आज के दौर में स्मार्टवॉच और फिटनेस बैंड सिर्फ समय देखने के उपकरण नहीं रह गए हैं, बल्कि ये हमारी हेल्थ मॉनिटरिंग का अहम हिस्सा बन चुके हैं। हार्ट रेट, नींद, कदमों की गिनती और कैलोरी ट्रैकिंग जैसी सुविधाओं के कारण करोड़ों लोग इन्हें रोजाना इस्तेमाल कर रहे हैं। हालांकि, इनके बढ़ते उपयोग के साथ एक सवाल भी लगातार चर्चा में है, क्या स्मार्टवॉच पहनने से कैंसर हो सकता है? इंटरनेट पर मौजूद अलग-अलग दावों और अधूरी जानकारी के कारण कई लोग इस विषय को लेकर भ्रमित हो जाते हैं। ऐसे में जरूरी है कि इस सवाल का जवाब वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर समझा जाए।

क्या स्मार्टवॉच से कैंसर होने का खतरा है?

स्मार्टवॉच और फिटनेस बैंड वायरलेस तकनीक पर काम करते हैं। ये आमतौर पर ब्लूटूथ और कभी-कभी वाई-फाई सिग्नल का उपयोग करके स्मार्टफोन से कनेक्ट रहते हैं। इन डिवाइसों से निकलने वाली रेडिएशन को नॉन-आयोनाइजिंग रेडिएशन कहा जाता है। इसका मतलब है कि इनमें इतनी ऊर्जा नहीं होती कि वे शरीर की कोशिकाओं या डीएनए को नुकसान पहुंचाकर कैंसर जैसी बीमारी पैदा कर सकें। विशेषज्ञों के मुताबिक, स्मार्टवॉच से निकलने वाला रेडियो सिग्नल मोबाइल फोन की तुलना में काफी कमजोर होता है और यह अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों के भीतर रहता है। अब तक ऐसी कोई वैज्ञानिक रिसर्च सामने नहीं आई है, जिसने यह साबित किया हो कि स्मार्टवॉच पहनने से सीधे कैंसर होता है।

रेडिएशन को लेकर क्यों होता है डर?

अक्सर लोग “रेडिएशन” शब्द सुनते ही उसे खतरनाक मान लेते हैं, लेकिन हर प्रकार की रेडिएशन नुकसानदायक नहीं होती। उदाहरण के लिए, एक्स-रे और गामा किरणें आयोनाइजिंग रेडिएशन होती हैं, जो शरीर को नुकसान पहुंचा सकती हैं। वहीं ब्लूटूथ और वाई-फाई जैसे सिग्नल कम ऊर्जा वाले होते हैं और इन्हें अब तक कैंसर से जोड़ने वाला कोई ठोस प्रमाण नहीं मिला है।

असली चिंता स्मार्टवॉच के स्ट्रैप को लेकर

हाल के वर्षों में कुछ रिसर्च में यह बात सामने आई है कि कई स्मार्टवॉच और फिटनेस बैंड के स्ट्रैप बनाने में *फ्लोरोइलास्टोमर* नामक सिंथेटिक रबर का इस्तेमाल होता है। इसमें PFAS (Per- and Polyfluoroalkyl Substances) जैसे केमिकल पाए जा सकते हैं। इन्हें “फॉरएवर केमिकल्स” भी कहा जाता है क्योंकि ये पर्यावरण में लंबे समय तक बने रहते हैं। कुछ अध्ययनों में PFAS के अत्यधिक और लंबे संपर्क को स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों से जोड़ा गया है। हालांकि, अभी तक ऐसा कोई स्पष्ट वैज्ञानिक प्रमाण मौजूद नहीं है जो यह साबित करे कि स्मार्टवॉच के स्ट्रैप कैंसर का सीधा कारण बनते हैं।

PFAS क्या होते हैं?

PFAS एक बड़ा केमिकल समूह है जिसका उपयोग कई रोजमर्रा के उत्पादों में किया जाता है। जैसे-

* नॉन-स्टिक बर्तन
* वाटरप्रूफ कपड़े
* फूड पैकेजिंग
* सिंथेटिक रबर उत्पाद
वैज्ञानिक अभी भी इन केमिकल्स के लंबे समय तक प्रभावों पर रिसर्च कर रहे हैं। इसलिए सतर्क रहना जरूरी है, लेकिन घबराने की आवश्यकता नहीं है।

स्मार्टवॉच से होने वाली आम समस्याएं

डॉक्टरों के अनुसार, स्मार्टवॉच से जुड़ी सबसे सामान्य परेशानियां कैंसर नहीं बल्कि त्वचा संबंधी होती हैं। इनमें शामिल हैं:

* त्वचा पर खुजली या लालपन
* स्ट्रैप की वजह से एलर्जी
* लंबे समय तक टाइट पहनने से रैश
* पसीने और घर्षण के कारण जलन
ये समस्याएं आमतौर पर गंभीर नहीं होतीं और स्ट्रैप बदलने या कुछ समय तक डिवाइस न पहनने से ठीक हो जाती हैं।

सुरक्षित तरीके से कैसे करें इस्तेमाल?

अगर आप स्मार्टवॉच का उपयोग करते हैं, तो कुछ आसान सावधानियां अपनाना बेहतर रहेगा:

* बहुत टाइट स्ट्रैप न पहनें
* समय-समय पर कलाई को साफ रखें
* पसीना आने पर स्ट्रैप को साफ करें
* स्किन एलर्जी होने पर हाइपोएलर्जेनिक स्ट्रैप चुनें
* जरूरत न होने पर लगातार 24 घंटे पहनने से बचें

Written By Toshi Sha