Nepal Violence News: नेपाल के मधेश प्रांत के कई जिलों में सांप्रदायिक हिंसा ने गंभीर रूप ले लिया है। सुनसरी, सरलाही, धनुषा, जनकपुर सहित पांच जिलों में तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने कर्फ्यू लागू कर दिया है। हिंसा में अब तक तीन लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई अन्य घायल हुए हैं।

हालात को नियंत्रित करने के लिए सुरक्षा बलों की अतिरिक्त तैनाती की गई है। कर्फ्यू के चलते स्कूल-कॉलेज बंद कर दिए गए हैं। परीक्षाएं स्थगित कर दी गई हैं और कई इलाकों में बस एवं ट्रेन सेवाओं पर भी असर पड़ा है। सबसे अधिक तनाव भारत-नेपाल सीमा से सटे क्षेत्रों में देखने को मिल रहा है।

कैसे भड़की हिंसा?

स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार हिंसा की शुरुआत सुनसरी जिले के कप्तानगंज क्षेत्र से हुई। बताया जा रहा है कि कांवड़ यात्रा की तैयारियों के दौरान कुछ युवकों ने एक पोल पर पहले से लगे मुस्लिम समुदाय के झंडे को हटाकर वहां भगवा ध्वज लगा दिया। इसके बाद मंदिर के बाहर तेज आवाज में डीजे बजाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया।

क्या हुआ था? 

पुलिस के अनुसार कुछ मुस्लिम युवकों ने इस पर आपत्ति जताई। दोनों पक्षों के बीच पहले कहासुनी हुई, जो देखते ही देखते पथराव और हिंसक झड़प में बदल गई। देखते ही देखते आसपास के इलाकों में भी तनाव फैल गया और बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए।

पुलिस कार्रवाई और 3 लोगों की मौत

स्थिति नियंत्रण से बाहर होने पर पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए बल प्रयोग किया। गृह मंत्री सुदान गुरुंग के अनुसार हालात बिगड़ने पर पुलिस को गोली चलानी पड़ी। इस दौरान दो हिंदू युवकों की मौत हो गई। बाद में एक अन्य युवक गणेश यादव की भी पुलिस गोलीबारी में मौत होने की पुष्टि हुई।

मृतकों के परिजनों को 10-10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता

नेपाल सरकार ने मृतकों के परिजनों को 10-10 लाख नेपाली रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। साथ ही पूरे घटनाक्रम की जांच के निर्देश भी दिए गए हैं।

सरकार पर उठे सवाल

हिंसा फैलने के बाद सरकार की शुरुआती प्रतिक्रिया को लेकर सवाल उठ रहे हैं। विपक्षी दलों का आरोप है कि समय रहते प्रशासन प्रभावी कदम उठाने में विफल रहा, जिससे हिंसा कई जिलों तक फैल गई।

प्रधानमंत्री बालेन शाह ने बुलाई सर्वदलीय बैठक

बढ़ते तनाव को देखते हुए प्रधानमंत्री बालेन शाह ने सर्वदलीय बैठक बुलाई और गृह मंत्री सुदान गुरुंग को प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर हालात का जायजा लेने के निर्देश दिए। सरकार का कहना है कि दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

पिछले आठ वर्षों में कई बार भड़की हिंसा

नेपाल में सांप्रदायिक तनाव कोई नई घटना नहीं है। पिछले आठ वर्षों में हिंदू और मुस्लिम समुदायों के बीच कई बार हिंसक झड़पें हो चुकी हैं। इसी वर्ष जनवरी में वीरगंज में भी सांप्रदायिक तनाव के कारण लगभग एक सप्ताह तक कर्फ्यू लागू करना पड़ा था।

यह भी पढ़ें: मनुस्मृति पर ये क्या बोल गए खड़गे, राज्यसभा में मचा बवाल, जानिए क्या है पूरा मामला? 

इससे पहले वर्ष 2017 में कपिलवस्तु जिले में हुई हिंसा नेपाल की सबसे बड़ी सांप्रदायिक घटनाओं में गिनी जाती है। उस दौरान बड़ी संख्या में परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करना पड़ा था।

विशेषज्ञ क्या मानते हैं?

नेपाल में सांप्रदायिक तनाव के कारणों पर अलग-अलग विशेषज्ञों की अलग राय है। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि स्थानीय स्तर पर धार्मिक जुलूसों, प्रतीकों, अफवाहों और सोशल मीडिया पर फैलने वाली भड़काऊ सामग्री से विवाद तेजी से बढ़ जाते हैं। वहीं कुछ विशेषज्ञ नेपाल के राजनीतिक और सामाजिक बदलावों को भी इस तनाव से जोड़ते हैं।

2008 तक आधिकारिक रूप से नेपाल था हिंदू राष्ट्र!

नेपाल वर्ष 2008 तक आधिकारिक रूप से हिंदू राष्ट्र था, लेकिन बाद में नए संवैधानिक ढांचे के तहत उसे धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र घोषित किया गया। इसके बाद विभिन्न धार्मिक समुदायों के अधिकारों और सार्वजनिक धार्मिक अभिव्यक्ति में बदलाव आया। हालांकि, यह कहना कि हालिया हिंसा का एकमात्र कारण यही परिवर्तन है, उपलब्ध तथ्यों से सिद्ध नहीं होता। सामाजिक, राजनीतिक, स्थानीय विवाद, प्रशासनिक प्रतिक्रिया और अफवाहें जैसे कई कारक मिलकर ऐसी घटनाओं को प्रभावित कर सकते हैं।

प्रशासन की अपील

प्रशासन ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने की अपील की है। सुरक्षा एजेंसियां सोशल मीडिया पर फैलाए जा रहे भड़काऊ संदेशों की भी निगरानी कर रही हैं। फिलहाल प्रभावित जिलों में शांति बहाल करने के प्रयास जारी हैं और सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।

Written By: Geeta Sharma