संसद के मानसून सत्र में परीक्षा सुधार से जुड़े विधेयक पर चर्चा के दौरान समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष एवं सांसद अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार की नीतियों, पेपर लीक की घटनाओं और युवाओं के आंदोलनों को लेकर तीखी आलोचना की, उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता की ताकत सबसे बड़ी होती है और जब युवा संगठित होकर अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ते हैं तो सरकारों को भी अपने रुख में बदलाव करना पड़ता है।
सरकार भी झुकती है- अखिलेश यादव
अखिलेश यादव ने कहा आंदोलन के दौरान युवाओं का एक नारा पूरे देश में चर्चा का विषय बना, जिसमें कहा गया कि झुकाने वाला चाहिए, सरकार भी झुकती है, उन्होंने कहा कि सरकार को इस बात का अहंकार था कि वह किसी के सामने नहीं झुकेगी, लेकिन नई पीढ़ी ने अपनी एकजुटता और संघर्ष के दम पर सरकार को अपनी मांगें स्वीकार करने के लिए मजबूर कर दिया, उन्होंने सरकार पर कटाक्ष करते हुए कहा कि युवाओं की प्रमुख मांग संबंधित मंत्री के इस्तीफे की थी और अंततः सरकार ने मंत्री को पद से हटाकर राजनीतिक नुकसान को सीमित करने की कोशिश की, उनके अनुसार, इस कदम का उद्देश्य व्यापक जन असंतोष के असर को कम करना था, साथ ही उन्होंने सवाल उठाया कि जिन मुद्दों पर सरकार सहमति जता चुकी है, उन्हें संसद के माध्यम से औपचारिक रूप क्यों नहीं दिया जा रहा।
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— TNP NEWS (@TNPNEWS1) July 29, 2026
छात्र आंदोलन की व्यापकता पर भी की बात
अपने भाषण में उन्होंने छात्र आंदोलन की व्यापकता का भी उल्लेख किया। उनका कहना था कि इस बार केवल विद्यार्थी ही नहीं, बल्कि उनके अभिभावकों ने भी खुलकर उनका समर्थन किया, उन्होंने इसे आंदोलन की सबसे बड़ी ताकत बताते हुए कहा कि परिवार स्वयं अपने बच्चों को अधिकारों की आवाज बुलंद करने के लिए प्रेरित कर रहे थे।
किसान आंदोलन का भी दिया उदाहरण
किसान आंदोलन का उदाहरण देते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि जब जनदबाव बढ़ता है और जनता अपनी बात पर मजबूती से खड़ी रहती है, तब सरकारों को अपने निर्णयों पर पुनर्विचार करना पड़ता है। उन्होंने तीनों कृषि कानूनों की वापसी को इसी का उदाहरण बताया।
पेपर लीक की घटनाओं पर सरकार से मांगा जवाब
पेपर लीक की घटनाओं को लेकर उन्होंने सरकार से जवाब मांगा। उनका कहना था कि यदि परीक्षा में अनियमितताओं को रोकने के लिए 2024 में कानून बनाया गया था, तो उसके बाद भी प्रश्नपत्र लीक होने की घटनाएं क्यों जारी रहीं, उन्होंने कहा कि लाखों अभ्यर्थियों के साथ-साथ उनके परिवार भी इन घटनाओं से प्रभावित हुए हैं, इसलिए यह केवल छात्रों का नहीं बल्कि पूरे समाज का मुद्दा है।
अखिलेश यादव ने लगाया आरोप
अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि विभिन्न भर्ती परीक्षाओं और प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार विवाद सामने आए हैं, उन्होंने उत्तर प्रदेश की कई भर्ती परीक्षाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि बार-बार पेपर लीक और परीक्षा रद्द होने की घटनाओं ने युवाओं का भरोसा कमजोर किया है, उन्होंने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए और परीक्षा संचालन में आउटसोर्स कर्मचारियों की भूमिका को लेकर सरकार से स्पष्ट जवाब देने की मांग की।
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शिक्षा व्यवस्था को लेकर जताई चिंता
भाषण के अंत में उन्होंने शिक्षा व्यवस्था को लेकर भी चिंता व्यक्त की। उनका आरोप था कि पिछले कुछ वर्षों में सरकारी शिक्षा संस्थानों की स्थिति कमजोर हुई है। उन्होंने कहा कि प्राथमिक विद्यालयों से लेकर विश्वविद्यालयों तक शिक्षा व्यवस्था प्रभावित हुई है और इसका सबसे अधिक असर आर्थिक रूप से कमजोर, दलित तथा पिछड़े वर्ग के विद्यार्थियों पर पड़ा है, क्योंकि उनकी पढ़ाई का मुख्य आधार सरकारी शिक्षण संस्थान ही हैं।
Written By Toshi Shah