28 फरवरी 2026 को ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों के साथ शुरू हुआ युद्ध अब एक महीने पार कर चुका है। शुरुआत में जहां अमेरिका के डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल के बेंजामिन नेतन्याहू के सुर बेहद आक्रामक थे, वहीं अब उनकी रणनीति में बदलाव साफ दिख रहा है। ट्रंप अब लगातार बातचीत की बात कर रहे हैं, लेकिन ईरान हर बार इस पहल को खारिज कर देता है।

ट्रंप और नेतन्याहू अब अकेले पड़ते दिख रहे हैं
शुरुआती दिनों में कई देशों ने अमेरिका-इजरायल का समर्थन किया था, लेकिन अब यूरोपीय और खाड़ी देश सीधे हाथ नहीं बढ़ा रहे। फ्रांस, जर्मनी जैसे देशों ने तनाव कम करने और बातचीत पर जोर दिया, जबकि खाड़ी के देशों ने सीमित सहयोग दिया। इसका मतलब है कि अमेरिका-इजरायल अब हर मोर्चे पर अकेले नहीं तो कम से कम आधे अकेले पड़ते दिख रहे हैं।

अमेरिका में बढ़ रहा विरोध
ट्रंप के लिए अमेरिका में हालात आसान नहीं रहे। न्यूयॉर्क, वॉशिंगटन डीसी और लॉस एंजेलिस में लोग सड़कों पर उतरे और “नो वॉर” के नारे लगाए। सिर्फ प्रदर्शन ही नहीं, विपक्षी नेता और कांग्रेस ने भी ट्रंप की युद्ध नीति पर सवाल उठाए। साफ है, जनता और राजनीतिक विरोध के बीच ट्रंप अब अकेले महसूस कर रहे हैं।

इजरायल में भी बढ़ी नाराजगी
इजरायल में सरकार युद्ध को सुरक्षा के लिए जरूरी बता रही है, लेकिन जनता एंटी-वॉर प्रदर्शन कर रही है। तेल अवीव, हाइफा और यरुशलम में लोग सड़कों पर आए और युद्ध खत्म करने की मांग की। पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया।

वैश्विक परिदृश्य बदल रहा है युद्ध
अब यह युद्ध सिर्फ ईरान और अमेरिका-इजरायल तक ही नहीं है। यूरोप ने दूरी बनाई, खाड़ी के देश संतुलन बनाए हुए हैं, और चीन-रूस भी सीधे हाथ नहीं बढ़ा रहे। साफ दिख रहा है कि पुराने जैसे मजबूत गठबंधन अब नहीं रहे। दुनिया तेजी से मल्टीपोलर हो रही है, और हर देश अपने फायदे के हिसाब से कदम उठा रहा है।

युद्ध को लेकर ट्रंप और नेतन्याहू का नया प्लान
एक महीने के बाद यह साफ दिख रहा है कि ट्रंप और नेतन्याहू पहले जैसी पूरी ताकत के साथ अब अकेले पड़ते जा रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय समर्थन कमजोर हुआ है, घरेलू विरोध बढ़ा है, और युद्ध लंबा खिंचता दिख रहा है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि आगे उनका अगला कदम क्या होगा।

Written by: Anushka sagar