पसंद का जीवनसाथी चुन लेने के बाद शादी तक का सफर हमेशा आसान नहीं होता। खासकर तब, जब परिवार प्रेम विवाह के पक्ष में न हो। जाति, धर्म, आर्थिक स्थिति, सामाजिक पृष्ठभूमि, परिवार की प्रतिष्ठा या दूसरे कई कारणों से माता-पिता रिश्ते को स्वीकार करने में हिचक सकते हैं। ऐसे समय में गुस्सा, लगातार बहस या जल्दबाजी में कोई बड़ा फैसला लेने के बजाय धैर्य और समझदारी से आगे बढ़ना बेहतर होता है। परिवार को अपनी बात समझने में समय लग सकता है, इसलिए बातचीत के साथ भरोसा कायम करना भी जरूरी है।

सबसे पहले उस सदस्य से बात करें जो आपकी बात समझता हो

पूरे परिवार के सामने एक साथ अपनी शादी की बात रखने के बजाय शुरुआत उस सदस्य से करें, जो आपकी सोच को आसानी से समझ सकता है। यह मां, पिता, भाई-बहन या परिवार का कोई करीबी सदस्य हो सकता है। उससे शांत माहौल में बात करें और बताएं कि आप अपने पार्टनर को क्यों पसंद करते हैं और उसके साथ शादी करने का फैसला क्यों लिया है। अगर वह व्यक्ति आपकी बात समझ लेता है, तो वह परिवार के दूसरे सदस्यों से बातचीत में आपका साथ दे सकता है। हालांकि, किसी एक सदस्य को बाकी परिवार के खिलाफ खड़ा करने से बचें। उद्देश्य परिवार में गुट बनाना नहीं, बल्कि ऐसे व्यक्ति का सहयोग लेना होना चाहिए जिसकी बात घर में भरोसे के साथ सुनी जाती हो।

अचानक शादी का फैसला सामने रखने से बचें

अगर परिवार इस रिश्ते से अनजान है, तो अचानक यह कहना कि आपने शादी तय कर ली है और अब उन्हें सिर्फ मंजूरी देनी है, स्थिति को और कठिन बना सकता है। माता-पिता को लग सकता है कि इतने महत्वपूर्ण फैसले में उनकी कोई भूमिका नहीं रही। अगर माहौल अनुकूल हो, तो पार्टनर के बारे में धीरे-धीरे परिवार से बातचीत शुरू करें। उसकी पढ़ाई, नौकरी, स्वभाव, परिवार और भविष्य की योजनाओं जैसी बातों से घरवालों को परिचित कराया जा सकता है। इसके बाद सही समय देखकर दोनों की मुलाकात भी कराई जा सकती है। पहली मुलाकात को शादी पर फैसला लेने की परीक्षा न बनाएं। परिवार को सामने वाले व्यक्ति को जानने और उसके बारे में अपनी राय बनाने का पर्याप्त समय दें।

पहले समझें कि परिवार को किस बात से है आपत्ति

माता-पिता रिश्ते के लिए तैयार नहीं हैं तो केवल यह मान लेना कि वे आपकी पसंद को नहीं समझते, समस्या का समाधान नहीं करेगा। सबसे पहले उनकी वास्तविक चिंता जानने की कोशिश करें। आपत्ति जाति या धर्म को लेकर हो सकती है। कुछ परिवार नौकरी, आर्थिक स्थिति, उम्र के अंतर, सामाजिक पृष्ठभूमि या दोनों परिवारों की जीवनशैली को लेकर चिंतित रहते हैं। कई माता-पिता को यह डर भी होता है कि शादी के बाद रिश्ता सफल रहेगा या नहीं। जब असली कारण सामने आएगा, तभी उस चिंता का सही तरीके से जवाब देना संभव होगा।

अपने रिश्ते की गंभीरता व्यवहार से दिखाएं

सिर्फ यह कहना कि आप दोनों एक-दूसरे से प्यार करते हैं, माता-पिता के लिए हमेशा पर्याप्त नहीं होता। शादी के साथ कई जिम्मेदारियां जुड़ी होती हैं और परिवार अक्सर यह देखना चाहता है कि दोनों इन जिम्मेदारियों के लिए कितने तैयार हैं। अपने माता-पिता को बताएं कि आपने करियर, रहने की व्यवस्था, आर्थिक जिम्मेदारियों और परिवार से जुड़े मामलों को लेकर क्या सोचा है। यह भी स्पष्ट करें कि भविष्य को लेकर आप दोनों की प्राथमिकताएं और जीवन के लक्ष्य किस हद तक एक जैसे हैं। सिर्फ बातचीत ही नहीं, अपने व्यवहार से भी जिम्मेदारी साबित करें। नौकरी या काम करते हैं तो आर्थिक अनुशासन रखें, घर की जिम्मेदारियों में सहयोग करें और महत्वपूर्ण फैसले सोच-समझकर लें। इससे परिवार को यह भरोसा मिल सकता है कि आपका फैसला केवल भावनाओं पर आधारित नहीं है।

परिवार के भरोसेमंद व्यक्ति की लें मदद

कभी-कभी माता-पिता अपने बच्चे की बात को भावनात्मक नजरिए से देखते हैं, लेकिन परिवार के किसी भरोसेमंद व्यक्ति की बात अधिक गंभीरता से सुन सकते हैं। ऐसे में किसी चाचा, मामा, मौसी, बड़े भाई-बहन या पुराने पारिवारिक मित्र की मदद ली जा सकती है। पहले उस व्यक्ति को अपने रिश्ते और माता-पिता की चिंताओं के बारे में पूरी जानकारी दें। अगर उसे भी लगता है कि रिश्ता सही है, तो वह शांत तरीके से परिवार के सामने आपकी बात रख सकता है। हालांकि, एक साथ कई रिश्तेदारों से माता-पिता पर दबाव डलवाना सही रणनीति नहीं है। इससे उन्हें घेराव जैसा महसूस हो सकता है और वे अपनी बात पर और ज्यादा अड़ सकते हैं। बेहतर है कि परिवार में सम्मान रखने वाले किसी एक समझदार व्यक्ति को मध्यस्थ बनाया जाए।