तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के बागी सांसदों की ओर से रविवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात किए जाने के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। जानकारी के अनुसार, पार्टी के लगभग 20 सांसदों ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) को समर्थन देने और किसी क्षेत्रीय दल के साथ जुड़ने की इच्छा जताई है।
टीएमसी नेता कुणाल घोष ने बागी सांसदों पर कसा तंज
इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए टीएमसी नेता कुणाल घोष ने बागी सांसदों की कड़ी आलोचना की, उन्होंने कहा कि ये सांसद स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में नहीं, बल्कि टीएमसी के टिकट पर निर्वाचित हुए थे। उनके अनुसार, जिन मतदाताओं ने उन्हें चुनकर संसद भेजा, वे भाजपा के विरोधी विचारों वाले थे। ऐसे में एनडीए के साथ जाने का निर्णय केवल पार्टी नेतृत्व के साथ ही नहीं, बल्कि उन मतदाताओं के विश्वास के साथ भी विश्वासघात माना जाएगा।
शताब्दी राय ने दिए संकेत
बागी गुट के अगले कदम को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यह समूह पूर्वोत्तर भारत की एक राजनीतिक पार्टी में विलय का रास्ता चुन सकता है, जो एनडीए का हिस्सा है। हालांकि इस संबंध में अभी किसी आधिकारिक घोषणा का इंतजार किया जा रहा है। सूत्रों का दावा है कि यह गुट त्रिपुरा स्थित नेशनलिस्ट सिटिजन पार्टी के साथ विलय पर विचार कर रहा है। सांसद शताब्दी राय ने भी संकेत दिया कि उनका समूह इसी पार्टी के साथ आगे बढ़ने की योजना बना रहा है।
बागी गुट के 20 सांसदों ने स्पीकर से की मुलाकात
रविवार को हुए घटनाक्रम के दौरान बागी गुट के 20 सांसदों ने स्पीकर से मुलाकात की। बताया जा रहा है कि यह संख्या पार्टी के कुल सांसदों के दो-तिहाई से अधिक है। गुट की ओर से सुदीप बंदोपाध्याय ने कहा कि वे भविष्य में टीएमसी के मूल चुनाव चिह्न और संगठनात्मक पहचान पर दावा पेश कर सकते हैं, उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी दल के नाम और चुनाव चिह्न पर दावा करने की एक निर्धारित संवैधानिक और कानूनी प्रक्रिया होती है, उनका कहना था कि संसद का अगला सत्र शुरू होने पर वे अपनी स्थिति औपचारिक रूप से रखेंगे और दो-तिहाई समर्थन के आधार पर पार्टी पर अधिकार का दावा कर सकते हैं।
Written By Toshi Shah