Gaya-Darbhanga Expressway: बिहार में बन रहा गया-दरभंगा एक्सप्रेसवे राज्य के सड़क नेटवर्क को एक नई रफ्तार देने वाला है। आमस-दरभंगा एक्सप्रेसवे के नाम से भी जाना जाने वाला यह ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे पूरा होने के बाद बिहार के कई प्रमुख शहरों को तेज सड़क कनेक्टिविटी देगा। इसका फायदा सिर्फ बिहार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उत्तर प्रदेश, झारखंड और पश्चिम बंगाल तक आने-जाने में भी समय कम हो सकता है।
करीब 190 किलोमीटर लंबे आमस-दरभंगा एक्सप्रेसवे (NH-119D) को चार लेन का बनाया जा रहा है। लिंक रूट को जोड़ने पर इसकी कनेक्टिविटी करीब 230 किलोमीटर तक पहुंचती है। एक्सप्रेसवे दक्षिण बिहार के औरंगाबाद-गया क्षेत्र को उत्तर बिहार के दरभंगा से जोड़ेगा।
आमस से दरभंगा तक कहां-कहां से गुजरेगा एक्सप्रेसवे?
इस एक्सप्रेसवे की शुरुआत औरंगाबाद और गया जिले की सीमा के पास आमस से होगी। यहां से यह दिल्ली-कोलकाता NH-19 से जुड़ेगा। इसका उत्तरी छोर दरभंगा के बेला नवादा के पास होगा, जहां यह NH-27 के ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर से कनेक्ट होगा।
इसके रूट में कई महत्वपूर्ण जिले आएंगे।
रूट:
- औरंगाबाद
- गया
- जहानाबाद
- पटना
- वैशाली
- समस्तीपुर
- दरभंगा
इसके अलावा लिंक रोड के जरिए बोधगया और राजगीर को भी जोड़ने की योजना है।
गया से दरभंगा का सफर 3-4 घंटे में?
अभी आमस या गया से दरभंगा जाने में करीब 6 से 7 घंटे तक लग सकते हैं। एक्सप्रेसवे चालू होने के बाद यह सफर घटकर करीब 3 से 4 घंटे रह सकता है।
इसका फायदा कारोबार के साथ-साथ पर्यटन को भी मिलेगा। बोधगया, राजगीर और वैशाली जैसे महत्वपूर्ण पर्यटन और धार्मिक स्थलों तक पहुंचना आसान होगा। देश के अलग-अलग हिस्सों से आने वाले पर्यटकों को भी सड़क के जरिए बेहतर कनेक्टिविटी मिल सकेगी।
दिल्ली, पटना और कोलकाता का सफर भी होगा तेज
आमस-दरभंगा एक्सप्रेसवे के दूसरे एक्सप्रेसवे से जुड़ने के बाद बिहार से दिल्ली और कोलकाता जाने में लगने वाला समय भी कम होने की उम्मीद है।
| रूट | अभी अनुमानित समय | एक्सप्रेसवे के बाद संभावित समय |
| दरभंगा-दिल्ली | 18-22 घंटे | 10-12 घंटे |
| पटना-दिल्ली | 16-18 घंटे | 7-8 घंटे |
| दरभंगा-कोलकाता | 14-16 घंटे | 7-8 घंटे |
| आमस-कोलकाता | 10-12 घंटे | 5-6 घंटे |
| वाराणसी-गया | 5-6 घंटे | 2-2.5 घंटे |
| वाराणसी-दरभंगा | 10-12 घंटे | 5-6 घंटे |
मखाना और लीची जैसे उत्पादों को भी मिलेगा फायदा
यह एक्सप्रेसवे सिर्फ यात्रियों के लिए नहीं, बल्कि बिहार के कारोबार के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उत्तर बिहार के मखाना, लीची और दूसरे कृषि उत्पादों को दक्षिण बिहार के बाजारों के साथ-साथ दिल्ली-कोलकाता कॉरिडोर और आगे बंदरगाहों तक पहुंचाना आसान हो सकता है।बेहतर सड़क कनेक्टिविटी से ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स का समय कम होने की उम्मीद है। इससे औद्योगिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिल सकता है।
गंगा पर बनेगा 6 लेन का नया पुल
पटना के पास इस कनेक्टिविटी में कच्ची दरगाह-बिदुपुर महासेतु की भी महत्वपूर्ण भूमिका होगी। करीब 9.75 किलोमीटर लंबे इस छह लेन पुल के जरिए गंगा पार करना आसान होगा।इसके अलावा एक्सप्रेसवे को पटना आउटर रिंग रोड से जोड़ने की योजना से शहर के भीतर जाने की जरूरत कम हो सकती है। इससे लंबी दूरी के वाहनों को पटना के भीड़भाड़ वाले हिस्सों से बाहर निकलने का वैकल्पिक रास्ता मिलेगा।
बोधगया और राजगीर सीधे जुड़ेंगे
बिहार सरकार राज्य के प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थलों को सड़क नेटवर्क से जोड़ने पर भी काम कर रही है। इसी योजना के तहत आमस-दरभंगा एक्सप्रेसवे से बोधगया और राजगीर को लिंक रोड के जरिए जोड़ने का प्रस्ताव है।बोधगया, गया और राजगीर आने वाले पर्यटकों के लिए यह कनेक्टिविटी काफी उपयोगी हो सकती है। इससे धार्मिक पर्यटन सर्किट को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे से भी जुड़ेगा
आमस-दरभंगा एक्सप्रेसवे की सबसे अहम खासियतों में से एक इसकी दूसरे बड़े एक्सप्रेसवे से कनेक्टिविटी है। इसे वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे (NH-319B) से जोड़ने की योजना है।वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल को हाईस्पीड सड़क नेटवर्क से जोड़ेगा। इसका बिहार वाला हिस्सा कैमूर, रोहतास, औरंगाबाद और गया से होकर गुजरता है।रूट में बदलाव के तहत सासाराम के पहाड़ी क्षेत्र में सुरंग बनाने का प्रस्ताव भी है। इससे एक्सप्रेसवे की दूरी करीब 15 किलोमीटर तक कम होने की बात कही गई है और गया-राजगीर की कनेक्टिविटी को भी फायदा मिल सकता है।
यूपी, झारखंड और बंगाल तक आसान होगा रास्ता
वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे और आमस-दरभंगा एक्सप्रेसवे के आपस में जुड़ने के बाद बिहार के लिए उत्तर प्रदेश, झारखंड और पश्चिम बंगाल की कनेक्टिविटी और बेहतर होगी।वाराणसी से लेकर गया, दरभंगा, रांची और कोलकाता तक सड़क नेटवर्क मजबूत होने से लंबी दूरी के सफर में समय की बचत हो सकती है। वहीं उत्तर बिहार से सिलीगुड़ी तक भी कनेक्टिविटी बेहतर करने की योजना पर काम हो रहा है।यानी आने वाले समय में आमस-दरभंगा एक्सप्रेसवे सिर्फ गया और दरभंगा के बीच का रास्ता नहीं रहेगा, बल्कि यह बिहार को देश के बड़े हाईस्पीड एक्सप्रेसवे नेटवर्क से जोड़ने वाली अहम कड़ी बन सकता है।