अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता सैन्य टकराव अब ऐसे मोड़ पर पहुंच गया है, जहां पूरी दुनिया की नजरें मध्य पूर्व की बदलती परिस्थितियों पर टिकी हुई हैं। दोनों देशों के बीच लगातार बढ़ रही आक्रामक गतिविधियों ने क्षेत्रीय सुरक्षा के साथ-साथ वैश्विक स्थिरता को लेकर भी नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। इसी बीच अमेरिका के पूर्व रक्षा मंत्री मार्क एस्पर ने मौजूदा रणनीति पर सवाल उठाते हुए कहा है कि केवल हवाई हमलों के बल पर ईरान जैसे देश के खिलाफ निर्णायक सफलता हासिल करना आसान नहीं होगा।

सिर्फ हवाई हमलों से ईरान को झुकाना संभव नहीं- मार्क एस्पर

मार्क एस्पर ने एक साक्षात्कार में कहा कि लगातार बमबारी किसी भी संघर्ष का स्थायी समाधान नहीं होती, उनके अनुसार यदि किसी देश की राजनीतिक सोच और रणनीतिक प्राथमिकताओं में बदलाव लाना है, तो केवल सैन्य शक्ति पर्याप्त नहीं होती, उन्होंने संकेत दिया कि कूटनीति, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और दीर्घकालिक राजनीतिक प्रयासों के बिना इस संकट का समाधान मुश्किल दिखाई देता है। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिकी प्रशासन ईरान के खिलाफ अपनी सैन्य कार्रवाई को और तेज करने के संकेत दे चुका है।

तेहरान में एयर डिफेंस अलर्ट

दूसरी ओर, ईरान की राजधानी तेहरान और उसके आसपास के इलाकों में वायु रक्षा प्रणाली को सक्रिय किए जाने की खबरें सामने आई हैं। इसके अलावा बोरूजर्द शहर के नजदीक विस्फोटों की सूचना भी मिली है। हालांकि इन घटनाओं के पीछे वास्तविक कारण क्या हैं, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी तक किसी भी पक्ष की ओर से नहीं की गई है। ऐसे में इन घटनाओं को लेकर विभिन्न तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। इसी दौरान सार्वजनिक फ्लाइट ट्रैकिंग प्लेटफॉर्म पर अमेरिकी सैन्य विमानों की गतिविधियां भी दर्ज की गईं। रिपोर्टों के अनुसार, क्षेत्र में KC-135 और KC-46A जैसे एयर-टैंकर विमान उड़ान भरते दिखाई दिए, जिनका उपयोग लड़ाकू विमानों को हवा में ईंधन उपलब्ध कराने के लिए किया जाता है। साथ ही E-3 AWACS निगरानी विमान की मौजूदगी भी दर्ज की गई, जो हवाई गतिविधियों पर नजर रखने और संभावित खतरों की समय रहते जानकारी देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

सार्वजनिक ट्रैकिंग से पूरी सैन्य गतिविधियों का नहीं मिलता पता

हालांकि रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि सार्वजनिक ट्रैकिंग वेबसाइटों पर दिखाई देने वाली जानकारी पूरी सैन्य गतिविधि का प्रतिनिधित्व नहीं करती। कई संवेदनशील सैन्य विमान और अभियान सुरक्षा कारणों से अपनी लोकेशन सार्वजनिक नहीं करते। इसलिए वास्तविक सैन्य तैयारियां और संचालन इससे कहीं अधिक व्यापक हो सकते हैं। अमेरिका का दावा है कि उसने ईरान के कई महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर उन्हें भारी नुकसान पहुंचाया है। वहीं ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए अमेरिकी सैन्य अड्डों और हितों पर हमले करने का दावा किया है। दोनों देशों की ओर से लगातार दिए जा रहे कड़े बयान इस बात का संकेत हैं कि तनाव अभी कम होने के बजाय और बढ़ सकता है।

लंबा खिंचा संघर्ष तो वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है बड़ा असर

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संघर्ष लंबा खिंचता है, तो इसका असर केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं रहेगा। मध्य पूर्व के कई अन्य देशों की सुरक्षा, वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, कच्चे तेल की कीमतों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी इसका व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। यही कारण है कि दुनिया के कई देश दोनों पक्षों से संयम बरतने और बातचीत के माध्यम से समाधान तलाशने की अपील कर रहे हैं।

कूटनीति विफल हुई तो बढ़ सकता है संकट

फिलहाल क्षेत्र की स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है। लगातार बदलते घटनाक्रमों के बीच यह स्पष्ट है कि आने वाले दिनों में अमेरिका और ईरान के संबंध किस दिशा में जाएंगे, इस पर पूरी दुनिया की नजर बनी रहेगी। यदि कूटनीतिक प्रयास सफल नहीं होते, तो यह टकराव और गंभीर रूप ले सकता है, जिसके दूरगामी परिणाम वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था दोनों पर देखने को मिल सकते हैं।

 

 

Written By Toshi Shah