अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन (AHA) के एक नए वैज्ञानिक बयान के अनुसार, अधिकांश स्वस्थ वयस्कों के लिए रोज़ाना 400 mg तक कैफीन का सेवन आम तौर पर सुरक्षित माना जा सकता है। यह मात्रा लगभग पांच 8-औंस कप नियमित कैफीनयुक्त कॉफी के बराबर बताई गई है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि हर व्यक्ति के लिए पांच कप कॉफी पीना उचित है। कैफीन के प्रति संवेदनशीलता व्यक्ति-दर-व्यक्ति काफी अलग हो सकती है।

सीमित कॉफी सेवन से संभावित फायदे

समीक्षा में शामिल शोध से संकेत मिलता है कि सीमित मात्रा में कॉफी पीने का संबंध हृदय स्वास्थ्य के लिए कुछ सकारात्मक परिणामों से हो सकता है। कुछ अध्ययनों में रोज़ाना दो से चार कप कॉफी का सेवन हृदय रोग, हार्ट फेलियर और स्ट्रोक के अपेक्षाकृत कम जोखिम से जुड़ा पाया गया है।बिना चीनी, फ्लेवर्ड सिरप या अधिक क्रीम के ब्लैक कॉफी को विशेष रूप से बेहतर विकल्प माना जा सकता है। शोध में इसके सेवन का संबंध टाइप-2 डायबिटीज़, हृदय रोग, स्ट्रोक, हार्ट फेलियर और कुछ प्रकार की अनियमित धड़कनों के कम जोखिम से भी देखा गया है।

हर कैफीनयुक्त पेय एक जैसा नहीं

AHA के बयान में इस बात पर विशेष जोर दिया गया है कि कॉफी और अन्य कैफीनयुक्त उत्पादों के प्रभाव समान नहीं होते। नियमित ब्रूड कॉफी में लगभग 9.4 से 20.6 mg कैफीन प्रति फ्लूइड औंस हो सकता है, जबकि कुछ एनर्जी ड्रिंक्स और एनर्जी शॉट्स में यह मात्रा 40 से 69 mg प्रति फ्लूइड औंस तक पहुंच सकती है। कैफीन की बहुत अधिक मात्रा ब्लड प्रेशर बढ़ा सकती है और कुछ लोगों में दिल की धड़कन असामान्य होने जैसी समस्याएं पैदा कर सकती है। इसलिए केवल कैफीन की कुल मात्रा ही नहीं, बल्कि उसका स्रोत भी महत्वपूर्ण है।

ज्यादा कॉफी हमेशा बेहतर नहीं

शोध में यह भी संकेत मिला है कि रोज़ाना चार कप से अधिक कॉफी कुछ लोगों में हार्ट फेलियर के जोखिम को बढ़ा सकती है। हालांकि, ऐसे निष्कर्षों की व्याख्या सावधानी से करनी चाहिए, क्योंकि कई अध्ययन अवलोकन-आधारित हैं। ऐसे अध्ययनों से यह निश्चित रूप से साबित नहीं किया जा सकता कि कॉफी ही किसी स्वास्थ्य परिणाम का प्रत्यक्ष कारण है। इसके अलावा, कॉफी में डाली जाने वाली चीनी, क्रीम, फ्लेवर्ड सिरप और अन्य कैलोरी वाले पदार्थ स्वास्थ्य पर अलग प्रभाव डाल सकते हैं।

कैफीन का असर व्यक्ति के अनुसार बदलता है

कैफीन शरीर पर अस्थायी रूप से ब्लड प्रेशर, हृदय गति, ब्लड शुगर और सतर्कता बढ़ाने जैसे प्रभाव डाल सकता है। कुछ लोगों को ज्यादा कैफीन लेने पर घबराहट, तेज़ धड़कन या नींद में परेशानी भी हो सकती है। कैफीन का प्रभाव उम्र, आनुवंशिक संरचना, मेटाबॉलिज़्म, दवाओं और नियमित रूप से कैफीन लेने की आदत जैसे कई कारकों पर निर्भर करता है। इसलिए 400 mg को अधिकतम सामान्य सीमा समझना चाहिए, न कि हर व्यक्ति के लिए रोज़ाना का लक्ष्य।

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एट्रियल फाइब्रिलेशन और PVCs पर क्या मिला?

रैंडमाइज़्ड क्लिनिकल ट्रायल्स से मिले कुछ प्रमाणों के अनुसार, कॉफी में मौजूद कैफीन एट्रियल फाइब्रिलेशन के जोखिम को बढ़ाने के बजाय कुछ परिस्थितियों में उसे कम कर सकता है। दूसरी ओर, कैफीन से प्रीमैच्योर वेंट्रिकुलर कॉन्ट्रैक्शन (PVCs) की संभावना बढ़ने की बात भी सामने आई है। इससे स्पष्ट होता है कि कैफीन का हृदय की विद्युत गतिविधि पर प्रभाव हर व्यक्ति में एक जैसा नहीं होता।

Written By: Geeta Sharma