पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद प्रशासनिक स्तर पर कई कार्रवाइयों का सिलसिला जारी है। इसी कड़ी में दक्षिण 24 परगना जिले के अमतला क्षेत्र में टीएमसी के सांसद अभिषेक बनर्जी के कार्यालय पर अतिक्रमण विरोधी अभियान चलाया गया। प्रशासन ने भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच कथित अवैध निर्माण को हटाने की प्रक्रिया शुरू की। कार्रवाई के दौरान बुलडोजर का इस्तेमाल किया गया और पूरे परिसर को पुलिस बल ने अपने घेरे में रखा।
बड़ी संख्या में पुलिस बल की तैनाती
अभियान के दौरान डायमंड हार्बर पुलिस जिले के बड़ी संख्या में जवानों को मौके पर तैनात किया गया। किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना से बचने के लिए कार्यालय परिसर और आसपास के इलाके में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए। पुलिस ने आम लोगों की आवाजाही पर भी नजर रखी, जबकि प्रशासनिक अधिकारी पूरे अभियान की निगरानी करते रहे।
नोटिस के बावजूद नहीं पहुंचा कोई प्रतिनिधि
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद से यह कार्यालय बंद पड़ा था। अधिकारियों का कहना है कि कथित अवैध निर्माण को लेकर दक्षिण 24 परगना जिला प्रशासन ने पहले ही संबंधित पक्ष को नोटिस जारी किया था। नोटिस में निर्धारित समय के भीतर जिला परिषद के समक्ष अपना पक्ष रखने के लिए कहा गया था, लेकिन तय अवधि में कोई प्रतिनिधि उपस्थित नहीं हुआ। इसके बाद प्रशासन ने नियमानुसार बेदखली और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी।
बुलडोजर कार्रवाई देखने उमड़ी लोगों की भीड़
कार्रवाई की खबर फैलते ही आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग मौके पर पहुंच गए। बुलडोजर अभियान देखने के लिए लोगों की भीड़ जमा हो गई। भीड़ को नियंत्रित करने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस लगातार निगरानी करती रही। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि पूरी कार्रवाई सरकारी नियमों और कानूनी प्रक्रिया के तहत की जा रही है।
पहले भी लगाए थे उत्पीड़न के आरोप
इस घटनाक्रम से पहले, 3 जुलाई को अभिषेक बनर्जी ने दावा किया था कि उनके कार्यालय से जुड़े कई लोगों को पश्चिम बंगाल पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) और क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट (CID) द्वारा डराया-धमकाया गया। उन्होंने आरोप लगाया था कि यह कार्रवाई राजनीतिक कारणों से प्रेरित थी और उनके सहयोगियों को बिना उचित नोटिस के पूछताछ के लिए बुलाया गया या हिरासत में लिया गया।
राजनीतिक माहौल में बढ़ी हलचल
अमतला स्थित कार्यालय पर हुई इस कार्रवाई ने राज्य की राजनीति में नई बहस को जन्म दे दिया है। एक ओर प्रशासन इसे अतिक्रमण हटाने की नियमित कानूनी प्रक्रिया बता रहा है। वहीं दूसरी ओर तृणमूल कांग्रेस इस पूरे घटनाक्रम को राजनीतिक प्रतिशोध से जोड़कर देख रही है। आने वाले दिनों में इस मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी और कानूनी प्रक्रिया दोनों तेज होने की संभावना है। फिलहाल प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि कानून के दायरे में रहकर आगे की कार्रवाई जारी रहेगी।
Written By: Geeta Sharma