Jaggi Murder Case: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने 6 अप्रैल को जग्गी हत्याकांड में फैसला सुनाया है। कोर्ट ने राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत अजित जोगी के बेटे और जनता कांग्रेस के नेता अमित जोगी को उम्र कैद की सजा सुनाई है। साथ ही कोर्ट ने उन्हें 7 दिन के भीतर सरेंडर करने के निर्देश दिए हैं। वहीं अब इस मामले में अमित जोगी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई है। बताया जा रहा कि मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायाधीश अरविंद कुमार वर्मा की बेंच ने यह फैसला सुनाया है। गौरतलब है कि 4 जून 2003 को NCP नेता रामावतार जग्गी की हत्या हुई थी, जिसने उस समय प्रदेश की राजनीति में भूचाल ला दिया था।
हाईकोर्ट ने अमित जोगी को दोषी करार कर दिया
जानकारी के अनुसार हाईकोर्ट ने अपने फैसले में अमित जोगी को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या) और 120-बी (आपराधिक साजिश) के तहत दोषी करार दिया है। साथ ही कोर्ट ने उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई है, और 1,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया है। इतनी ही नहीं जुर्माना नहीं चुकाने की स्थिति में 6 महीने की सश्रम कारावास की सजा भी दी गई है।
2007 के ट्रायल कोर्ट के निर्णय को हाईकोर्ट ने पलटा
हाईकोर्ट के अमित जोगी को जग्गी हत्याकांड में दोषी करार देना का फैसला 31 मई 2007 को आए ट्रायल कोर्ट के निर्णय को पूरी तरह उलट देता है। जब रायपुर की विशेष अदालत ने सबूतों के अभाव में अमित जोगी को बरी कर दिया था। अन्य 28 आरोपियों को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई गई थी। हालांकि इस फैसले को चुनौती देते हुए CBI ने उच्च न्यायालय में अपील दायर की थी।
जानें क्या था पूरा मामला?
बताया जाता है कि 4 जून 2003 को रामावतार जग्गी की रायपुर में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। वह नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी के सक्रिय नेता और प्रदेश कोषाध्यक्ष थे। इस मामले में कुल 31 लोगों को आरोपी बनाया गया था। इनमें से 2 बल्टू पाठक और सुरेंद्र सिंह,सरकारी गवाह बन गए थे। ट्रायल कोर्ट ने 28 आरोपियों को दोषी ठहराया, लेकिन अमित जोगी को सबूतों के अभाव में छोड़ दिया गया था। जिसके बाद जग्गी के पुत्र सतीश जग्गी ने इस फैसले के खिलाफ उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था।
इस फैसले का महत्व
वहीं हाईकोर्ट का यह फैसला न केवल एक लंबे समय से लंबित मामले में न्यायिक निष्कर्ष तक पहुंचने का प्रतीक है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि न्यायिक प्रक्रिया में देर भले हो, लेकिन सबूतों के आधार पर अंतिम निर्णय संभव है। इस फैसले के बाद प्रदेश की सियासी हलचल तेज हो गई है और मामले को लेकर व्यापक चर्चा जारी है।
Writen By: Geeta Sharma