Sahkar Se Samriddhi:  "सहकारिता" केवल एक आर्थिक व्यवस्था या संगठनात्मक ढांचा नहीं है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति की उस प्राचीन जीवन-दृष्टि का आधुनिक स्वरूप है, जिसका सार वेदों के मंत्र "संगच्छध्वं संवदध्वं" में निहित है। इसका अर्थ है साथ चलें, साथ सोचें और साथ मिलकर प्रगति करें। यही भावना समाज को एकजुट करती है और सामूहिक शक्ति के माध्यम से विकास का मार्ग प्रशस्त करती है।

"एक सबके लिए और सब एक के लिए"

सहकारिता का मूल मंत्र "एक सबके लिए और सब एक के लिए" समाज के प्रत्येक व्यक्ति को समान अवसर प्रदान करने का संदेश देता है। इसका उद्देश्य केवल आर्थिक लाभ अर्जित करना नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता, आत्मनिर्भरता, लोकतांत्रिक भागीदारी और सतत विकास को मजबूत करना है। यही कारण है कि प्रत्येक वर्ष जुलाई माह के पहले शनिवार को 'अंतरराष्ट्रीय सहकारिता दिवस' पूरे विश्व में मनाया जाता है। वर्ष 2026 में भी यह दिवस उत्साह, जनभागीदारी और नई ऊर्जा के साथ मनाया गया। इसी अवसर पर राजस्थान के चूरू जिले में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम ने न केवल स्थानीय स्तर पर सहकारिता आंदोलन को नई दिशा दी, बल्कि केंद्र सरकार की ‘सहकार से समृद्धि’ की नीति को जन-जन तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण कार्य भी किया। 

चूरू में हुआ प्रेरणादायी आयोजन

अंतरराष्ट्रीय सहकारिता दिवस के उपलक्ष्य में चूरू स्थित 'भूमि विकास बैंक परिसर' में एक गरिमामयी एवं प्रेरणादायक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में राजनीति, सामाजिक नेतृत्व, व्यापार जगत तथा सहकारिता क्षेत्र से जुड़े अनेक प्रतिष्ठित व्यक्तित्वों ने भाग लेकर ग्रामीण विकास और सामूहिक समृद्धि के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की। कार्यक्रम का उद्देश्य केवल सहकारिता दिवस का औपचारिक आयोजन नहीं था, बल्कि सहकारिता के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने, किसानों को आत्मनिर्भर बनाने तथा युवाओं को इस आंदोलन से जोड़ने का संदेश देना भी था।

विशिष्ट अतिथियों का सम्मान

कार्यक्रम में चूरू के लोकप्रिय विधायक हरलाल सहारण ने मुख्य भूमिका निभाते हुए समाज और संगठन के लिए उल्लेखनीय योगदान देने वाले विशिष्ट व्यक्तित्वों का सम्मान किया। इस अवसर पर भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) के पूर्व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री अतुल कुमार का विशेष स्वागत किया गया। उन्होंने वर्षों से युवाओं को राष्ट्र निर्माण, सामाजिक नेतृत्व और सहकारिता की भावना से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसके साथ ही टीएनपी ग्रुप (TNP Group) के प्रबंध निदेशक श्री अमित कुमार पांडे का भी अभिनंदन किया गया। उन्होंने अपने कॉर्पोरेट विजन और सामाजिक सरोकारों के माध्यम से क्षेत्रीय विकास तथा रोजगार सृजन की दिशा में उल्लेखनीय प्रयास किए हैं। कार्यक्रम में उनका सम्मान इस बात का प्रतीक था कि उद्योग, समाज और सहकारिता मिलकर ग्रामीण भारत के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

वृक्षारोपण: सहकारिता और पर्यावरण संरक्षण का संदेश

कार्यक्रम का एक अत्यंत प्रेरणादायक पक्ष पर्यावरण संरक्षण के प्रति सामूहिक संकल्प भी रहा। भूमि विकास बैंक परिसर में सभी अतिथियों एवं जनप्रतिनिधियों द्वारा व्यापक स्तर पर वृक्षारोपण किया गया। वक्ताओं ने कहा कि जिस प्रकार एक छोटा-सा पौधा समय के साथ विशाल वटवृक्ष बनकर समाज को छाया, फल और जीवन प्रदान करता है, उसी प्रकार सहकारिता का एक छोटा प्रयास भी आगे चलकर हजारों परिवारों के जीवन में समृद्धि का आधार बन सकता है। वृक्षारोपण के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण, जलवायु संतुलन और आने वाली पीढ़ियों के प्रति उत्तरदायित्व का संदेश भी दिया गया। यह आयोजन इस बात का उदाहरण बना कि आर्थिक विकास और पर्यावरण संरक्षण दोनों साथ-साथ चल सकते हैं।

