वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 के खिलाफ जारी सामाजिक और कानूनी संघर्ष के बीच शुक्रवार को ऐवान-ए-ग़ालिब, नई दिल्ली में जमीयत उलेमा-ए-हिंद के तत्वावधान में ऑल इंडिया मुतवल्लियान कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई। सम्मेलन में देशभर से आए 500 से अधिक मुतवल्लियों, उलेमा, विधि विशेषज्ञों, जनप्रतिनिधियों और विभिन्न सामाजिक-धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। सम्मेलन का मुख्य फोकस वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा, पारदर्शी प्रबंधन, कानूनी तैयारी और जनजागरूकता बढ़ाने पर रहा।

नई दिल्ली में ऑल इंडिया मुतवल्लियान कॉन्फ्रेंस

सम्मेलन की अध्यक्षता सैयद शाह हाफ़िज़ मोहम्मद अली अल-हुसैनी, सज्जादानशीन दरगाह हज़रत ख़्वाजा बंदा नवाज़ गेसूदराज (रह.), गुलबर्गा शरीफ ने की। स्वागत भाषण जमीयत उलेमा-ए-हिंद के महासचिव मौलाना मोहम्मद हकीमुद्दीन क़ासमी ने दिया, जबकि संचालन मौलाना मुफ़्ती हस्सान क़ासमी ने किया।

इसकी हिफाज़त इबादत का हिस्सा- महमूद मदनी

जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी ने कहा कि वक्फ केवल संपत्ति नहीं, बल्कि अल्लाह की अमानत और इस्लामी सभ्यता का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है। उन्होंने कहा कि इसकी सुरक्षा, अभिलेखों का संरक्षण और आवश्यकता पड़ने पर कानूनी लड़ाई लड़ना भी इबादत का हिस्सा है, उन्होंने कहा कि वक्फ की सुरक्षा केवल मुतवल्लियों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरी उम्मत की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा, "जिस क़ौम ने अपनी अमानतों की हिफाज़त छोड़ दी, इतिहास ने भी उसकी हिफाज़त छोड़ दी।"

डिजिटल रिकॉर्ड और वित्तीय पारदर्शिता पर दिया ज़ोर

मौलाना मदनी ने कहा कि वक्फ संस्थानों के सामने बाहरी चुनौतियों के साथ-साथ कमजोर प्रशासन, दस्तावेजों की उपेक्षा और लापरवाही भी बड़ी समस्याएं हैं। उन्होंने मुतवल्लियों से अपील की कि वे वक्फ संपत्तियों का पूरा रिकॉर्ड सुरक्षित रखें, उसे डिजिटल स्वरूप में तैयार करें, नियमित ऑडिट कराएं, वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित करें और अवैध कब्जों के खिलाफ प्रभावी कानूनी कार्रवाई करें, उन्होंने वंशानुगत प्रबंधन की प्रवृत्ति से बचने की सलाह देते हुए कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में वक्फ की सुरक्षा के लिए पूर्णकालिक और योजनाबद्ध प्रयासों की आवश्यकता है।

संवैधानिक मूल्यों को प्राथमिकता देने की अपील

वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 का उल्लेख करते हुए मौलाना मदनी ने सरकार से हर परिस्थिति में न्याय और संवैधानिक मूल्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की अपील की। उन्होंने कहा कि न्याय किसी समुदाय पर किया जाने वाला एहसान नहीं, बल्कि राज्य की सबसे बड़ी शक्ति है और कानून का सम्मान तभी कायम रहता है, जब वह सभी नागरिकों पर समान रूप से लागू हो।

न्यायपालिका और मुतवल्लियों की भूमिका पर चर्चा

पटना हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति इक़बाल अंसारी ने कहा कि वक्फ संपत्तियों के पंजीकरण और कानूनी मामलों में सबसे अधिक कठिनाइयां वहीं सामने आती हैं, जहां मुतवल्ली मौजूद होते हैं। उन्होंने मुतवल्लियों से अपनी जिम्मेदारियों का गंभीरता से निर्वहन करने का आह्वान किया और कहा कि सरकार तथा जनता के बीच विवादों का समाधान अदालतों को संविधान की सीमाओं के भीतर रहकर करना चाहिए।

