गोरखपुर: सनातन परंपरा में गुरु-शिष्य संबंध को समर्पित गुरु पूर्णिमा का पर्व गोरक्षपीठ के लिए विशेष महत्व रखता है। इस वर्ष 29 जुलाई को गोरक्षपीठ की परंपरा के अनुसार गुरु पूर्णिमा महोत्सव का आयोजन होगा। इस अवसर पर गोरक्षपीठाधीश्वर एवं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शिष्य और गुरु, दोनों भूमिकाओं में नजर आएंगे। शिष्य के रूप में वह अपने ब्रह्मलीन गुरुदेव और नाथपंथ के गुरुजनों की पूजा-अर्चना करेंगे, जबकि गुरु के रूप में अपने शिष्यों और श्रद्धालुओं को आशीर्वाद देंगे।
गुरु पूर्णिमा पर शिष्य और गुरु, दोनों भूमिका में दिखेंगे सीएम योगी
गुरु पूर्णिमा का नाथपंथ से गहरा और अटूट संबंध माना जाता है। गोरखनाथ मंदिर में इस पर्व पर हर वर्ष भव्य धार्मिक आयोजन होते हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, मुख्यमंत्री पद की व्यस्तताओं के बावजूद, हर वर्ष गुरु पूर्णिमा पर गोरखनाथ मंदिर पहुंचकर गुरु परंपरा का निर्वहन करते हैं। इस बार भी वह 29 जुलाई को मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों में शामिल होंगे।
बुधवार के कार्यक्रम: गोरखनाथ मंदिर में गुरु पूर्णिमा महोत्सव
बुधवार सुबह 5 बजे से महायोगी गुरु गोरखनाथ को रोट अर्पित करने और विशेष पूजन का कार्यक्रम शुरू होगा। इसके बाद मंदिर परिसर स्थित सभी देव विग्रहों और समाधि स्थलों पर पूजा होगी। सुबह 6:30 बजे सामूहिक आरती आयोजित की जाएगी। प्रातः 9 बजे से श्रीराम कथा की पूर्णाहुति होगी। इसके बाद भजन, आशीर्वचन और दोपहर 12:30 बजे से सहभोज (भंडारा) का आयोजन किया जाएगा। पूजा के बाद योगी आदित्यनाथ अपने शिष्यों और श्रद्धालुओं से मिलकर उन्हें आशीर्वाद देंगे।
गोरक्षपीठ और गुरु पूर्णिमा का अटूट नाता
नाथपंथ में गुरु को ईश्वर के समान माना जाता है और गुरु-शिष्य परंपरा इसकी मूल आधारशिला है। गोरक्षपीठ ने सदियों से इस परंपरा को जीवंत बनाए रखा है। यही कारण है कि गुरु पूर्णिमा का पर्व गोरखनाथ मंदिर में विशेष श्रद्धा और भव्यता के साथ मनाया जाता है। इस दिन महायोगी गुरु गोरखनाथ और नाथ परंपरा के सभी गुरुजनों के प्रति श्रद्धा अर्पित की जाती है।
गुरु से प्राप्त लोक कल्याण की परंपरा को विस्तारित किया गोरक्षपीठाधीश्वरों ने
गोरक्षपीठ की गुरु परंपरा केवल आध्यात्मिक क्षेत्र तक सीमित नहीं रही, बल्कि शिक्षा, चिकित्सा और लोककल्याण के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान देती रही है। ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ महाराज ने शिक्षा के क्षेत्र में महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की स्थापना की। उनके बाद ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ महाराज ने शिक्षा, चिकित्सा और सेवा कार्यों को विस्तार दिया। वर्तमान गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने इस परंपरा को आगे बढ़ाते हुए शिक्षा, स्वास्थ्य और योग के क्षेत्र में अनेक संस्थानों के माध्यम से लोककल्याण के कार्यों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है।
Written By: M. Atharuddin Munne Bharti
Edited By : Archana Gupta