वरिष्ठ नेताओं की गरिमामयी उपस्थिति

कार्यक्रम की गरिमा उस समय और बढ़ गई जब राजस्थान भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़ विशेष रूप से उपस्थित रहे। उनके साथ भाजपा के प्रदेश मंत्री वासुदेव चावला, स्थानीय जनप्रतिनिधि, सहकारिता से जुड़े पदाधिकारी, किसान, महिला स्वयं सहायता समूहों की प्रतिनिधियां तथा बड़ी संख्या में प्रबुद्ध नागरिक भी मौजूद रहे। सभी वक्ताओं ने सहकारिता आंदोलन को ग्रामीण भारत के आर्थिक पुनर्निर्माण का सबसे प्रभावी माध्यम बताया और समाज के प्रत्येक वर्ग से इसमें सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया।

सहकारिता मंत्रालय: ऐतिहासिक पहल

राजेन्द्र राठौड़ ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में देश का सहकारिता क्षेत्र अभूतपूर्व परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के बाद लंबे समय तक सहकारिता क्षेत्र को वह प्राथमिकता नहीं मिल सकी जिसकी उसे आवश्यकता थी। लेकिन वर्ष 2021 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देश में पहली बार 'स्वतंत्र सहकारिता मंत्रालय' का गठन करना एक ऐतिहासिक निर्णय सिद्ध हुआ। इस मंत्रालय की जिम्मेदारी अमित शाह को सौंपे जाने के बाद सहकारिता क्षेत्र में व्यापक सुधार, पारदर्शिता, तकनीकी आधुनिकीकरण और संस्थागत मजबूती की दिशा में उल्लेखनीय कार्य हुए हैं।

पैक्स को बनाया जा रहा बहुआयामी

राजेन्द्र राठौड़ ने अपने संबोधन में विशेष रूप से PACS (Primary Agricultural Credit Societies) का उल्लेख करते हुए कहा कि ये संस्थाएँ ग्रामीण ऋण व्यवस्था की रीढ़ हैं। उन्होंने बताया कि अमित शाह के मार्गदर्शन में पैक्स को केवल ऋण वितरण तक सीमित न रखकर बहुउद्देशीय संस्थाओं के रूप में विकसित किया जा रहा है। इससे गांवों में रोजगार के नए अवसर भी विकसित हो रहे हैं।

युवाओं और समाज के लिए प्रेरणा

चूरू का यह आयोजन केवल एक समारोह नहीं था, बल्कि समाज को यह संदेश देने वाला जनआंदोलन था कि सामूहिक प्रयासों से ही स्थायी विकास संभव है। युवाओं के लिए यह कार्यक्रम विशेष रूप से प्रेरणादायक रहा, क्योंकि इसमें सामाजिक सेवा, राष्ट्र निर्माण, पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक आत्मनिर्भरता को एक ही मंच पर जोड़कर प्रस्तुत किया गया। सहकारिता का विस्तार तभी संभव है जब नई पीढ़ी इसे केवल संस्था नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में स्वीकार करे।

विचार-विमर्श और विकास के संकल्पों ने आयोजन को बनाया यादगार

अंतरराष्ट्रीय सहकारिता दिवस 2026 पर चूरू में आयोजित यह भव्य कार्यक्रम सहकारिता, सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण और राष्ट्र निर्माण का उत्कृष्ट उदाहरण बनकर सामने आया। सम्मान समारोह, वृक्षारोपण, विचार-विमर्श और विकास के संकल्पों ने इस आयोजन को यादगार बना दिया। आज आवश्यकता है कि सहकारिता के इस पौधे को ईमानदारी, पारदर्शिता, निष्ठा और जनभागीदारी के जल से निरंतर सींचा जाए। यदि समाज का प्रत्येक वर्ग इस अभियान से जुड़े, तो सहकारिता केवल आर्थिक प्रगति का माध्यम नहीं रहेगी, बल्कि आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत की मजबूत आधारशिला सिद्ध होगी।

 

टीएनपी डेस्क