जमाअत-ए-इस्लामी हिंद (JIH) ने रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी की 38 इमारतों को ध्वस्त करने के आदेश पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है। संगठन के एक प्रतिनिधिमंडल ने यूनिवर्सिटी का दौरा कर प्रशासन, फैकल्टी और छात्रों से मुलाकात की तथा जिला मजिस्ट्रेट के माध्यम से उत्तर प्रदेश के राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपकर मामले में हस्तक्षेप की अपील की। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि प्रस्तावित विध्वंस से करीब 3,000 छात्रों का भविष्य प्रभावित होगा। संगठन का कहना है कि यूनिवर्सिटी में आर्थिक और सामाजिक रूप से पिछड़े वर्गों के बड़ी संख्या में छात्र पढ़ते हैं, जिन्हें फीस में भी रियायत दी जाती है। ऐसे में परिसर की अधिकांश इमारतों को गिराने से संस्थान का अस्तित्व ही संकट में पड़ जाएगा।
प्रतिनिधिमंडल में शामिल रहे ये लोग
जमाअत-ए-इस्लामी हिंद के प्रतिनिधिमंडल में राष्ट्रीय सचिव मौलाना मोहम्मद शफी मदनी और मोहम्मद अहमद, सहायक सचिव इनाम-उर-रहमान, यूपी पश्चिम के अध्यक्ष ज़मीर हसन फलाही, रामपुर इकाई के अध्यक्ष मौलाना अब्दुस्सलाम बस्तवी तथा वरिष्ठ पत्रकार सैयद खलीक अहमद शामिल थे। प्रतिनिधिमंडल ने यूनिवर्सिटी प्रशासन, स्थानीय समुदाय के नेताओं और आज़म खान के परिवार के सदस्यों से भी मुलाकात की और मौजूदा स्थिति पर चर्चा की।
जमाअत की तीन प्रमुख मांगें
विध्वंस पर तत्काल रोक
संगठन ने रामपुर डेवलपमेंट अथॉरिटी (RDA) द्वारा यूनिवर्सिटी की 38 इमारतों को ध्वस्त करने के आदेश पर तुरंत रोक लगाने की मांग की। जमाअत का कहना है कि 30 जुलाई 2026 की तय समय-सीमा से पहले किसी भी प्रकार की तोड़फोड़ छात्रों के साथ गंभीर अन्याय होगी।
राज्यपाल का हस्तक्षेप
जिला मजिस्ट्रेट के माध्यम से राज्यपाल को दिए गए ज्ञापन में छात्रों के शैक्षिक अधिकारों की रक्षा और संस्थान के संवैधानिक स्वरूप को बनाए रखने के लिए तत्काल हस्तक्षेप की मांग की गई।
न्यायिक प्रक्रिया अपनाने की मांग
जमाअत ने अधिकारियों से आग्रह किया कि विवाद को सक्षम न्यायालय के समक्ष रखा जाए, ताकि विध्वंस आदेश की वैधता और अधिकार-क्षेत्र से जुड़े सभी मुद्दों पर न्यायिक प्रक्रिया के तहत फैसला हो सके।
'शिक्षा के अधिकार का मामला'
प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि यह केवल इमारतों का नहीं, बल्कि शिक्षा के अधिकार और हजारों छात्रों के भविष्य का मुद्दा है। संगठन के अनुसार, यूनिवर्सिटी शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है और इसके ढांचे को नुकसान पहुंचाने से छात्रों की पढ़ाई पर गंभीर असर पड़ेगा। जमाअत-ए-इस्लामी हिंद ने सरकार से अपील की कि विध्वंस की कार्रवाई के बजाय नियमितीकरण (रेगुलराइजेशन) जैसे व्यावहारिक विकल्पों पर विचार किया जाए, ताकि किसी भी प्रशासनिक कार्रवाई के कारण छात्रों की शिक्षा प्रभावित न हो।
Written By: M. Atharuddin Munne Bharti
Edited By : Toshi Shah