Anti-Paper Leak Bill 2026: NEET-UG 2026 पेपर लीक विवाद के बाद देशभर में हुए 36 दिनों के छात्र आंदोलनों के बीच मोदी सरकार 'लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026' को पास कराने के लिए पूरी ताकत से आगे बढ़ रही है। बता दें कि बुधवार को लोकसभा में विपक्ष के भारी हंगामे के बीच ध्वनि मत से पारित होने के बाद, सरकार आज (गुरुवार) इसे राज्यसभा में पेश करने जा रही है।
सार्वजनिक परीक्षाओं की पवित्रता बनाए रखने और धांधली में शामिल सिंडिकेट पर नकेल कसने के उद्देश्य से लाए गए इस कड़े कानून पर आज पूरे देश की निगाहें टिकी हैं।
राज्यसभा में क्या है नंबर गेम? क्या आसानी से पास होगा बिल?
विपक्ष भले ही इस बिल पर कड़ा विरोध दर्ज करा रहा हो, लेकिन राज्यसभा में आंकड़ों का गणित पूरी तरह से सरकार के पक्ष में नजर आ रहा है।
कुल सदस्य संख्या: 245 (वर्तमान में सक्रिय सांसद: 242)
साधारण बहुमत का आंकड़ा: 123
NDA का आंकड़ा: 152 सांसद
चूंकि इस संशोधन विधेयक को पारित कराने के लिए केवल साधारण बहुमत (123) की आवश्यकता है और NDA के पास अकेले 152 सांसदों का मजबूत बल है, इसलिए उच्च सदन में इस बिल को बिना किसी बड़ी रुकावट के पास कराए जाने की पूरी संभावना है।
'एंटी-पेपर लीक संशोधन बिल 2026' के मुख्य एवं कड़े प्रावधान
साल 2024 के मूल कानून को और अधिक सख्त बनाते हुए केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह द्वारा पेश किए गए इस विधेयक में निम्नलिखित मुख्य बातें शामिल हैं । संगठित पेपर लीक गिरोह, संस्थानों या दोषी अधिकारियों के लिए जेल की सजा को 5 साल से बढ़ाकर अधिकतम 10 साल कर दिया गया है। इतना ही नहीं पेपर लीक सिंडिकेट और इसमें शामिल सर्विस प्रोवाइडर संस्थानों पर 10 करोड़ रुपये तक का भारी जुर्माना लगाया जाएगा।
मामलों के त्वरित निपटारे के लिए हर राज्य में विशेष अदालतें बनेंगी, जहां रोजाना सुनवाई होगी। राज्य पुलिस या एसटीएफ (STF) को किसी भी पेपर लीक मामले की जाँच अधिकतम 60 दिनों के भीतर पूरी करनी होगी।
संसद में क्यों मचा है घमासान?
हाल ही में NEET-UG 2026 विवाद के कारण पैदा हुए चौतरफा दबाव के चलते तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा था। बुधवार को लोकसभा में चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और सत्ता पक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर गृह मंत्री अमित शाह के इशारे पर पैलेट गन का इस्तेमाल किया गया।
सरकार की तरफ से केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने राहुल गांधी के दावों को बेबुनियाद और तथ्यहीन बताते हुए खारिज किया और साफ किया कि पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए केवल आंसू गैस के गोले छोड़े थे। भारी हंगामे और दो बार स्थगन के बाद अंततः लोकसभा में इसे ध्वनि मत से मंजूरी दे दी गई।
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Written By Shailesh Yadav