आज की तेज रफ्तार जिंदगी में अकेले खाना खाना कई लोगों की रोजमर्रा की आदत बन चुका है। ऑफिस में लंच के दौरान हो या घर पर रात के खाने का समय, लोग अक्सर मोबाइल, टीवी या लैपटॉप देखते हुए अकेले ही खाना खा लेते हैं। देखने में यह एक सामान्य आदत लग सकती है, लेकिन अगर लंबे समय तक यही रूटीन बना रहे, तो इसका असर व्यक्ति की मानसिक सेहत और सामाजिक जुड़ाव पर भी पड़ सकता है।

क्यों बढ़ रहा है अकेले खाना खाने का चलन?

बदलती लाइफस्टाइल ने लोगों के खाने के तरीके को भी प्रभावित किया है। वर्क फ्रॉम होम, लंबे काम के घंटे, व्यस्त दिनचर्या और डिजिटल स्क्रीन पर बढ़ता समय लोगों को परिवार या दोस्तों के साथ बैठकर भोजन करने से दूर कर रहा है। कई लोग समय बचाने के लिए जल्दी-जल्दी खाना खा लेते हैं, जबकि कुछ लोगों की सामाजिक परिस्थितियां ऐसी होती हैं कि उन्हें अकेले ही भोजन करना पड़ता है। धीरे-धीरे यह आदत रोज की जिंदगी का हिस्सा बन जाती है और व्यक्ति को इसका असर महसूस भी नहीं होता।

अकेले खाना मानसिक स्वास्थ्य को कैसे कर सकता है प्रभावित?

भोजन केवल शरीर को ऊर्जा देने का माध्यम नहीं है, साथ बैठकर खाना लोगों के बीच बातचीत और भावनात्मक जुड़ाव बढ़ाने का भी एक जरिया होता है। परिवार के साथ डिनर करते समय दिनभर की बाते साझा करना, दोस्तों के साथ हंसी-मजाक करना या सहकर्मियों के साथ लंच पर बातचीत करना तनाव कम करने में मदद कर सकता है। इसके उलट, अगर कोई व्यक्ति लगातार अकेले खाना खाता है और सामाजिक बातचीत के ऐसे मौके कम हो जाते हैं, तो उसे धीरे-धीरे अलगाव या अकेलेपन का एहसास हो सकता है। लंबे समय तक सामाजिक दूरी बने रहने पर तनाव, चिंता और लो मूड जैसी परेशानियों का जोखिम बढ़ सकता है। अकेले खाना खाने की एक दूसरी समस्या स्क्रीन से जुड़ी है। भोजन के दौरान लगातार मोबाइल, टीवी या लैपटॉप पर ध्यान रहने से व्यक्ति अपने खाने पर ध्यान नहीं दे पाता। इससे कब और कितना खाना है, इसका अंदाजा कम हो सकता है और जरूरत से ज्यादा खाने की आदत विकसित हो सकती है। इसे माइंडफुल ईटिंग की कमी से भी जोड़ा जाता है।

इस आदत को बदलने के लिए क्या करें?

अगर आपकी दिनचर्या में अकेले खाना आम हो गया है, तो इसे बदलने के लिए बड़े बदलाव की जरूरत नहीं है। सप्ताह में कुछ दिन परिवार के सदस्यों के साथ भोजन करने की शुरुआत की जा सकती है। ऑफिस में भी संभव हो तो सहकर्मियों के साथ लंच करने की कोशिश करें। खाने के समय मोबाइल और लैपटॉप को कुछ देर दूर रखना भी फायदेमंद हो सकता है। इससे आप भोजन के स्वाद और मात्रा पर बेहतर ध्यान दे पाएंगे और साथ मौजूद लोगों के साथ बातचीत का मौका भी मिलेगा,  अगर किसी वजह से अकेले खाना ही पड़ता है, तो परिवार या दोस्तों से वीडियो कॉल पर बातचीत करते हुए भोजन किया जा सकता है। हालांकि यह आमने-सामने बैठकर खाने का पूरी तरह विकल्प नहीं है, फिर भी यह सामाजिक जुड़ाव बनाए रखने में मदद कर सकता है।

 

 

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