20 जुलाई से संसद का मॉनसून सत्र शुरू होने जा रहा है। इस सत्र में केंद्र सरकार कई महत्वपूर्ण विधेयक पेश कर सकती है। जिनमें महिला आरक्षण से जुड़े प्रावधानों को लागू करने की दिशा में कदम और परिसीमन से संबंधित विधेयक प्रमुख माने जा रहे हैं। इसी बीच राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई है कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी यानी NCP-SP इन महत्वपूर्ण विधेयकों पर सरकार का समर्थन कर सकती है।
NDA में शामिल होने का कोई फैसला नहीं
सूत्रों के मुताबिक, पार्टी ने फिलहाल NDA में शामिल होने का कोई निर्णय नहीं लिया है। लेकिन मुद्दों के आधार पर सरकार का समर्थन करने की रणनीति अपनाई जा सकती है। माना जा रहा है कि यह कदम पार्टी के भीतर संभावित असंतोष और टूट की आशंकाओं को ध्यान में रखते हुए उठाया जा सकता है।
परिसीमन विधेयक पर क्या है NCP-SP का रुख?
सूत्रों के अनुसार, यदि प्रस्तावित परिसीमन संशोधन विधेयक में लोकसभा सीटों की संख्या में लगभग 50 प्रतिशत वृद्धि का प्रावधान शामिल होता है, तो NCP-SP इस विधेयक के समर्थन में मतदान कर सकती है। बताया जा रहा है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई एक सर्वदलीय बैठक में इस विषय पर प्रारंभिक चर्चा हुई थी।
जानकारी के मुताबिक, इस बैठक में केवल NCP-SP ही नहीं, बल्कि शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे), कांग्रेस और डीएमके ने भी सीटों की संख्या बढ़ाने के प्रस्ताव पर सकारात्मक रुख दिखाया था। हालांकि, सरकार की ओर से अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
पार्टी में टूट की अटकलों के बीच नई रणनीति
महाराष्ट्र की राजनीति में हाल के घटनाक्रमों के बाद NCP-SP के भीतर भी असंतोष की चर्चाएं लगातार सामने आ रही हैं। हाल ही में शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के कुछ सांसदों के पाला बदलने के बाद अब शरद पवार की पार्टी को लेकर भी ऐसी अटकलें लगाई जा रही हैं कि कुछ नेता सत्ता पक्ष के साथ जा सकते हैं। ऐसे माहौल में महत्वपूर्ण विधेयकों पर सरकार का समर्थन करना पार्टी नेतृत्व के लिए एक संतुलित रणनीति हो सकती है। इससे पार्टी औपचारिक रूप से विपक्ष में भी बनी रहेगी और आंतरिक मतभेदों को नियंत्रित करने की कोशिश भी कर सकेगी।
शरद पवार की पार्टी में पहले भी हो चुकी है बड़ी टूट
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के इतिहास में सबसे बड़ा राजनीतिक झटका जुलाई 2023 में लगा था, जब शरद पवार के भतीजे अजित पवार ने बगावत कर दी थी। उनके साथ बड़ी संख्या में विधायक चले गए और बाद में वे महाराष्ट्र की सरकार में शामिल हो गए। इसके बाद चुनाव आयोग ने अजित पवार गुट को ही मूल NCP का दर्जा देते हुए पार्टी का नाम और चुनाव चिह्न 'घड़ी' आवंटित कर दिया।
इसके बाद शरद पवार के नेतृत्व वाले गुट ने 'राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी-शरदचंद्र पवार' (NCP-SP) के नाम से नई राजनीतिक पहचान बनाई और नया चुनाव चिह्न अपनाया। इससे पहले वर्ष 2019 में भी अजित पवार ने देवेंद्र फडणवीस के साथ उपमुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर राजनीतिक हलचल मचा दी थी। हालांकि, उस समय शरद पवार ने कुछ ही दिनों में स्थिति संभाल ली थी और पार्टी को टूटने से बचा लिया था।
राजनीतिक समीकरणों पर रहेगी नजर
मॉनसून सत्र के दौरान यदि परिसीमन और अन्य अहम विधेयक संसद में पेश होते हैं, तो विपक्षी दलों का रुख देश की राजनीति के लिए महत्वपूर्ण होगा। ऐसे में NCP-SP का अंतिम फैसला केवल महाराष्ट्र ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति के समीकरणों पर भी असर डाल सकता है। फिलहाल सरकार या NCP-SP की ओर से इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, इसलिए मॉनसून सत्र के दौरान होने वाले घटनाक्रमों पर सभी की नजर बनी रहेगी।
Written By: Geeta Sharma