जिनेवा। भारत के पांच मयूर (मोर) स्विट्जरलैंड के जिनेवा जिनेवा स्थित संयुक्त राष्ट्र कार्यालय पहुंच गए हैं। भारत की ओर से उपहार में दिए गए पांच युवा मोरों का पैलेस ऑफ नेशंस परिसर में स्वागत किया है। इसके साथ ही इस परिसर में मोरों को रखने की दशकों पुरानी परंपरा भी जारी है।

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन ने इस उपहार को भारत और संयुक्त राष्ट्र के बीच साझेदारी का “एक और आयाम” बताया। मिशन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “साझेदारी का एक और आयाम: @UNGeneva को युवा मोरों का उपहार। राष्ट्रीय पक्षी होने के कारण मोरों का हर भारतीय के दिल में विशेष स्थान है।”

संयुक्त राष्ट्र जिनेवा ने उपहार का स्वागत किया

भारत के इस उपहार का स्वागत करते हुए संयुक्त राष्ट्र जिनेवा ने कहा, “पांडा डिप्लोमेसी को पीछे छोड़िए-भारत की ओर से उपहार में दिए गए पांच युवा मोर @UNGeneva पहुंच गए हैं। यह उस परंपरा को जारी रखता है जो खुद संयुक्त राष्ट्र से भी पुरानी है। जिनेवा के सबसे नए और सबसे चमकदार राजनयिकों से मिलिए।”

चार नीले मोर और एक दुर्लभ सफेद नर मोर

इस पहल के तहत चार नीले मोर और एक दुर्लभ सफेद नर मोर लाए गए हैं। इसका उद्देश्य परिसर में मोरों की संख्या को फिर से बढ़ाना है, जो घटकर केवल एक जीवित पक्षी तक रह गई थी।

एरियाना पार्क में अस्थायी पक्षीघर में पहुंचे मोर

UN News के अनुसार, नए मोरों को फिलहाल एरियाना पार्क में एक अस्थायी और विशाल एवियरी (पक्षीघर) में रखा गया है, ताकि वे नए वातावरण के अभ्यस्त हो सकें। करीब तीन महीने बाद उन्हें परिसर में स्वतंत्र रूप से घूमने की अनुमति दी जाएगी।

महानिदेशक ने कहा- पुरानी राजनयिक परंपरा कायम

UN जिनेवा की महानिदेशक तातियाना वालोवाया ने कहा, “हम पांच नए मोरों का स्वागत करके बहुत खुश हैं-चार नीले और एक सफेद, संयुक्त राष्ट्र के पारंपरिक नीले और सफेद रंगों में। हमने उनके लिए एक अस्थायी घर बनाया है। वे अगले तीन महीने यहां रहेंगे और उसके बाद उन्हें स्वतंत्र रूप से घूमने और एरियाना पार्क की मेहमाननवाजी का आनंद लेने की अनुमति दी जाएगी।”

यह उपहार संयुक्त राष्ट्र और भारत के बीच पुरानी राजनयिक परंपरा को आगे बढ़ाता है। UN News के मुताबिक, 1981 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने जिनेवा को मोरों की एक प्रजनन जोड़ी भेजी थी।

यह भारतीय मिशन के लिए गर्व की बात

भारत के संयुक्त राष्ट्र में राजदूत एवं स्थायी प्रतिनिधि अरिंदम बागची ने कहा, “यह भारतीय मिशन के लिए वास्तव में गर्व की बात है कि हम UN जिनेवा को पांच मोर ‘Pavo cristatus’ उपहार में दे पा रहे हैं। यहां मोरों को रखने की एक परंपरा रही है। हमने 1981 में भी मोर उपहार में दिए थे और इस परंपरा को जारी रखते हुए हमें खुशी हो रही है।”

विशेष एंबुलेंस के जरिए मोर को जिनेवा पहुंचाया

मोरों की सुरक्षित यात्रा और नए वातावरण में सहज रूप से बसने के लिए जिनेवा बायोपार्क ने उन्हें चिकित्सा सुविधाओं से लैस एक विशेष एंबुलेंस के जरिए पहुंचाया।

पशु चिकित्सक डॉ. टोबियास ब्लाहा ने इस स्थान को मोरों के लिए उपयुक्त बताते हुए कहा कि यह उनके लिए “सपनों जैसा आवास” है। यहां पुराने पेड़, छायादार स्थान, विभिन्न प्रकार के फूल और पर्याप्त घास वाले क्षेत्र मौजूद हैं।

मोरों को शिकारियों और लोमड़ियों से बचाने के लिए सतर्क निगरानी

हालांकि, वन्यजीव विशेषज्ञों ने युवा मोरों को स्थानीय शिकारियों, विशेष रूप से लोमड़ियों, से बचाने के लिए सतर्क निगरानी की आवश्यकता पर जोर दिया है।

डॉ. ब्लाहा ने बताया कि बड़े और खुले पार्क में रहने के आदी नहीं होने के कारण युवा मोर अक्सर ऐसी शाखाओं पर सोते हैं जो लोमड़ियों से सुरक्षित रहने के लिए पर्याप्त ऊंची नहीं होतीं। उन्होंने कहा कि जितनी ऊंची जगह पर मोर रात में सोएंगे, उतना ही खतरा कम होगा, क्योंकि “लोमड़ियां पेड़ों पर नहीं चढ़ सकतीं।”

चूंकि पांचों मोर इसी वर्ष पैदा हुए नर पक्षी हैं, अधिकारियों को उम्मीद है कि वे परिसर में स्थापित होने के बाद शांतिपूर्वक साथ रहेंगे।

UN जिनेवा की फैसिलिटीज मैनेजमेंट ऑफिसर लाएतितिया मेनिन ने उनके सामाजिक व्यवहार के बारे में बताया कि चूंकि सभी नर मोर एक साथ बड़े हो रहे हैं और इसी वर्ष पैदा हुए हैं, इसलिए वे समूह में अपना स्थान निर्धारित कर लेंगे। इससे भविष्य में मादा मोरों की मौजूदगी के दौरान उनके परिसर से दूर चले जाने की संभावना भी कम होगी।

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परिसर में मोरों को रखने की परंपरा इसकी मूल संपत्ति के मालिक गुस्ताव रेविलियोड से जुड़ी है। उन्होंने 1890 में यह संपत्ति जिनेवा को इस शर्त के साथ दी थी कि परिसर में मोरों को स्वतंत्र रूप से घूमने दिया जाए। दशकों से ये मोर संयुक्त राष्ट्र के इस राजनयिक परिसर की पहचान का हिस्सा बन चुके हैं। UN अधिकारियों के अनुसार, पांच नए मोरों के नाम रखने के लिए जल्द ही सार्वजनिक नामकरण प्रतियोगिता भी शुरू की जाएगी।

Written By: Pradeep Singh