्वसनीयता बहाल करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। साथ ही ऐसी व्यवस्था विकसित की जाए जिससे भविष्य में पेपर लीक और परीक्षा संबंधी अनियमितताओं को रोका जा सके। प्रो. सलीम इंजीनियर ने सुझाव दिया कि शिक्षा सुधार की प्रक्रिया में शिक्षाविदों, शिक्षा विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं, शिक्षकों और अन्य संबंधित पक्षों को शामिल किया जाना चाहिए, ताकि नीतियां केवल प्रशासनिक निर्णयों पर आधारित न होकर विशेषज्ञ अनुभव और व्यापक परामर्श से तैयार हों।
प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई की निष्पक्ष जांच की मांग
उन्होंने आंदोलन के दौरान दिल्ली और बिहार में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित पुलिस कार्रवाई पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि लाठीचार्ज, पैलेट गन के इस्तेमाल, नजदीक से आंसू गैस छोड़े जाने और प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने जैसी घटनाओं की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि यदि किसी पुलिसकर्मी द्वारा जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग किया गया है तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन का अधिकार महत्वपूर्ण है और इसकी रक्षा की जानी चाहिए।
पारदर्शी और समान अवसर वाली शिक्षा व्यवस्था की मांग
प्रो. सलीम इंजीनियर ने छात्रों और नागरिकों से अपील की कि वे शिक्षा सुधार के व्यापक उद्देश्य के प्रति प्रतिबद्ध रहें और आंदोलन को शांतिपूर्ण तरीके से जारी रखें। उन्होंने कहा कि भारत को ऐसी शिक्षा प्रणाली की जरूरत है जो किफायती, सुलभ, पारदर्शी और ईमानदारी पर आधारित हो। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि हर छात्र को समान अवसर मिले और किसी भी परीक्षा में अनियमितता के कारण युवाओं के भविष्य पर असर न पड़े। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में जनता का विश्वास तभी पूरी तरह बहाल होगा, जब सरकार ठोस सुधार लागू करेगी और परीक्षा प्रणाली को अधिक मजबूत, निष्पक्ष और जवाबदेह बनाएगी।
Written By: एम अतहर उद्दीन मुन्ने भारती
Edited By: Geeta Sharma