सभी ने साझा जिम्मेदारी निभाने की अपील की

मरकज़ी जमीयत अहले हदीस हिंद के अमीर मौलाना असगर अली इमाम महदी सलफ़ी ने कहा कि वक्फ की जिम्मेदारी केवल सरकार या मुतवल्लियों की नहीं, बल्कि पूरे समाज की है। जमाअत-ए-इस्लामी हिंद के उपाध्यक्ष मलिक मोतासिम ख़ां ने कहा कि वक्फ संस्थाओं को अधिक प्रभावी और जनहितकारी बनाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि कई विवाद मुतवल्लियों की लापरवाही और वक्फ संपत्तियों को निजी संपत्ति समझने की प्रवृत्ति के कारण भी पैदा हुए हैं। वक्फ संरक्षण के लिए समिति और कानूनी प्रकोष्ठ बनाने का सुझाव सैयद शाह मोहम्मद अली अल-हुसैनी ने वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा, अवैध कब्जों के खिलाफ समयबद्ध कानूनी कार्रवाई और वक्फ कानूनों की व्यापक जानकारी को समय की जरूरत बताया। उन्होंने संपन्न लोगों से नए वक्फ स्थापित करने की अपील भी की।

कानूनी संरक्षण के लिए समिति गठित करने का सुझाव

साउथ एशियन माइनॉरिटीज लॉयर्स एसोसिएशन (SAMLA) के अध्यक्ष एडवोकेट नासिर अज़ीज़ ने प्रत्येक क्षेत्र में वक्फ संरक्षण समितियां और कानूनी प्रकोष्ठ स्थापित करने की वकालत की। उन्होंने युवाओं की भागीदारी बढ़ाने और वक्फ की आय का उपयोग उसके मूल धार्मिक, शैक्षणिक और सामाजिक उद्देश्यों के लिए सुनिश्चित करने पर बल दिया।

सांसदों ने भी रखे अपने विचार

सांसद हरेंद्र मलिक ने वक्फ संपत्तियों में कुप्रबंधन और अपारदर्शिता पर चिंता जताते हुए कहा कि वक्फ की आय गरीबों और जरूरतमंदों के कल्याण में खर्च होनी चाहिए। सांसद मौलाना मोहिबुल्लाह नदवी ने वक्फ संरक्षण के लिए संगठित प्रयासों की आवश्यकता बताई। सांसद इमरान मसूद ने कहा कि धार्मिक संपत्तियों की सुरक्षा केवल मुसलमानों का मुद्दा नहीं है। उन्होंने सभी धर्मों के पूजा स्थलों और उनकी संपत्तियों की सुरक्षा के लिए साझा प्रयासों का आह्वान किया।

देशभर से 500 से अधिक मुतवल्लियों की रही मौजूदगी

सम्मेलन में नवाब अहमद हमीद, एडवोकेट फिरोज़ ग़ाज़ी, मरज़िया ख़ाँ, प्रो. निसार अहमद अंसारी, मौलाना याह्या करीमी, मास्टर मोहम्मद क़ासिम महू, मौलाना मोहम्मद क़ासिम नूरी, मौलाना आफ़ताब आलम सिद्दीकी, मौलाना क़ारी अब्दुल समीअ, ओवैस सुल्तान ख़ाँ सहित देशभर से बड़ी संख्या में उलेमा, अधिवक्ता, सामाजिक कार्यकर्ता और 500 से अधिक मुतवल्ली शामिल हुए। कार्यक्रम के अंत में विशिष्ट अतिथियों का शॉल ओढ़ाकर सम्मान भी किया गया।

 

 

Written By: M. Atharuddin Munne Bharti

Edited By : Toshi Shah