आज के डिजिटल युग में मोबाइल फोन हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। सुबह उठने से लेकर रात सोने तक हम लगातार स्क्रीन से जुड़े रहते हैं। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि दिन में सिर्फ 2 घंटे मोबाइल और अन्य डिजिटल डिवाइस से दूरी बनाना दिमाग के लिए बेहद फायदेमंद हो सकता है।
मोबाइल से दूरी दिमाग के लिए बेहतर
हाल ही में न्यूरोसाइंस और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी कुछ रिसर्च में यह संकेत मिला है कि जब व्यक्ति कुछ समय के लिए पूरी तरह शांति में रहता है और डिजिटल इनपुट से दूर होता है, तो उसका दिमाग बेहतर तरीके से काम करता है। खासकर हिप्पोकैंपस, जो याददाश्त और सीखने की क्षमता से जुड़ा मस्तिष्क का हिस्सा है, इस दौरान अधिक सक्रिय और संतुलित हो सकता है।
लगातार स्क्रीन टाइम से दिमाग में बढ़ता है तनाव
कुछ अध्ययनों में यह भी पाया गया है कि लगातार सूचना, नोटिफिकेशन और स्क्रीन टाइम से दिमाग पर तनाव बढ़ता है। इससे ध्यान भटकने की समस्या, चिंता और मानसिक थकान जैसी दिक्कतें सामने आ सकती हैं। इसके विपरीत, जब व्यक्ति कुछ समय के लिए शांत वातावरण में रहता है, तो दिमाग को 'रीसेट' करने का मौका मिलता है।
शांत समय बिताने से दिमाग खुद को रिपेयर करता है
विशेषज्ञों के अनुसार, शांति और ध्यान जैसी अवस्थाएं मस्तिष्क में न्यूरोप्लास्टिसिटी को बढ़ावा देती हैं। कई रिसर्च में यह सुझाव दिया गया है कि शांत समय बिताने से नए न्यूरल कनेक्शन बनने की प्रक्रिया को समर्थन मिल सकता है, जिसे सामान्य भाषा में ब्रेन की 'रीवायरिंग' कहा जाता है। इससे सीखने की क्षमता और याद रखने की शक्ति में सुधार देखा जा सकता है।
लगातार स्क्रीन पर रहने से डोपामिन सिस्टम पर असर
मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार स्क्रीन पर रहने से डोपामिन सिस्टम पर असर पड़ सकता है, जिससे व्यक्ति जल्दी-जल्दी उत्तेजना और नई जानकारी की तलाश में रहता है। ऐसे में कुछ घंटों की डिजिटल दूरी इस चक्र को तोड़ने में मदद कर सकती है और मानसिक स्थिरता बढ़ा सकती है।
2 घंटे का डिजिटल ब्रेक मानसिक थकान को कम करता है
तेज रफ्तार जिंदगी में जहां हर कोई लगातार ऑनलाइन जुड़ा हुआ है, वहां 2 घंटे का डिजिटल ब्रेक एक साधारण लेकिन प्रभावी उपाय माना जा रहा है। यह न केवल मानसिक थकान को कम कर सकता है बल्कि दिमाग को अधिक स्पष्ट और संतुलित बनाने में भी सहायक हो सकता है। मोबाइल से थोड़ी दूरी बनाना कोई तकनीक विरोधी कदम नहीं है, बल्कि यह दिमाग को स्वस्थ रखने की एक आधुनिक जरूरत बनता जा रहा है।
Written By: Geeta Sharma