भारत ने अपनी रक्षा क्षमता को और सुदृढ़ करते हुए एडवांस्ड अग्नि-5 बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण किया है, जिसमें मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टारगेटेबल री-एंट्री व्हीकल (MIRV) तकनीक का इस्तेमाल किया गया। इस तकनीक की खासियत यह है कि एक ही मिसाइल अलग-अलग दिशाओं में कई वारहेड्स को भेजकर एक साथ कई लक्ष्यों को निशाना बना सकती है।
8 मई 2026 को किया गया था परीक्षण
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह परीक्षण 8 मई 2026 को ओडिशा स्थित डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से किया गया। परीक्षण के दौरान मिसाइल को कई पेलोड्स के साथ लॉन्च किया गया और इसने हिंद महासागर क्षेत्र में विभिन्न स्थानों पर निर्धारित लक्ष्यों को सफलतापूर्वक भेदा। पूरे मिशन को पूरी तरह सफल बताया गया। लॉन्च से लेकर लक्ष्य भेदन तक की हर गतिविधि पर नजर रखने के लिए जमीन और समुद्र आधारित कई ट्रैकिंग और टेलीमेट्री सिस्टम लगाए गए थे, जिन्होंने सभी डेटा रिकॉर्ड किया।
Advanced Agni missile with MIRV (Multiple Independently Targeted Re-Entry Vehicle) system was successfully tested from Dr. APJ Abdul Kalam Island, Odisha on 08th May 2026.
— DRDO (@DRDO_India) May 9, 2026
The missile was flight tested with Multiple payloads, targeted to different targets spatially distributed… pic.twitter.com/W7ufT7pwbt
“मिशन दिव्यास्त्र” दिया गया नाम
इस उपलब्धि के बाद देश की सामरिक क्षमता को और मजबूती मिलने की बात कही जा रही है। हालांकि आधिकारिक तौर पर यह नहीं बताया गया कि इस मिसाइल में कितने वारहेड्स लगाए जा सकते हैं, लेकिन विशेषज्ञों का अनुमान है कि यह चार से पांच स्वतंत्र वारहेड ले जाने में सक्षम हो सकती है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस सफलता पर डीआरडीओ और सशस्त्र बलों को बधाई दी और इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण कदम बताया। इससे पहले मार्च 2024 में भी MIRV तकनीक से लैस अग्नि-5 का परीक्षण किया गया था, जिसे “मिशन दिव्यास्त्र” नाम दिया गया था।
5,000 किलोमीटर से अधिक है मिसाइल की रेंज
अग्नि-5 भारत की सबसे लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों में से एक है, जिसकी मिसाइल की रेंज 5,000 किलोमीटर से अधिक है। यह तीन चरणों वाले ठोस ईंधन इंजन पर आधारित है और इसमें पूरी तरह स्वदेशी एवियोनिक्स और उच्च सटीकता वाले सेंसर इस्तेमाल किए गए हैं। भारत की अग्नि मिसाइल श्रृंखला में अलग-अलग रेंज वाली कई मिसाइलें शामिल हैं—अग्नि-1, अग्नि-2, अग्नि-3 और अग्नि-4 पहले से सेवा में हैं, जिनकी मारक क्षमता क्रमशः 700 से 4,000 किलोमीटर तक है।
भारत की न्यूक्लियर नीति नो फर्स्ट यूज पर आधारित
भारत की परमाणु नीति “नो फर्स्ट यूज़” पर आधारित है, यानी देश पहले परमाणु हमला नहीं करेगा, लेकिन किसी भी हमले का जवाब बड़े स्तर पर देने की क्षमता रखता है। देश के पास भूमि, वायु और समुद्र—तीनों माध्यमों से परमाणु प्रतिक्रिया देने की रणनीतिक क्षमता मौजूद है। हाल ही में नौसेना की परमाणु ऊर्जा से संचालित बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी INS अरिदमन के शामिल होने से समुद्री परमाणु क्षमता और मजबूत हुई है। अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के अनुसार, भारत के पास वर्तमान में लगभग 180 परमाणु हथियार हैं, जो इसे वैश्विक परमाणु शक्तियों की सूची में बनाए रखते हैं।
Written By Toshi Shah