Greater Noida: ग्रेटर नोएडा वेस्ट में रहने वाले लाखों लोगों के लिए मेट्रो परियोजना अब अपने अंतिम चरण की ओर बढ़ रही है। PIB ने नोएडा सेक्टर-51 से ग्रेटर नोएडा वेस्ट के सेक्टर-4 (गौर चौक) तक प्रस्तावित 8.4 किलोमीटर लंबे मेट्रो कॉरिडोर को मंजूरी दे दी है। केंद्रीय वित्त मंत्रालय के अधीन आने वाले PIB की यह स्वीकृति परियोजना के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। अब केवल केंद्रीय मंत्रिमंडल की अंतिम मंजूरी मिलना बाकी है, जिसके बाद निर्माण प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू हो सकेगी।
लगभग 2,000 करोड़ रुपये की लागत से बनेगा एलिवेटेड कॉरिडोर
प्रस्तावित मेट्रो कॉरिडोर पूरी तरह एलिवेटेड होगा और इसकी अनुमानित लागत करीब 2,000 करोड़ रुपये बताई गई है। नोएडा मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (NMRC) के अनुसार, कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद निर्माण एजेंसी के चयन के लिए टेंडर जारी किए जाएंगे। परियोजना का निर्माण शुरू होने के बाद इसे पूरा करने में लगभग चार वर्ष का समय लग सकता है। NMRC के महाप्रबंधक प्रदीप यादव ने बताया कि PIB की बैठक के मिनट्स जल्द साझा किए जाएंगे। जिसके बाद प्रस्ताव को अंतिम स्वीकृति के लिए केंद्र सरकार के पास भेजा जाएगा।
8.4 किलोमीटर के रूट पर होंगे पांच नए स्टेशन
नया मेट्रो एक्सटेंशन नोएडा सेक्टर-51 से शुरू होकर सेक्टर-61, सेक्टर-70, सेक्टर-122 और सेक्टर-123 से गुजरते हुए ग्रेटर नोएडा वेस्ट के सेक्टर-4 (गौर चौक) तक पहुंचेगा। इस पूरे रूट पर कुल पांच नए एलिवेटेड स्टेशन बनाए जाएंगे। यह कॉरिडोर मौजूदा एक्वा लाइन से जुड़कर यात्रियों को बेहतर कनेक्टिविटी प्रदान करेगा और दिल्ली-एनसीआर के अन्य हिस्सों तक सफर को अधिक सुविधाजनक बनाएगा।
गौर चौक के ट्रैफिक जाम से मिलेगी बड़ी राहत
गौर चौक ग्रेटर नोएडा वेस्ट का सबसे व्यस्त ट्रैफिक जंक्शन माना जाता है। यहां से नोएडा, सूरजपुर, क्रॉसिंग्स रिपब्लिक और दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे की ओर जाने वाला भारी ट्रैफिक गुजरता है। अनुमान है कि रोजाना 5 लाख से अधिक लोग इस क्षेत्र से आवाजाही करते हैं। फिलहाल मजबूत सार्वजनिक परिवहन की कमी के कारण अधिकांश लोग निजी वाहनों पर निर्भर हैं, जिससे पीक आवर्स में लंबा जाम लगता है। मेट्रो सेवा शुरू होने के बाद निजी वाहनों पर निर्भरता कम होगी और ट्रैफिक दबाव में भी उल्लेखनीय कमी आने की उम्मीद है।
संशोधित DPR के बाद मिली परियोजना को गति
इस परियोजना का शुरुआती प्रस्ताव लगभग 18 किलोमीटर लंबे मेट्रो रूट का था, जिसे उत्तर प्रदेश सरकार ने मंजूरी भी दे दी थी। हालांकि, गाजियाबाद से जेवर एयरपोर्ट तक प्रस्तावित 72 किलोमीटर लंबे RRTS कॉरिडोर के कारण केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय (MoHUA) ने इस योजना पर पुनर्विचार करने को कहा था। इसके बाद NMRC ने विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) में संशोधन किया और रूट को 8.4 किलोमीटर तक सीमित कर दिया। संशोधित प्रस्ताव को अब PIB की मंजूरी मिल चुकी है, जिससे परियोजना को नई गति मिली है।
क्षेत्र के विकास को मिलेगा नया आयाम
विशेषज्ञों का मानना है कि इस मेट्रो कॉरिडोर के शुरू होने से ग्रेटर नोएडा वेस्ट में आवागमन आसान होगा, रियल एस्टेट सेक्टर को बढ़ावा मिलेगा और रोजगार व व्यावसायिक गतिविधियों में भी तेजी आएगी। साथ ही, लाखों दैनिक यात्रियों को सुरक्षित, तेज और सुविधाजनक सार्वजनिक परिवहन का विकल्प मिलेगा।
Written By: Geeta Sharma