अबू धाबी। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) सहित आठ मुस्लिम बहुल देशों ने गाजा में जारी सैन्य अभियान को लेकर इज़राइल की कड़ी आलोचना की है। इन देशों का कहना है कि इज़राइल की मौजूदा कार्रवाई अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की गाजा शांति योजना को कमजोर कर रही है और क्षेत्र में शांति स्थापित करने के प्रयासों को नुकसान पहुंचा रही है।

यह संयुक्त बयान यूएई, कतर, जॉर्डन, इंडोनेशिया, पाकिस्तान, तुर्किये, सऊदी अरब और मिस्र के विदेश मंत्रियों की ओर से जारी किया गया। बयान में कहा गया कि इज़राइल का सैन्य अभियान गाजा शांति योजना के दूसरे चरण को लागू करने की अंतरराष्ट्रीय कोशिशों में बाधा डाल रहा है, जबकि विभिन्न फिलिस्तीनी गुट इस योजना को स्वीकार कर चुके हैं।

संयुक्त बयान में आरोप लगाया गया कि इज़राइल की कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय कानून और मानवीय कानून (International Humanitarian Law) का स्पष्ट उल्लंघन है। देशों ने चेतावनी दी कि यदि सैन्य अभियान जारी रहा तो महीनों की कूटनीतिक कोशिशें विफल हो सकती हैं, हिंसा का नया दौर शुरू हो सकता है और गाजा का मानवीय संकट और गहरा जाएगा।

विदेश मंत्रियों ने विशेष रूप से गाजा में अस्पतालों, स्वास्थ्य केंद्रों और अन्य नागरिक ढांचे पर हमलों की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि महिलाओं और बच्चों समेत बड़ी संख्या में नागरिकों की मौत बेहद चिंताजनक है और यह अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ है।

संयुक्त बयान में कहा गया कि नागरिकों, चिकित्सा संस्थानों, स्वास्थ्यकर्मियों और राहत कर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सभी पक्षों की कानूनी जिम्मेदारी है। साथ ही गाजा के सभी हिस्सों तक दवाइयों, राहत सामग्री और मानवीय सहायता की सुरक्षित एवं निर्बाध आपूर्ति की मांग की गई।

आठों देशों ने कहा कि गाजा का संकट केवल इसी क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका संबंध पश्चिमी तट (वेस्ट बैंक) और पूर्वी यरुशलम की स्थिति से भी जुड़ा हुआ है। उन्होंने दो-राष्ट्र समाधान (Two-State Solution) के प्रति अपना समर्थन दोहराया और फिलिस्तीनी क्षेत्रों के विलय या लोगों के जबरन विस्थापन का विरोध किया।

यह बयान ऐसे समय आया है जब गाजा युद्धविराम योजना को लेकर इज़राइल और अमेरिका के बीच मतभेद सामने आए हैं। ट्रंप की प्रस्तावित योजना के तहत हमास को हथियार सौंपने के बदले इज़राइल को सैन्य कार्रवाई रोकनी थी और चरणबद्ध तरीके से गाजा से सेना हटानी थी।

हालांकि, इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा है कि जब तक हमास पूरी तरह हथियार नहीं छोड़ता, तब तक इज़राइली सेना अपनी मौजूदा स्थिति से पीछे नहीं हटेगी। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि इस समझौते के मसौदे को लेकर ट्रंप प्रशासन और इज़राइल के बीच मतभेद हैं।

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नेतन्याहू ने कहा कि इज़राइल ने अमेरिकी मसौदे पर अपनी टिप्पणियां भेज दी हैं और देश अपने राष्ट्रीय हितों से कोई समझौता नहीं करेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि इज़राइली रक्षा बल अपने नागरिकों और क्षेत्र की सुरक्षा के लिए आवश्यक सभी कदम उठाते रहेंगे।

विश्लेषकों के अनुसार, हमास के निरस्त्रीकरण और इज़राइली सेना की वापसी के क्रम को लेकर बना गतिरोध ही फिलहाल गाजा युद्धविराम समझौते के अगले चरण में सबसे बड़ी बाधा बना हुआ है।

Written By: Pradeep Singh