Bihar News: बिहार की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव के बाद एनडीए गठबंधन ने जीत हासिल की थी। सरकार का गठन भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व में किया गया। नई सरकार में सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री बनाया गया, जो बिहार में भाजपा के पहले मुख्यमंत्री बने हैं। वहीं,पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अब राज्यसभा का रुख कर चुके हैं,जिसके बाद राज्य की सियासत में नए समीकरण बनते नजर आ रहे हैं।

मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर तैयारियां पूरी

बिहार मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की कैबिनेट सीमित आकार में है,जिसमें जदयू के केवल 2 वरिष्ठ नेता विजय कुमार चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद शामिल हैं। दोनों को उपमुख्यमंत्री की जिम्मेदारी दी गई है। हालांकि,अब मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर तैयारियां पूरी हो चुकी हैं और कल बड़े पैमाने पर विस्तार किया जाएगा।

कैबिनेट विस्तार पर बोले उमेश कुशवाहा

इस विस्तार से पहले JDU ने अपनी दावेदारी मजबूत कर दी है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने स्पष्ट रूप से कहा है कि नई सरकार में जदयू 16 मंत्री पद चाहती है। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब कैबिनेट विस्तार से ठीक पहले राजनीतिक गतिविधियां चरम पर हैं। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा जदयू की इस मांग को किस हद तक स्वीकार करती है।

मंत्रिमंडल में पुराने चेहरों को मिल सकता है मौका

सूत्रों के मुताबिक,प्रस्तावित मंत्रिमंडल में कई पुराने चेहरों को ही जगह मिलने की संभावना है। इससे यह संकेत मिलता है कि सरकार अनुभव और संतुलन दोनों को ध्यान में रखकर विस्तार करने जा रही है। हालांकि,कुछ नए चेहरों को भी शामिल किए जाने की चर्चा है, जिससे राजनीतिक संतुलन बनाए रखने की कोशिश की जाएगी।

निशांत कुमार मंत्री पद की शपथ लेंगे!

इस बीच,सबसे ज्यादा चर्चा नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को लेकर हो रही है। जानकारी के अनुसार,निशांत कुमार भी इस बार मंत्री पद की शपथ लेने जा रहे हैं। गौरतलब है कि इससे पहले उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा था कि वे फिलहाल कोई राजनीतिक जिम्मेदारी नहीं लेना चाहते और राज्य का भ्रमण करेंगे। लेकिन अब पार्टी नेतृत्व के मनाने के बाद उन्होंने मंत्री पद स्वीकार करने का फैसला किया है।

कैबिनेट विस्तार कई मायनों में महत्वपूर्ण

बिहार में होने वाला यह कैबिनेट विस्तार कई मायनों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे न केवल सरकार की कार्यशैली पर असर पड़ेगा,बल्कि एनडीए के भीतर सहयोगी दलों के बीच शक्ति संतुलन भी तय होगा। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि कल होने वाले विस्तार में किसे जगह मिलती है और किसे नहीं।

Written By: Geeta Sharma