Bankipur Bypoll 2026: बिहार में चुनाव हो और बिना बेसन के बूंदी छन जाए,ऐसा तो लालू राज में भी नहीं हुआ तो भला अब कैसे मुमकिन है। जी हां,बिहार में इस बार चुनाव का अखाड़ा बना है,बांकीपुर की हाई-प्रोफाइल विधानसभा सीट। जहां उपचुनाव होने जा रहे हैं। चुनाव आयोग ने इलेक्शन की तारीखों का ऐलान क्या किया, सियासी गलियारों में आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। बांकीपुर की सीट वैसे तो सालों से बीजेपी के कब्जे में रही है। जहां सेंध मारना विपक्ष के लिए नामुमकिन सा है, या यूं कहें लोहे के चने चबाने जैसा है, लेकिन इस बार इस गद्दी पर ग्रहण लगता साफ दिखाई पड़ रहा है। आइए जानते है विस्तार से।

नीरज सिन्हा के बायोडाटा पर आरजेडी का हमला

आरजेडी ने बीजेपी उम्मीदवार नीरज सिन्हा के बायोडाटा को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। आरजेडी प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने दावा किया कि बीजेपी द्वारा जारी बायोडाटा में नीरज सिन्हा का जन्म वर्ष 1994 बताया गया है। वहीं, उसी विवरण में यह भी उल्लेख है कि उन्होंने वर्ष 2006 में बीजेपी की सदस्यता ग्रहण की थी। मृत्युंजय तिवारी ने इस पर तंज कसते हुए कहा कि यदि बायोडाटा सही है तो नीरज सिन्हा मात्र 12 वर्ष की आयु में बीजेपी के सदस्य बन गए थे। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या यह जानकारी सही है या फिर उम्मीदवार का बायोडाटा तैयार करने में गंभीर लापरवाही की गई है। आरजेडी ने बीजेपी से इस मामले में सार्वजनिक स्पष्टीकरण देने की मांग की है।

'मतदान से पहले ही हार गई बीजेपी': मृत्युंजय तिवारी

आरजेडी नेता मृत्युंजय तिवारी ने दावा किया कि बांकीपुर उपचुनाव में बीजेपी पहले ही राजनीतिक रूप से कमजोर पड़ चुकी है। उन्होंने कहा कि पार्टी का पहला उम्मीदवार नामांकन दाखिल करने के बाद ही चुनाव मैदान से हट गया, जो अपने आप में असामान्य घटना है। उनका आरोप था कि बीजेपी के भीतर आंतरिक खींचतान इतनी बढ़ गई है कि पार्टी को मजबूत उम्मीदवार तक नहीं मिल पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि अब दूसरे उम्मीदवार को लेकर भी विवाद सामने आ गया है, जिससे बीजेपी की स्थिति और कमजोर दिखाई दे रही है। मृत्युंजय तिवारी ने यह भी दावा किया कि आगामी मतदान में जनता बीजेपी को करारा जवाब देगी और बांकीपुर सीट पर पार्टी का किला ढह जाएगा। हालांकि, बीजेपी ने इन आरोपों पर अभी तक कोई विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं दी है।

पहले उम्मीदवार अभिषेक बंटी ने वापस लिया था नामांकन

बांकीपुर उपचुनाव में बीजेपी ने सबसे पहले अभिषेक कुमार उर्फ अभिषेक बंटी को उम्मीदवार बनाया था। उन्होंने नामांकन भी दाखिल कर दिया था, लेकिन बाद में अचानक अपना नाम वापस ले लिया। अभिषेक बंटी ने अपने फैसले के पीछे निजी और पारिवारिक कारणों का हवाला दिया। उन्होंने बताया कि इस संबंध में उन्होंने बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी को पत्र भी सौंप दिया है। हालांकि, उनके अचानक चुनाव से हटने के बाद राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई थीं। विपक्ष ने इसे बीजेपी की अंदरूनी राजनीति से जोड़कर देखा, जबकि पार्टी ने इसे व्यक्तिगत निर्णय बताया।

अब नीरज सिन्हा के भरोसे बीजेपी

पहले उम्मीदवार के हटने के बाद बीजेपी ने नीरज सिन्हा को मैदान में उतारा है। पार्टी नेतृत्व को उम्मीद है कि नीरज सिन्हा बांकीपुर जैसी महत्वपूर्ण सीट पर संगठन और सरकार की उपलब्धियों के आधार पर चुनाव जीतने में सफल होंगे। दूसरी ओर, विपक्ष लगातार उनके चयन और बायोडाटा को लेकर सवाल उठाकर बीजेपी को घेरने की कोशिश कर रहा है। कुलमिलाकर इस सीट पर चुनाव केवल स्थानीय मुद्दों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह राज्य की राजनीतिक दिशा और प्रमुख दलों की संगठनात्मक ताकत का भी परीक्षण होगा। ऐसे में दोनों पक्षों के बीच बयानबाजी और चुनावी रणनीतियां आने वाले दिनों में और तेज होने की संभावना है।

प्रतिष्ठा की जंग बना बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव

बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव अब केवल एक सीट का चुनाव नहीं रह गया है, बल्कि यह सत्तारूढ़ बीजेपी और मुख्य विपक्षी दल आरजेडी के बीच प्रतिष्ठा की लड़ाई बन चुका है। उम्मीदवारों को लेकर उठ रहे सवाल, दलों के बीच तीखे आरोप-प्रत्यारोप और लगातार बदलते राजनीतिक समीकरणों ने इस मुकाबले को बेहद दिलचस्प बना दिया है।

Written By: Geeta Sharma