महाराष्ट्र की राजनीति में इन दिनों नई चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया है। चर्चा इस बात को लेकर है कि उद्धव ठाकरे ( Uddhav Thackeray) के नेतृत्व वाली Shiv Sena (UBT) के कई सांसद पार्टी छोड़कर एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) के गुट का रुख कर सकते हैं। बताया जा रहा है कि पार्टी के कुल नौ लोकसभा सांसदों में से छह के रुख को लेकर राजनीतिक गलियारों में अटकलें चल रही हैं। विपक्षी दल इस संभावित घटनाक्रम को लेकर भाजपा-समर्थित महायुति सरकार पर निशाना साध रहे हैं और कथित तौर पर दल-बदल की राजनीति पर सवाल उठा रहे हैं।

महुआ मोइत्रा का तंज

इस मुद्दे पर महुआ मोइत्रा (Mahua Moitra) ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर टिप्पणी करते हुए व्यंग्यात्मक अंदाज में सवाल उठाया, उन्होंने कहा कि यदि सांसद वास्तव में इतनी कम रकम पर पार्टी बदलने को तैयार हैं तो यह आश्चर्यजनक है। अपने पोस्ट में उन्होंने तृणमूल कांग्रेस के संदर्भ का उल्लेख करते हुए कटाक्ष किया कि उनके दल के नेताओं को कथित तौर पर कहीं अधिक आर्थिक प्रस्ताव मिले थे।

संजय राउत का पलटवार

महुआ मोइत्रा की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए संजय राउत (Sanjay Raut) ने भी सोशल मीडिया के जरिए जवाब दिया, उन्होंने व्यंग्यात्मक शैली में दावा किया कि सांसदों को पार्टी बदलने के लिए 15 करोड़ रुपये नहीं बल्कि 50 करोड़ रुपये तक का प्रस्ताव दिया जा रहा है। राउत ने यह भी कहा कि 15 करोड़ रुपये केवल अग्रिम भुगतान के रूप में बताए जा रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने संभावित बागी सांसदों पर निशाना साधते हुए कहा कि उनकी राजनीतिक पहचान और मूल्य मुख्य रूप से पार्टी के नाम और संगठन की वजह से बने हैं। उनके अनुसार, पार्टी के समर्थन और ब्रांड वैल्यू के बिना उनकी राजनीतिक हैसियत बहुत सीमित रह जाएगी।

पहले भी लगाए गए थे आरोप

इससे पहले भी संजय राउत ने सोशल मीडिया पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) को टैग करते हुए आरोप लगाया था कि कुछ सांसदों को राजनीतिक पाला बदलने के लिए भारी आर्थिक प्रलोभन दिए जा रहे हैं। हालांकि इन आरोपों के समर्थन में कोई सार्वजनिक प्रमाण सामने नहीं आया है।

बगावत की अटकलों को मिला बल

राजनीतिक चर्चाओं को तब और हवा मिली जब सत्तारूढ़ Shiv Sena के नेता Pratap Sarnaik ने संकेत दिया कि यदि विपक्षी खेमे के सांसद उनकी पार्टी में शामिल होना चाहें तो उनका स्वागत किया जाएगा, उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे नेताओं को संगठन में उचित महत्व दिया जाएगा। इसके बाद से शिवसेना (यूबीटी) के भीतर संभावित असंतोष और टूट की चर्चाएं और तेज हो गई हैं।

फिलहाल स्थिति क्या है?

अब तक किसी सांसद ने सार्वजनिक रूप से पार्टी छोड़ने की घोषणा नहीं की है। इसलिए ये सभी दावे और चर्चाएं राजनीतिक अटकलों तथा नेताओं के बयानों पर आधारित हैं। आने वाले दिनों में सांसदों के रुख से ही स्पष्ट होगा कि ये अटकलें वास्तविक राजनीतिक बदलाव में बदलती हैं या नहीं।

 

 

Written By Toshi Shah