बिहार की चर्चित बांकीपुर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव की मतगणना सोमवार सुबह 8 बजे से शुरू हो गई। शुरुआती रुझानों में जन सुराज के उम्मीदवार प्रशांत किशोर बढ़त बनाते हुए नजर आ रहे हैं। बांकीपुर सीट को लंबे समय से बीजेपी का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है,लेकिन इस बार शुरुआती आंकड़ों ने राजनीतिक समीकरण बदलने के संकेत दिए हैं।

मतगणना के शुरुआती दौर में बीजेपी उम्मीदवार नीरज कुमार सिन्हा पीछे दिखाई दे रहे हैं,जबकि जन सुराज के प्रशांत किशोर ने बढ़त बनाकर सभी को चौंका दिया है। चुनाव से पहले इस सीट पर बीजेपी,(आरजेडी) के बीच त्रिकोणीय मुकाबले की चर्चा थी,लेकिन शुरुआती रुझानों ने मुकाबले की तस्वीर को अलग दिशा दे दी है। हालांकि अंतिम परिणाम आने तक कई दौर की गिनती बाकी है और शुरुआती बढ़त में बदलाव संभव है। इसके बावजूद जन सुराज का प्रदर्शन राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है।

काउंटिंग सेंटर पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम

मतगणना को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को बेहद मजबूत किया है। काउंटिंग सेंटर के अंदर और बाहर बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है। केंद्र में प्रवेश करने वाले हर व्यक्ति की जांच की जा रही है और सुरक्षा नियमों का सख्ती से पालन कराया जा रहा है।

इस बीच प्रशांत किशोर ने चुनाव प्रक्रिया को लेकर बिहार पुलिस पर सवाल उठाए हैं और चुनाव में गड़बड़ी के आरोप लगाए हैं। वहीं बीजेपी नेताओं का दावा है कि पार्टी बांकीपुर सीट पर अपनी जीत को लेकर आश्वस्त है और अंतिम नतीजे उनके पक्ष में आएंगे।

दतिया विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार को बढ़त

मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव की मतगणना भी जारी है। शुरुआती नौ राउंड की गिनती के बाद कांग्रेस उम्मीदवार घनश्याम सिंह ने मजबूत बढ़त बना ली है। वह लगभग 11 हजार वोटों से आगे चल रहे हैं।

वहीं बीजेपी उम्मीदवार आशुतोष तिवारी ने शुरुआती दौर में बढ़त बनाई थी, लेकिन बाद के राउंड में वह पीछे हो गए। हालांकि यह उपचुनाव राज्य की सरकार के बहुमत पर कोई सीधा असर नहीं डालेगा, लेकिन राजनीतिक दृष्टि से इसका महत्व काफी ज्यादा है।

बीजेपी के लिए दतिया में हार चिंता का विषय बन सकती है, क्योंकि यह इलाका लंबे समय से पार्टी के प्रभाव वाले क्षेत्रों में गिना जाता रहा है। दूसरी ओर कांग्रेस इस जीत को संगठन के लिए मजबूती के संकेत के रूप में देख सकती है।

कांग्रेस के अंदरूनी विवाद का भी दिखा असर

दतिया उपचुनाव से पहले कांग्रेस में अंदरूनी विवाद खुलकर सामने आया था। पूर्व विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता खत्म होने के बाद पार्टी ने घनश्याम सिंह को उम्मीदवार बनाया। भारती ने घनश्याम सिंह पर बीजेपी के साथ मिलकर चुनाव लड़ने के आरोप लगाए थे।

उन्होंने यह भी कहा था कि 2028 के विधानसभा चुनाव में वह अपनी राजनीतिक ताकत दिखाएंगे। इस विवाद के बावजूद कांग्रेस उम्मीदवार ने शुरुआती मतगणना में बढ़त बनाकर पार्टी को राहत दी है।

2028 विधानसभा चुनाव से पहले उपचुनावों के संकेत

मध्य प्रदेश में पिछला विधानसभा चुनाव 2023 में हुआ था, जिसमें बीजेपी ने शानदार जीत हासिल कर सरकार बनाई थी। इसके बाद लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहे शिवराज सिंह चौहान की जगह मोहन यादव को मुख्यमंत्री बनाया गया।

अब 2028 के विधानसभा चुनाव में मोहन यादव सरकार की बड़ी परीक्षा होगी। वहीं कांग्रेस राज्य में दोबारा सत्ता में वापसी की कोशिश कर रही है। ऐसे में दतिया उपचुनाव का परिणाम दोनों दलों के लिए राजनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

दतिया में क्यों हुआ उपचुनाव?

2023 के विधानसभा चुनाव में दतिया सीट से कांग्रेस के राजेंद्र भारती ने जीत दर्ज की थी। उन्होंने बीजेपी के दिग्गज नेता और पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा को हराया था। बाद में एक पुराने मामले में सजा होने के कारण उनकी विधानसभा सदस्यता रद्द हो गई, जिसके बाद इस सीट पर उपचुनाव कराना पड़ा।

राजेंद्र भारती चुनाव लड़ने के योग्य नहीं थे। वहीं बीजेपी ने भी इस बार नरोत्तम मिश्रा को टिकट नहीं दिया और नए चेहरे आशुतोष तिवारी को मैदान में उतारा। कांग्रेस ने घनश्याम सिंह पर भरोसा जताया, जो पहले भी विधायक रह चुके हैं। 

दोनों सीटों की मतगणना पर अब सभी की नजरें टिकी हुई हैं। अंतिम परिणाम आने के बाद ही साफ होगा कि शुरुआती रुझान कितने सही साबित होते हैं और किस दल को राजनीतिक बढ़त मिलती है।

Written By: Geeta Sharma